मंडीदीप में हुए हादसे पर ओरिएंटल इश्योरेंस को देना होंगे 251 करोड़, जानिए दावत फूड्स को मिलने वाली इस रकम की पूरी कहानी

Chakresh | Jan 06, 2024, 24:00 IST
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मंडीदीप में हुए हादसे पर ओरिएंटल इश्योरेंस  को देना होंगे 251 करोड़, जानिए दावत फूड्स को मिलने वाली इस रकम की पूरी कहानी
मंडीदीप में हुए हादसे पर ओरिएंटल इश्योरेंस को देना होंगे 251 करोड़, जानिए दावत फूड्स को मिलने वाली इस रकम की पूरी कहानी

करीब 9 साल पुराने एक मामले में ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ( Oriental Insurance Company ) को क्लेम के रूप में 161 करोड़ 20 लाख 27 हजार 743 रुपए देने का आदेश दिया है।

BHOPAL की कमर्शियल कोर्ट ( commercial court ) ने करीब 9 साल पुराने एक मामले में ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ( Oriental Insurance Company ) को क्लेम के रूप में 161 करोड़ 20 लाख 27 हजार 743 रुपए देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही नुकसान के दिन से भुगतान की तारीख तक 6 फीसदी वार्षिक की दर से ब्याज करीब 90 करोड़ और देने का भी आदेश दिया है। इंश्योरेंस कंपनी को ये क्लेम मंडीदीप की दावत फूड लिमिटेड कंपनी ( Daawat Food Limited Company) को देना है। कमर्शियल कोर्ट का यह फैसला इसलिए भी महत्तवपूर्ण है, क्योंकि इस मामले में ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम देने से मना कर दिया था।

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क्या था मामला

जानकारी के अनुसार 7 जून 2014 को मंडीदीप स्थित दावत फूड लिमिटेड में भीषण आग लग गई थी। इस हादसे में कंपनी के गोदाम में रखा 44 हजार 975 मीट्रिक टन धान जलकर खाक हो गया था। इस पर कंपनी ने 189.72 करोड़ का इंश्योरेंस क्लेम किया। ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ( Oriental Insurance Company ) ने ये कहते हुए क्लेम नहीं दिया कि कंपनी के गोदाम में आग लगी नहीं, बल्कि लगाई गई थी। इस मामले में चली कानूनी लड़ाई में इंश्योरेंस कंपनी अपने दावे को साबित नहीं कर पाई। कारोबारी जगत में ये अब तक का सबसे बड़ा इंश्योरेंस क्लेम बताया जा रहा है।

सबसे बड़े इंश्योरेंस क्लेम की कहानी

दावत फूड लिमिटेड कंपनी ने अपनी फैक्ट्री और संपत्ति का 2010 में बीमा करवाया था। 18 जनवरी 2014 को यह इंश्योरेंस रिन्यू हुआ। इसमें संपत्ति का मूल्य 373 करोड़ 53 लाख 84 हजार 853 रुपए आंका गया। इस आधार पर बीमा कंपनी ने 30 लाख 82 हजार 681 रुपए का प्रीमियम तय किया। इंश्योरेंस एक साल यानि 17 जनवरी 2015 तक था।

7 जून 2014 का वो हादसा…

7 जून 2014 को दावत फूड्स लिमिटेड के मंडीदीप परिसर में रखे धान के भंडार में भीषण आग लग गई। इस आग को रोकने के लिए करीब 40 फायर ब्रिगेड गाड़ियां पहुंची थीं। फायर ब्रिगेड ने आग को फैलने से तो रोक लिया, मगर कंपनी के स्टोर में रखा करीब 44 हजार 975 मीट्रिक टन धान पूरी तरह बर्बाद हो गया। धान में लगी आग इतनी भीषण थी कि अगले एक हफ्ते तक आग धधकती रही। मंडीदीप की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक इस घटना पर पुलिस इस नतीजे पर पहुंची थी कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी। रायसेन के तत्कालीन कलेक्टर ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराई थी। इस जांच में भी शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगना बताया गया। विधानसभा में डॉ. गोविंद सिंह ने ध्यानाकर्षण के जरिए इस दुर्घटना पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में सरकार के मंत्री ने भी सारे सबूत रखते हुए इसे दुर्घटना बताया था।

कंपनी ने मुआवजा मांगा तो Oriental Insurance Company मुकर गई

हादसे के बाद Oriental Insurance Company ने नुकसान का आंकलन किया तो करीब 189.72 करोड़ का क्लेम ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को 30 जून को भेज दिया गया था। इसके बाद बीमा कंपनी ने कुछ महीनों की जांच पड़ताल के बाद इस दावे को ये कहते हुए खारिज कर दिया कि दावत फूड्स लिमिटेड ने अपने स्टोर में ये आग खुद लगाई है। यह बीमा शर्तों का उल्लंघन है इसलिए क्लेम नहीं दिया जा सकता। जब इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम देने से इनकार किया तब दावत फू़ड्स ने कोर्ट की शरण ली। दरअसल बीमा कंपनी की रिपोर्ट का कहना था कि दावत फूड्स लिमिटेड ने देनदारी के दबाव में आकर अपने भंडार में खुद आग लगवाई है। बीमा क्लेम की रकम से कंपनी किसानों की बकाया राशि का भुगतान करना चाहती है। इस मामले में शिकायत की जांच के लिए अधिकृत की गई जे बशीर एंड एसोसिएट्स ने लिखा था कि धान के भंडार में पेट्रोल- केरोसिन छिड़ककर आग लगाई गई थी। जे बशीर एंड एसोसिएट्स की रिपोर्ट के बाद ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने दावत फूड्स लिमिटेड को बीमा शर्तों का उल्लंघन करने का दोषी पाते हुए क्लेम का भुगतान करने से इनकार कर दिया था।

मगर, बीमा कंपनी का दावा हुआ खारिज

दावत फूड्स ने इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ रायसेन की जिला अदालत में परिवाद दायर किया। 2015 में वाणिज्यिक न्यायालय का गठन होने के बाद यह केस कमर्शियल कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया गया। कोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनी के वकील से कहा कि वह साबित करें कि आग लगी नहीं लगाई गई थी। कंपनी की तरफ से कोर्ट के सामने जो दलीलें पेश की गई वह सभी खारिज हो गईं।

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