पत्नी की गुप्त रिकॉर्डिंग पर हाईकोर्ट का फैसला, निजता के आधार पर नहीं होगी खारिज
Neel Tiwari | Aug 14, 2026, 11:33 IST
वैवाहिक विवाद पर जबलपुर हाईकोर्ट का फैसला
छतरपुर के वैवाहिक विवाद में पत्नी पर एडल्ट्री के आरोप लगे हैं। इसमें पति ने बातचीत की रिकॉर्डिंग को सबूत बनाया। फैमिली कोर्ट ने निजता के आधार पर रिकॉर्डिंग की सबूत नहीं माना। हाईकोर्ट ने कहा कि गुप्त रिकॉर्डिंग सिर्फ इसी आधार पर खारिज नहीं होगी।
समझें क्या है पूरा मामला...
- छतरपुर की महिला ने पति से भरण पोषण मांगा था।
- पति ने पत्नी पर एडल्ट्री के गंभीर आरोप लगाए थे।
- पति ने दूसरे पुरुषों से बातचीत की रिकॉर्डिंग पेश की।
- फैमिली कोर्ट ने निजता के आधार पर रिकॉर्डिंग रोक दी।
- हाईकोर्ट ने रिकॉर्डिंग की जांच का रास्ता साफ किया।
एडल्ट्री आरोपों से शुरू हुआ पूरा विवाद
पति ने पत्नी की कई बातचीत रिकॉर्ड की थी। ये रिकॉर्डिंग पत्नी की जानकारी के बिना की गई थी। पति ने रिकॉर्डिंग वाली सीडी कोर्ट में पेश की। साथ में बातचीत का ट्रांसक्रिप्ट भी पेश किया गया। पति का दावा था कि रिकॉर्डिंग से आरोप साबित होंगे।
पति ने किया भरण पोषण का विरोध
पति ने कोर्ट से डिजिटल सबूत स्वीकार करने की मांग की। उसका कहना था कि रिकॉर्डिंग मामले की सच्चाई सामने ला सकती है। रिकॉर्डिंग में पत्नी की कई पुरुषों से बातचीत बताई गई। इसी आधार पर एडल्ट्री के आरोप लगाए गए।
2018 में फैमिली कोर्ट ने छह हजार रुपए तय किए थे
पति दिल्ली में आरपीएफ कांस्टेबल बताया गया है। उसने बाद में पत्नी के कथित संबंधों का मुद्दा उठाया। पति ने कहा कि पत्नी एडल्ट्री में रह रही है। इसी वजह से उसने भरण पोषण का विरोध किया।
गुप्त कॉल रिकॉर्डिंग पर फैमिली कोर्ट ने लगाई रोक
फैमिली कोर्ट ने रिकॉर्डिंग पर विचार नहीं करने का फैसला लिया। पति ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद मामला जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचा। यहां निजता और डिजिटल सबूत का सवाल उठा।
गुप्त रिकॉर्डिंग से सबूत खत्म नहीं होता
कोर्ट ने निजता को पूर्ण अधिकार मानने से इनकार किया। वैवाहिक मुकदमे में प्रासंगिक सबूत देखे जा सकते हैं। कोर्ट को मामले की सच्चाई तक पहुंचना जरूरी है। इसके लिए जरूरी डिजिटल सामग्री की जांच हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी दिया हवाला
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्डिंग छिपकर हुई है। यह अकेला कारण उसे खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं है। पहले उसकी प्रासंगिकता और विश्वसनीयता देखनी होगी। इसके बाद ही उसके असर पर फैसला होगा।
एडल्ट्री का आरोप लगा, लेकिन साबित नहीं माना गया
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि एडल्ट्री साबित हो गई। हाईकोर्ट ने केवल सबूत की जांच का रास्ता खोला है। आरोप सही हैं या नहीं, यह बाद में तय होगा। अंतिम फैसला फैमिली कोर्ट की सुनवाई के बाद आएगा।
सीडी और बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट की होगी जांच
कोर्ट यह भी देखेगा कि बातचीत मामले से जुड़ी है। रिकॉर्डिंग आरोपों को कितना साबित करती है। इसकी विश्वसनीयता कितनी है, यह भी देखा जाएगा। इसके बाद भरण पोषण पर आगे फैसला होगा।
छह हजार रुपए का भुगतान फिलहाल बंद नहीं होगा
दोनों पक्षों को 16 सितंबर 2026 को पेश होना है। इसी दिन आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीडी और ट्रांसक्रिप्ट पर भी सुनवाई आगे बढ़ेगी।
इस फैसले से वैवाहिक मामलों में क्या बदलेगा
इस फैसले से एक बात साफ होती है। गुप्त रिकॉर्डिंग को सिर्फ इसी आधार पर हटाया नहीं जा सकता। लेकिन हर रिकॉर्डिंग सही सबूत भी नहीं मानी जाएगी। उसकी जांच और विश्वसनीयता तय करना जरूरी होगा।
एडल्ट्री आरोपों वाले मामलों में यह बात अहम है
वहीं आरोप और साबित तथ्य अलग चीजें हैं। कोर्ट ने अभी एडल्ट्री पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया। सिर्फ रिकॉर्डिंग की जांच का आदेश दिया गया है। इसलिए अंतिम नतीजे का इंतजार करना जरूरी है।
निजता और न्याय के बीच हाईकोर्ट ने बनाया संतुलन
इस फैसले में डिजिटल दौर की नई चुनौती दिखती है। मोबाइल बातचीत अब अदालतों में सबूत बन सकती है लेकिन उसके इस्तेमाल पर कानूनी जांच जरूरी रहेगी।
अब फैमिली कोर्ट के फैसले पर रहेगी नजर
फिलहाल पति को छह हजार रुपए देना जारी रखना होगा। पत्नी पर लगे एडल्ट्री आरोप अभी अंतिम रूप से साबित नहीं हैं। मामले का अगला अहम पड़ाव 16 सितंबर है। उसी दिन फैमिली कोर्ट में दोनों पक्ष उपस्थित होंगे।
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