अफसर कर रहे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ षड्यंत्र!
Sourabh Bhatnagar | Feb 23, 2026, 14:25 IST
kailash vijayvargiya
क्या सूबे के सबसे कद्दावर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ कोई षड्यंत्र हो रहा है? क्या प्रदेश के अफसर किसी के इशारे पर विजयवर्गीय के खिलाफ काम कर रहे हैं? ये हम नहीं कह रहे, ऐसे आरोप खुद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लगाए हैं।
क्या है पूरा मामला
भागीरथपुरा कांड पर अफसरों ने करवा दी किरकिरी
विधानसभा में विजयवर्गीय ने भागीरथपुरा कांड पर नैतिक जिम्मेदारी भी ली और विस्तार से बताया कि यह किस तरह से सामूहिक चूक है। उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा में 20 लोगों की मौतें हुई हैं।
जयवर्धन ने लगा दिया झूठ बोलने का आरोप
जयवर्धन ने कहा कि, मेरे द्वारा पूछे गए प्रश्न क्रमांक 1625 में मंत्रीजी ने बताया है कि भागीरथपुरा में कुल 20 मौतें हुई हैं। लिखित उत्तर के पहले पेज पर 20 मौतों का उल्लेख है और इसी के परिशिष्ट में 32 मौतों की बात कही जा रही है।
जयवर्धन यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि कल 19 फरवरी को भी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को दिए गए उत्तर में 20 मौतों की बात की गई है।
मंत्री सदन में गलत जानकारी दे रहे हैं। सदन में इस बात पर चर्चा होना चाहिए कि सरकार सही आंकड़ा क्यों नहीं दे पा रही है? अब तक सिर्फ 20 पीड़ित परिजनों तक ही मुआवजा क्यों पहुंचा है?
और तोमर के कक्ष में बिफर गए कैलाश
बताया जा रहा है कि मंत्री इस कदर नाराज थे कि उन्होंने नगरीय प्रशासन विभाग के अफसरों पर उनके खिलाफ षड्यंत्र करने के आरोप लगा दिए। कहा कि, अफसर उनको घेरने की कोशिश कर रहे हैं। कैलाश विजयवर्गीय की नाराजगी देख तोमर ने नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे को बुलवा लिया। तोमर ने संजय दुबे से कहा कि- इतना संवेदनशील मामला है। आपकी ओर से मंत्रीजी को ये कैसा जवाब लिखा गया है? कुछ भी साफ नहीं है। इसी बीच कैलाश विजयवर्गीय भड़क गए। उन्होंने गुस्से में कहा कि जवाब किसने बनाया था, उसको सस्पेंड कीजिए। इस पर एसीएस संजय दुबे ने कहा कि जवाब तो मेरे साइन से ही आया है, इसलिए मुझे ही सस्पेंड कीजिए। इस पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि क्या आप पढ़ते नहीं हैं? आपके गलत जवाब के कारण विपक्ष मुझ पर हमलावर हुआ।
इसके अलावा 8 लोगों की मौत का कारण पानी नहीं, बल्कि दूसरी बीमारियां या दूसरे कारण थे, जबकि 4 मौतों का कारण दूषित पानी के साथ ही अन्य बीमारियां भी माना गया है। ये कारण पीएम रिपोर्ट में आए हैं।
… तो पर्ची क्यों नहीं भेजी?
काफी जवाब-तलब और बहस के बाद लुब्बे लुबाब यही निकला कि जवाब तो सही लिखा गया है, बस मंत्रीजी ने जल्दबाजी में उसे ठीक से पढ़ा नहीं और ना ही अफसरों ने उनको सही तरीके से ब्रीफ किया।
इससे मंत्री सदन में अकेले पड़ गए। विपक्ष के सवालों का सही जवाब नहीं दे पाए। शायद इसी वजह से मंत्री को लगा कि अफसर ही उनको जान-बूझकर विपक्ष के सामने उलझा रहे हैं। इसीलिए उन्होंने अपना गुस्सा विस अध्यक्ष के सामने उनके कमरे में निकाला।
मगर बड़ा सवाल ये भी है…
ऐसे में जब नगरीय प्रशासन विभाग के मंत्री जवाब दे रहे थे तो उनको पर्ची क्यों नहीं भिजवाई गई?
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