नेशनल रिसर्चर मीट में सीएम मोहन यादव बोले- हमारी पीएचडी हमें ही समझ नहीं आती

भोपाल में 'नेशनल रिसर्चर मीट' में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी पीएचडी का अनुभव साझा किया। उन्होंने शोध की चुनौतियों पर बात की। विशेष रूप से, राजनीति में शोध करने वाले राजनेताओं के संघर्षों को बताया।

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Sandeep Kumar
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News in short

  • भोपाल में 'नेशनल रिसर्चर मीट' में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हिस्सा लिया।
  • सीएम ने अपनी पीएचडी की कठिनाइयों और शोध पर विचार साझा किए।
  • राजनेताओं के लिए शोध में चुनौती का जिक्र किया, खासकर पीएचडी के दौरान।
  • मुख्यमंत्री ने पॉलिटिकल साइंस से अपनी पीएचडी यात्रा को साझा किया।
  • अंत में सीएम ने कार्यक्रम में सीनियर वक्ता होने का मजाकिया अंदाज में उल्लेख किया।

News in detail

राजधानी भोपाल में 'नेशनल रिसर्चर मीट' के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाग लिया। दत्तोपंत ठेंगडी शोध संस्थान की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने अपनी पीएचडी की डिग्री पर बात की। सीएम ने कहा कि शोध अब इतना कठिन हो गया है कि वह हम पर हावी हो गया है।

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राजनेता के लिए डबल आफत

मुख्यमंत्री ने अपनी शोध यात्रा का संघर्ष साझा किया। उन्होंने कहा, कई बार हमें खुद नहीं पता चलता कि पीएचडी का उद्देश्य क्या है। यह और कठिन हो जाता है जब कोई राजनेता पीएचडी करता है। समाज में यह धारणा है कि राजनेता नकल नहीं कर सकता। राजनेता के लिए यह डबल आफत' है।

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पॉलिटिकल साइंस से की पीएचडी

मुख्यमंत्री ने अपनी पीएचडी के विषय चयन पर हंसी मजाक किया। उन्होंने कहा कि राजनेता के लिए संकट होता है कि पीएचडी कर नहीं सकता। यह समस्या मेरे साथ भी थी। मैंने पॉलिटिकल साइंस से पीएचडी की। सबसे बड़ी चुनौती टॉपिक चयन की थी। मैंने कहा था कि मैंने कभी नकल नहीं की। फिर तीन दिन विचार के बाद भाजपा और उसकी सरकारों पर शोध किया। यह फायदा हुआ कि इसे कोई भी पूछेगा तो बता सकता था।

सीएम ने अपने विधानसभा क्षेत्र के एक मुस्लिम व्यक्ति का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उस व्यक्ति ने मुर्गियों के नीचे मोर के अंडे रखकर गांव में मोर पाल लिए। सीएम ने कहा, उस व्यक्ति को कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं था। लेकिन उसने जो किया, वह पीएचडी वाले से बेहतर था। हमारा शोध समाज आधारित होना चाहिए, क्योंकि भारतीय संस्कृति हमें यही सिखाती है।

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मुख्यमंत्री के नाते मुझे अंत में बुलाना दिलचस्प

कार्यक्रम में अंतिम वक्ता के रूप में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भाषण शुरू किया। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री के नाते मुझे अंत में बुलाना दिलचस्प है। इतने अच्छे वक्ताओं के बाद मुझे बुलाया गया। इसे त्रुटि माना जा सकता है, लेकिन शोध संस्थान में प्रयोग की छूट है। अंत में उन्होंने कहा, इस आयोजन में आपने सुयोग्य अतिथि बुलाए, अगली बार मेरा नंबर पहले रखें।

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