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News in Short
- उद्योगपति और व्यापारियों की संस्था भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव की चल रही है प्रक्रिया।
- 16 जनवरी को नाम वापसी के बाद 1 फरवरी को पदाधिकारियों के लिए होगा मतदान।
- चैंबर के सदस्य ने शुल्क जमा कराने के बाद भी मतदाता सूची में नाम न होने की शिकायत की है।
- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की शिकायत करते हुए आजीवन सदस्य ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
- मतदाता सूची में कुछ व्यापारियों के नाम दो जगह शामिल करने पर भी उठ रहा है विवाद
News in Detail
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चुनाव भी विवादों में घिर गए हैं। चैंबर के एक सदस्य ने पूर्व पदाधिकारी के इशारे पर मतदाता सूची से नाम हटाने की शिकायत की है। इसकी शिकायत मिनिस्ट्री ऑफ कंपनीज के साथ ही ग्वालियर स्थित कंपनी रजिस्ट्रार और कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह से की गई है। इस शिकायत के बाद चैंबर चुनावों को लेकर हलचल और खेमेबंदी और तेज हो गई है।
चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज भोपाल राजधानी के प्रमुख व्यापारी और उद्योगपतियों की शीर्ष संस्था है। व्यापारिक प्रतिनिधित्व वाली इस संस्था में 2026-29 के लिए पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी का चुनाव हो रहा है।
16 जनवरी को नाम वापसी के बाद, अध्यक्ष पद के लिए गोविंद गोयल और तेजकुलपाल सिंह पाली के बीच मुकाबला तय माना जा रहा है। 36 पदों के लिए प्रमुख फर्म और कंपनियों के मालिक चुनावी मैदान में हैं। चैंबर में 2224 मतदाता हैं, जो मतदान करेंगे।
4 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच 171 नए सदस्य बने। 209 पूर्व सदस्यों ने गतिविधि शुल्क जमा कर सदस्यता सुरक्षित की। चैंबर को नवीन सदस्यता और गतिविधि शुल्क के रूप में 20 लाख 63 हजार 837 रुपए प्राप्त हुए। मौजूदा प्रबंध समिति के कार्यकाल में चैंबर के पास 1 करोड़ 9 लाख 91 हजार 509 रुपए का फंड जमा है। चुनाव व्यापारिक क्षेत्र में प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिहाज से अहम हैं, इस कारण कारोबारी तबका सक्रिय है।
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शुल्क जमा फिर भी वोटर लिस्ट से नाम गायब
चुनावी हलचलों को व्यापारी सुनील गोधा की शिकायत ने बढ़ा दिया है। सुनील गोधा ने भोपाल कलेक्टर, कंपनी रजिस्ट्रार ग्वालियर और कंपनी मामलों के केंद्रीय मंत्रालय को ईमेल के जरिए शिकायत की है।
गोधा का आरोप है कि चैंबर में आजीवन सदस्यता के साथ उन्होंने गतिविधि शुल्क के रूप में 9900 रुपए 27 सितम्बर को जमा कराए थे। इसकी रसीद भी उनके पास है। इसके बावजूद चुनाव प्रक्रिया के दौरान जब मतदाता सूची जारी हुई तो उनका नाम हटा दिया गया।
उनके अलावा ऐसे और भी सदस्यों को वोटर लिस्ट से बाहर रखा गया है। जबकि कुछ व्यापारियों को वोटर लिस्ट में दो-दो जगह दी गई है। शुल्क जमा करने के बाद सदस्य को मतदान के अधिकार से बाहर नहीं किया जा सकता।
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चुनाव प्रभावित करने के इरादे से की गड़बड़
शिकायतकर्ता सुनील गोधा का कहना है चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव उद्योगपतियों और व्यापारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। इसी वजह से कुछ लोगों ने हितों के टकराव के चलते मतदाता सूची में गड़बड़ी कराई है।
चैंबर के चुनाव अधिकारी के सामने भी मतदाता सूची से नाम बाहर करने की शिकायत दर्ज कराई गई है। यह सूची जल्दबाजी में तैयार की गई है। ऐसा कुछ खास लोगों के इशारे पर किया गया है। उन्होंने इसकी शिकायत कर चैंबर के चुनाव निष्पक्ष कराने की मांग की है। इस शिकायत के बाद कुछ अन्य व्यापारियों ने भी चुनाव में गड़बड़ी की आशंका जताई है।
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