MP में साइबर धोखाधड़ी में ई-एफआईआर प्रक्रिया लागू, जानें नियम

एमपी में साइबर अपराध के मामलों में e-FIR पर साइन करना अब जरूरी होगा। 30 दिन के भीतर शिकायतकर्ता को थाने जाकर साइन करना होगा, नहीं तो FIR कैसिल हो जाएगी।

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Anjali Dwivedi
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News In Short

  • e-FIR पर साइन करने के लिए शिकायतकर्ता को संबंधित थाने जाना होगा।

  • 30 दिन में साइन न करने पर e-FIR अपने आप निरस्त हो जाएगी।

  • एक लाख रुपए या उससे अधिक के साइबर धोखाधड़ी मामलों में नई प्रक्रिया लागू होगी।

  • शिकायत दर्ज होने के बाद प्रारंभिक जांच जारी रखी जाएगी, लेकिन साइन के बिना भी सबूत एकत्रित होंगे।

  • पुलिस विभाग ने जिलों के पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिए हैं।

News In Detail

मध्य प्रदेश में सायबर अपराधों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसको देखते हुए राज्य सरकार ने e-FIR दर्ज करने की प्रक्रिया में कुछ अहम बदलाव किए हैं। अब e-FIR तो दर्ज होगी, लेकिन इस पर साइन के लिए शिकायतकर्ता को संबंधित थाने में जाना जरूरी होगा। 

यह बदलाव एक महीने के भीतर ई-एफआईआर पर हस्ताक्षर न करने वाले मामलों में लागू होगा। यदि शिकायतकर्ता थाने जाकर FIR आवेदन पर साइन नहीं करता है, तो e-FIR अपने आप निरस्त हो जाएगी।

ई-एफआईआर क्या है?

e-FIR (इलेक्ट्रॉनिक एफआईआर), प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) का एक डिजिटल रूप है। इससे नागरिक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। खासकर चोरी, गुम हुई चीजों या वाहन चोरी जैसे मामूली अपराधों के लिए, जिससे पुलिस सेवा अधिक सुलभ और तेज हो जाती है। हालांकि, दर्ज कराने के बाद 3 दिनों के अंदर पुलिस स्टेशन जाकर आवेदन हस्ताक्षर करना जरूरी होता है।

शिकायतकर्ता को थाने में जाना होगा जरूरी 

डीजीपी कैलाश मकवाना ने इस नए बदलाव के संबंध में सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और अन्य पुलिस इकाइयों को निर्देश दिए हैं। DGP ने इस निर्देश का पालन सख्ती से सुनिश्चित करने को कहा है। इससे पहले, दो लाख रुपए या उससे अधिक के साइबर धोखाधड़ी मामलों में ही राज्य साइबर पुलिस थाने में FIR दर्ज की जाती थी। वहीं, अब इस सीमा को हटा दिया गया है।

30 दिन में करना होगा हस्ताक्षर

नए नियम के तहत, यदि एक लाख रुपए या उससे अधिक के फाइनेंशियल साइबर धोखाधड़ी के मामले में E-FIR दर्ज होती है। तब संबंधित शिकायतकर्ता को तीन दिनों के भीतर थाने में आकर FIR पर हस्ताक्षर करना होगा। यदि वह 30 दिन के भीतर थाने नहीं पहुंचता है, तो यह e- fir स्वचालित रूप से कैंसिल कर दी जाएगी।

शुरुआती जांच के बाद ट्रांसफर होगी रिपोर्ट

इस प्रक्रिया में एक अहम बदलाव यह भी है कि, शिकायतकर्ता के साइन से पहले भी जांच प्रक्रिया जारी रहेगी। प्राथमिक परीक्षण के बाद संबंधित शिकायत को जिलों को ट्रांसफर किया जाएगा।

इसके बाद जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज करना, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड (SDR), और सीसीटीवी फुटेज जैसे जरूरी सबूत जुटाए जाएंगे। इन सभी कार्यों को शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर के बिना भी अंजाम दिया जा सकता है।

एक लाख रुपए से जुड़े मामलों में भी होगी e-FIR

पुलिस विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि एक लाख रुपए या उससे अधिक के साइबर फ्रॉड (Cyber ​​fraud) के मामलों में अब e-FIR के जरिए शिकायत दर्ज की जाएगी।

पहले यह व्यवस्था केवल दो लाख रुपए या उससे अधिक की धोखाधड़ी (डिजिटल फ्रॉड) के मामलों में लागू थी, लेकिन अब इसे कम कर दिया गया है। यह कदम साइबर अपराधों से निपटने के लिए और प्रभावी कदम माना जा रहा है।

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साइबर ठगी से बचने के टिप्स:

  • सावधान रहें: कभी भी अनजान कॉल या मैसेज का जवाब न दें।

  • लिंक पर क्लिक करने से पहले जांचें: किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचें।

  • ऑनलाइन टास्क से बचें: किसी भी अनजान व्यक्ति से ऑनलाइन टास्क करने के दौरान सतर्क रहें।

  • सुरक्षित वित्तीय लेन-देन करें: केवल ऑफिशियल और सेफ प्लेटफार्मों का इस्तेमाल करें।

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साइबर ठगी से बचने के उपाय:

  • अपने फोन और कंप्यूटर की सुरक्षा सेटिंग्स को मजबूत रखें।

  • किसी भी अनजान व्यक्ति से पैसे की मांग करने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।

  • जब भी संभव हो, अपने बैंक के लेन-देन पर नजर रखें।

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