मप्र में बीजेपी के दिग्गजों में जातिगत पेंच, एक की राह आसान, लेकिन सात सीटों पर कांटे की टक्कर, जीत के लिए भेदना होगा चक्रव्यूह
Jitendra Shrivastava | Sept 29, 2023, 24:00 IST
मप्र में बीजेपी के दिग्गजों में जातिगत पेंच, एक की राह आसान, लेकिन सात सीटों पर कांटे की टक्कर, जीत के लिए भेदना होगा चक्रव्यूह
बीजेपी ने हारी सीटें जीतने के लिए विधानसभा चुनाव की महाभारत में महारथी उतार दिए हैं, लेकिन ये महारथी जातिगत समीकरण के चक्रव्यूह में फंस गए हैं।
अरुण तिवारी, BHOPAL. बीजेपी ने हारी सीटें जीतने के लिए पांसे तो फेंक दिए हैं, लेकिन पौ बारह आएंगे यह कहना मुश्किल हैं। विधानसभा चुनाव की महाभारत में बीजेपी ने महारथी उतार दिए हैं, लेकिन ये महारथी जातिगत समीकरण के चक्रव्यूह में फंस गए हैं। इससे निकलने के लिए इनको इस चक्रव्यूह को भेदना होगा। चुनाव में जाति के चक्रव्यूह को भेदना इतना आसान नहीं होता है। बीजेपी ने चुनावी कुरुक्षेत्र में हारी सीटों पर सात सांसदों को उतारा है जिनमें से तीन केंद्रीय मंत्री हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते समेत सांसद रीति पाठक, राकेश सिंह, गणेश सिंह और उदयप्रताप सिंह शामिल हैं। इनके साथ ही आठवां नाम बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का है। इन आठ नामों में सबसे आसान राह प्रहलाद पटेल की हो सकती है। लेकिन बाकी सात दिग्गज जातिगत समीकरणों में फंस गए हैं। आइए आपको दिखाते हैं इन सीटों के जातिगत समीकरण की पड़ताल करती रिपोर्ट।
दिमनी : नरेंद्र सिंह तोमर
ये खबर भी पढ़िए..
महिला आरक्षण विधेयक अब बन गया कानून, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरी, सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी किया
नरसिंहपुर : प्रहलाद पटेल
ये खबर भी पढ़िए..
मेनका गांधी के खिलाफ 100 करोड़ का मानहानि का दावा करेगा इस्कॉन कोलकाता, नोटिस भेजा
जबलपुर पश्चिमः राकेश सिंह
इंदौर एक : कैलाश विजयवर्गीय
निवास : फग्गन सिंह कुलस्ते
गौंड आदिवासी वोटर
यहां पर लड़ाई सीधे तौर पर जाति की नहीं है। फग्गन सिंह कुलस्ते गौंड आदिवासी समुदाय से आते हैं तो मौजूदा विधायक कांग्रेस के डॉ. अशोक मस्कोले हैं जिनकी जाति भी गौंड आदिवासी है। फग्गन सिंह लगातार यहां से सांसद रहे हैं और केंद्र में मंत्री भी, लेकिन यहां पर इस बार विश्वास और विकास का संकट है। पेशाब कांड और चप्पल कांड का आदिवासियों पर प्रभाव है। बड़ा आदिवासी चेहरा होने के कारण फग्गन के लिए ये प्रतिष्ठा की लड़ाई है और यही कारण है कि उनके लिए जीत राह आसान नजर नहीं आती। यह बात इसलिए मायने रखती है क्योंकि 2018 में कांग्रेस के मस्कोले ने फग्गन के भाई रामप्यारे कुलस्ते को 28 हजार वोटों से हराया था। यानी अब माहौल बदलने लगा है।
गाडरवारा - उदयप्रताप सिंह
सीधी - रीति पाठक
सतना - गणेश सिंह
गणेश सिंह सतना से लगातार चार बार के सांसद हैं। इस बार उनको सतना सीट जिताने की जिम्मेदारी सौंपी है। यहां पर मौजूदा विधायक कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाह हैं। यहां जातिगत समीकरणों का जोर है। बीजेपी ने पूर्व विधायक शंकरलाल तिवारी को इस बार यहां से टिकट नहीं दिया, वे दो बार यहां से विधायक बन चुके हैं। इसका असर ब्राह्मण वोटों पर पड़ेगा। कुशवाह समाज यहां पर निर्णायक भूमिका में है। और गणेश सिंह जाति के इसी समीकरण में फंसे हैं।
दिमनी : नरेंद्र सिंह तोमर
- ठाकुर - 84 हजार
- ब्राह्मण - 20 हजार
- गुर्जर - 12 हजार
- एससी - 25 हजार
- लोधी समाज - 15 हजार
ये खबर भी पढ़िए..
महिला आरक्षण विधेयक अब बन गया कानून, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरी, सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी किया
नरसिंहपुर : प्रहलाद पटेल
- लोधी - 30 हजार
- ब्राह्मण - 25 हजार
- मुस्लिम - 15 हजार
- एससी - 15 हजार
- कुर्मी - 7 हजार
ये खबर भी पढ़िए..
मेनका गांधी के खिलाफ 100 करोड़ का मानहानि का दावा करेगा इस्कॉन कोलकाता, नोटिस भेजा
जबलपुर पश्चिमः राकेश सिंह
- ब्राह्मण - 60 से 70 हजार
- सिक्ख - 20 से 25 हजार
- कुशवाह - 10 से 15 हजार
- ठाकुर - 10 से 15 हजार
- एससी - 20 से 25 हजार
इंदौर एक : कैलाश विजयवर्गीय
- ब्राह्मण - 40 हजार
- व्यापारी - 30 से 35 हजार
- मुस्लिम - 10 से 15 हजार
निवास : फग्गन सिंह कुलस्ते
गौंड आदिवासी वोटर
यहां पर लड़ाई सीधे तौर पर जाति की नहीं है। फग्गन सिंह कुलस्ते गौंड आदिवासी समुदाय से आते हैं तो मौजूदा विधायक कांग्रेस के डॉ. अशोक मस्कोले हैं जिनकी जाति भी गौंड आदिवासी है। फग्गन सिंह लगातार यहां से सांसद रहे हैं और केंद्र में मंत्री भी, लेकिन यहां पर इस बार विश्वास और विकास का संकट है। पेशाब कांड और चप्पल कांड का आदिवासियों पर प्रभाव है। बड़ा आदिवासी चेहरा होने के कारण फग्गन के लिए ये प्रतिष्ठा की लड़ाई है और यही कारण है कि उनके लिए जीत राह आसान नजर नहीं आती। यह बात इसलिए मायने रखती है क्योंकि 2018 में कांग्रेस के मस्कोले ने फग्गन के भाई रामप्यारे कुलस्ते को 28 हजार वोटों से हराया था। यानी अब माहौल बदलने लगा है।
गाडरवारा - उदयप्रताप सिंह
- कौरव - 45 से 50 हजार
- ब्राह्मण - 30 से 35 हजार
- लोधी - 10 से 12 हजार
- राजपूत - 8 से 10 हजार
- एससी - 20 से 25 हजार
सीधी - रीति पाठक
- ब्राह्मण - 40 से 45 हजार
- क्षत्रिय - 40 से 45 हजार
- यादव और साहू - 30 हजार
- एससी - 20 से 25 हजार
- अन्य - 25 से 30 हजार
सतना - गणेश सिंह
गणेश सिंह सतना से लगातार चार बार के सांसद हैं। इस बार उनको सतना सीट जिताने की जिम्मेदारी सौंपी है। यहां पर मौजूदा विधायक कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाह हैं। यहां जातिगत समीकरणों का जोर है। बीजेपी ने पूर्व विधायक शंकरलाल तिवारी को इस बार यहां से टिकट नहीं दिया, वे दो बार यहां से विधायक बन चुके हैं। इसका असर ब्राह्मण वोटों पर पड़ेगा। कुशवाह समाज यहां पर निर्णायक भूमिका में है। और गणेश सिंह जाति के इसी समीकरण में फंसे हैं।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman