इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज को सुप्रीम कोर्ट से झटका, 500 करोड़ की जमीन सरकारी घोषित पर कलेक्टर ही लेंगे फैसला
Sanjay Gupta | Jan 08, 2026, 10:24 IST
christian college indore supreme court
इंदौर क्रिश्चन कॉलेज की 500 करोड़ रुपए की जमीन को सरकारी घोषित करने का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया।
Indore News:इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज की 500 करोड़ की जमीन को सरकारी घोषित करने मामले में प्रिंसिपल अमित डेविड को सुप्रीम कोर्ट से भी तगड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट में हुए फैसले के बाद कॉलेज प्रबंधन ने जमीन बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल पिटीशन दायर की थी, जो खारिज हो गई।
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कलेक्टर ने क्रिश्चियन कॉलेज की जमीन को सरकारी घोषित करने के लिए प्रबंधन को नोटिस दिया था। इसका केस कलेक्टर कोर्ट में चल रहा है। इसके साथ ही टीएंडसीपी को भी आदेश दिए थे कि इस जमीन को लेकर कोई भी नक्शा पास नहीं किया जाए।
इस नोटिस के खिलाफ कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट में अपील की थी। इसमें हाईकोर्ट ने नोटिस पर रोक लगाने से यह कहते हुए इनकार किया था कि अभी कलेक्टर कोर्ट में केस है। याचिकाकर्ता को वहां जवाब देने का अवसर है।
इसके बाद कॉलेज सुप्रीम कोर्ट गया था। यहां भी सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। हालांकि यह कहा है कि हाईकोर्ट में आदेश दिए गए थे उसी परिप्रेक्ष्य में उचित प्राधिकारी द्वारा विधि के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
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रिट अपील में Christian Collegeका पक्ष रहा है कि यह नोटिस तो बहाना है। प्रशासन पहले ही तय कर चुका है कि जमीन को सरकारी घोषित करना है। इस पर शासन पक्ष की ओर से जवाब दिया गया कि राजस्व संहिता की धारा 182(2) के तहत नोटिस जारी हुआ है। इसमें संबंधित याचिकाकर्ता पक्ष रख सकते हैं।
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क्रिश्चियन कॉलेज प्रिंसिपल अमित डेविड इंदौर के कई बिल्डर से कर चुके करोड़ों के सौदे
कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अमित डेविड इंदौर के कस्बा सर्वे नंबर 407/1669/3 कुल 68.303 हेक्टेयर में से 1.702 हेक्टेयर पर बने क्रिश्चियन कॉलेज भूमि पर लंबे समय से नक्शा पास कराने में जुटे हुए हैं। यह नक्शा यहां पर व्यावसायिक ऑफिस, दुकान बनाने का है।
क्रिश्चियन कॉलेज की यह फाइल लंबे समय से कलेक्ट्रेट के गलियारों में एसडीएम, तहसीलदार से लेकर अलग-अलग अधिकारियों के पास दौड़ रही है। उधर प्रिंसिपल डेविड ने इसके नक्शे के लिए टीएंडसीपी में फाइल लगा दी।
आखिरकार इसमें कलेक्टर शिवम वर्मा ने एसडीएम जूनी और तहसीलदार की टीम बनाकर जमीन की जांच कराई और रिपोर्ट ली। इस जांच के बाद अब कलेक्टर ने टीएंडसीपी को पत्र लिख दिया और इसमें इस जमीन पर किसी भी तरह की मंजूरी देने पर रोक लगा दी। साथ ही कॉलेज प्रबंधन को नोटिस देकर जवाब मांगा है। यह केस कलेक्टर कोर्ट में चल रहा है।
कलेक्टर ने जांच रिपोर्ट के आधार पर पाया कि दस्तावेज दानपत्र, हिस्ट्री ऑफ यूएनसीआई आदि में है कि यह भूमि महाराजा होलकर द्वारा 1 दिसंबर 1887 को कुछ शर्तों के साथ बिना रेंट अनुदान के दी गई। शर्तों के तहत भूमि उपयोग केवल विद्यालय व महिला अस्पताल के लिए किए जाने का प्रावधान था। जब तक यह उपयोग होगा मिशन द्वारा उपयोग किया जाता रहेगा और समाप्त होने पर भूमि वापस महारानी या उसके उत्तराधिकारी द्वारा ली जा सकेगी। कलेक्टर की जांच में आया कि यहां महिला अस्पताल नहीं है और कॉलेज भी समाप्ति की ओर है, ऐसे में संस्था का मूल उद्देश्य खत्म हो चुका है।
कलेक्टर ने पत्र में ही लिखा है कि महाराज के उत्तराधिकार के तौर पर अब मप्र शासन है। ऐसे में जमीन शासन की होकर शासकीय है। इसलिए प्रोफेशनल ऑफिसेस, उपयोग के लिए नक्शा पास नहीं किया जा सकता है।
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कलेक्टर के नोटिस के खिलाफ गए थे
इस नोटिस के खिलाफ कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट में अपील की थी। इसमें हाईकोर्ट ने नोटिस पर रोक लगाने से यह कहते हुए इनकार किया था कि अभी कलेक्टर कोर्ट में केस है। याचिकाकर्ता को वहां जवाब देने का अवसर है।
इसके बाद कॉलेज सुप्रीम कोर्ट गया था। यहां भी सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। हालांकि यह कहा है कि हाईकोर्ट में आदेश दिए गए थे उसी परिप्रेक्ष्य में उचित प्राधिकारी द्वारा विधि के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
कॉलेज का याचिकाओं में यह है पक्ष
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रिट अपील में Christian Collegeका पक्ष रहा है कि यह नोटिस तो बहाना है। प्रशासन पहले ही तय कर चुका है कि जमीन को सरकारी घोषित करना है। इस पर शासन पक्ष की ओर से जवाब दिया गया कि राजस्व संहिता की धारा 182(2) के तहत नोटिस जारी हुआ है। इसमें संबंधित याचिकाकर्ता पक्ष रख सकते हैं।
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कलेक्टर शिवम वर्मा ने यह दिया था आदेश
आखिरकार इसमें कलेक्टर शिवम वर्मा ने एसडीएम जूनी और तहसीलदार की टीम बनाकर जमीन की जांच कराई और रिपोर्ट ली। इस जांच के बाद अब कलेक्टर ने टीएंडसीपी को पत्र लिख दिया और इसमें इस जमीन पर किसी भी तरह की मंजूरी देने पर रोक लगा दी। साथ ही कॉलेज प्रबंधन को नोटिस देकर जवाब मांगा है। यह केस कलेक्टर कोर्ट में चल रहा है।
कलेक्टर के टीएंडसीपी पत्र में यह लिखा है
अब जमीन भी वापस लेंगे
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