कॉलेजों में सुसाइड रोकने का नया फॉर्मूला: अब टीचर बनेंगे छात्रों के पहले काउंसलर

मध्य प्रदेश के कॉलेजों में सुसाइड रोकने के लिए सरकार ने नया प्लान बनाया है। अब टीचर्स ही छात्रों के पहले काउंसलर बनेंगे और मानसिक सेहत पर नजर रखेंगे।

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Ramanand Tiwari
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Now teachers will become the first counselor of students

Photograph: (the sootr)

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NEWS  IN SHORT

  • मध्यप्रदेश के कॉलेजों में शिक्षक अब छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर बनेंगे।
  • सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत सभी शैक्षणिक संस्थानों को पालन करना होगा।
  • कॉलेजों में हेल्पलाइन नंबर और मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
  • आत्महत्या या अप्राकृतिक मृत्यु की घटनाओं पर तुरंत पुलिस को सूचना देनी होगी।
  • हर कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य सेल बनेगा, और कोचिंग संस्थानों पर निगरानी होगी।

NEWS  IN DETAIL

BHOPAL. प्रदेश के कॉलेजों में छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों ने सिस्टम को झकझोर दिया है। हाल ही में भोपाल के आरजीपीवी में छात्रा की सुसाइड के बाद अब उच्च शिक्षा विभाग ने ठोस एक्शन प्लान तैयार किया है। इसके तहत अब कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि छात्रों के मेंटल हेल्थ काउंसलर की भूमिका भी निभाएंगे।

क्या है नया एक्शन प्लान?

उच्च शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की आत्महत्या रोकने और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए यह प्लान तैयार किया है। इसका मकसद है कि छात्रों में तनाव, अवसाद और मानसिक दबाव को समय रहते पहचाना जाए और मदद दी जाए।

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टीचर निभाएंगे दोहरी भूमिका

अब कॉलेज के शिक्षक पढ़ाई के साथ छात्रों के व्यवहार पर नजर रखेंगे। तनाव और मानसिक परेशानी के शुरुआती लक्षण पहचानेंगे। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग और मदद दिलाने में सहयोग करेंगे यानी टीचर अब छात्रों के लिए पहला सहारा बनेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्त पालन

अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने साफ कहा कि सभी शैक्षणिक संस्थानों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा। उन्होंने कहा कि: छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य केवल शिक्षा विभाग की नहीं बल्कि सभी संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है

हेल्पलाइन नंबर दिखाना होगा जरूरी

अब हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी परिसर में ये नंबर साफ-साफ दिखाने होंगे:टेली मानस हेल्पलाइन -14416,उमंग हेल्पलाइन -14425, आपातकालीन नंबर -112 ताकि जरूरत के वक्त छात्र तुरंत मदद ले सकें।

आत्महत्या या अप्राकृतिक मौत पर सख्त नियम

यदि किसी छात्र की आत्महत्या या अप्राकृतिक मृत्यु होती है तो कॉलेज को तुरंत पुलिस को सूचना देनी होगी। घटना कैंपस के अंदर हो या बाहर, सूचना देना अनिवार्य सालाना रिपोर्ट यूजीसी और नियामक संस्थाओं को भेजनी होगी

आवासीय संस्थानों में मेडिकल सुविधा जरूरी

अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि: हॉस्टल या आवासीय संस्थानों में 24 घंटे मेडिकल सुविधा हो या फिर एक किलोमीटर के दायरे में आपात चिकित्सा उपलब्ध हो

रिक्त पद, छात्रवृत्ति और रैगिंग पर भी फोकस

सरकार ने ये निर्देश भी दिए:

  • चार माह में खाली शिक्षण व गैर-शिक्षण पद भरे जाएं
  • आरक्षित वर्ग के पदों को प्राथमिकता मिले छात्रवृत्तियों का समय पर भुगतान हो
  • छात्रवृत्ति के कारण किसी छात्र को परीक्षा, हॉस्टल या डिग्री से वंचित न किया जाए
  • रैगिंग निरोधक व्यवस्था और शिकायत तंत्र को मजबूत किया जाए

हर संस्थान में बनेगा विशेष सेल

अब हर शैक्षणिक संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष सेल बनेगा। प्रोफेशनल काउंसलर की नियुक्ति होगी। छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम होंगे

कोचिंग संस्थानों पर भी नजर

सरकार ने साफ किया कि बिना पंजीयन कोई कोचिंग सेंटर नहीं चलेगा। हर जिले में जिला स्तरीय निगरानी समिति बनाई गई है

स्टेट टास्क फोर्स का गठन

नेशनल टास्क फोर्स की सिफारिशों के बाद मध्यप्रदेश में स्टेट टास्क फोर्स बनाई गई है।
अध्यक्ष: आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा,
सदस्य सचिव: डॉ. उषा के. नायर

यह टास्क फोर्स छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों पर सभी विभागों के साथ मिलकर काम करेगी।

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कॉलेजों में बढ़े सुसाइड मामलों के बाद नया एक्शन प्लान

  • टीचर बनेंगे छात्रों के पहले काउंसलर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन अनिवार्य
  • हेल्पलाइन नंबर परिसर में दिखाना जरूरी 
  • हर संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सेल और काउंसलर स्टेट टास्क फोर्स गठित

सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब छात्रों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके मन की सेहत भी उतनी ही अहम मानी जाएगी। सवाल बस इतना है-क्या यह प्लान जमीन पर उतनी ही गंभीरता से लागू हो पाएगा?

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