10 दिन में तय होगी कांग्रेस की जिला कार्यकारिणी, जंबो सूची पर ब्रेक; नए नियम से होगा पुनर्गठन

मध्यप्रदेश कांग्रेस में जिला कार्यकारिणी के पुनर्गठन को लेकर घमासान जारी है। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश के बाद 10 दिनों में सभी जिलाध्यक्ष अपनी संशोधित सूची प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में भेजेंगे।

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Ramanand Tiwari
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BHOPAL.मध्यप्रदेश कांग्रेस में जिला कार्यकारिणी को लेकर घमासान निर्णायक मोड़ पर है। प्रदेश नेतृत्व ने कहा है कि सभी जिलाध्यक्ष अपनी कार्यकारिणी की संशोधित सूची 10 दिनों में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय को सौंपेंगे। केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई।

कमलनाथ के गृह जिले छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में जंबो कार्यकारिणी नए सिरे से बनेगी। यदि पहले घोषित नामों में कटौती होती है, तो असंतोष हो सकता है। संगठन को संतुलित रखना प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व की बड़ी चुनौती होगी।

क्यों अटकी थी जिला कार्यकारिणी?

लंबे समय से जिला कार्यकारिणी गठन की प्रक्रिया विवादों में थी। जिलाध्यक्षों ने करीब तीन महीने की मशक्कत के बाद सूचियां तैयार कर पीसीसी को भेजी थीं। परीक्षण के बाद चार जिलों की घोषणा भी हो चुकी थी। जबकि बाकी जिलों की सूची 15 फरवरी तक जारी करने की तैयारी थी। इसी बीच केंद्रीय नेतृत्व का नया निर्देश आया और पूरी प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया। 

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एआईसीसी का नया फॉर्मूला

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने स्पष्ट नियम तय किए हैं। बड़े जिलों में अधिकतम 51 सदस्य होंगे, छोटे जिलों में 31 सदस्य होंगे। इससे अधिक नामों को अनुमति नहीं होगी। हर नाम की जवाबदेही और सक्रिय भूमिका जरूरी होगी। अब भीड़ वाली कार्यकारिणी की बजाय सीमित और सक्रिय टीम पर जोर रहेगा।

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छिंदवाड़ा बना उदाहरण

कमलनाथ के गृह जिले छिंदवाड़ा में घोषित कार्यकारिणी सबसे बड़ी रही। यहां 261 सदस्य थे। इसमें 73 महामंत्री, 68 सचिव, 62 आमंत्रित सदस्य और अन्य पदाधिकारी शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने ऐसे भारी-भरकम ढांचे को देखते हुए सख्त सीमा तय की है। मकसद संगठन को चुस्त-दुरुस्त और जवाबदेह बनाना है।

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नाम कटेंगे तो नाराजगी भी होगी?

नई सीमा लागू होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती नामों में कटौती होगी। जिन नेताओं के नाम पहले घोषित या प्रस्तावित सूची में थे, उन्हें हटाना नाराजगी का कारण बनेगा। खासकर उन जिलों में जहां आंतरिक खींचतान चल रही है। कांग्रेस नेतृत्व को यह संतुलन साधना होगा, ताकि संगठन मजबूत बने और असंतोष न फैले।

नई सूची मेरिट और सक्रियता के आधार पर बनेगी। क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरण का ध्यान रखा जाएगा। वरिष्ठ और युवा नेतृत्व में संतुलन होगा। अंतिम मुहर प्रदेश नेतृत्व की सिफारिश पर केंद्रीय नेतृत्व लगाएगा। संदेश साफ है कि अब संगठन विस्तार नहीं, प्रभावी संचालन पर ध्यान दिया जाएगा।

क्या यह बदलाव कांग्रेस के लिए पॉजिटिव टर्न साबित होगा?

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सीमित और सक्रिय कार्यकारिणी से जवाबदेही तय होगी। कम सदस्यों वाली टीम में हर पदाधिकारी की भूमिका स्पष्ट होगी। इससे जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि शुरुआती असंतोष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन यदि नेतृत्व संवाद और समन्वय से काम लेता है तो यह कदम संगठन के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। 

कांग्रेस के संगठन महामंत्री संजय काम्बले ने बताया कि 10 दिनों में सभी जिलाध्यक्ष संशोधित सूची भेजेंगे। बड़े जिलों में 51 और छोटे जिलों में 31 सदस्य होंगे। पहले घोषित जंबो सूचियां रद्द कर दी गईं। छिंदवाड़ा में 261 सदस्यीय कार्यकारिणी चर्चा में थी। केंद्रीय निर्देश के बाद प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई है। 25 फरवरी से पहले सभी जिलों की कार्यकारिणी का गठन हो जाएगा।

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10 दिन में तस्वीर साफ

बहुप्रतीक्षित जिला कार्यकारिणी गठन अब निर्णायक चरण में है। अगले 10 दिन कांग्रेस संगठन के लिए अहम साबित होंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि नामों की कटौती के बीच पार्टी नेतृत्व संगठन को एकजुट रखते हुए नई कार्यकारिणी को कैसे अंतिम रूप देता है। यदि यह पुनर्गठन संतुलित और रणनीतिक हुआ, तो कांग्रेस के लिए यह आंतरिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।

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