दमोह कलेक्टर की जासूसी, फोन के जरिये गोपनीय बातें लीक करता था कर्मचारी; निलंबित
Pawan Modiya | May 08, 2026, 24:03 IST
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दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के दफ्तर में अनुपयोगी फोन के जरिए गोपनीय बातें स्टेनो कक्ष तक पहुंचाई जा रही थीं। मामले का खुलासा होते ही एक कर्मचारी को निलंबित और दो को मूल विभाग भेजा गया। दोनों संदिग्ध फोन सील कर दिए गए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- दमोह कलेक्टर के दफ्तर में गोपनीय बातें बाहर लीक हो रही थीं।
- एक पुराने अनुपयोगी फोन के जरिए बातें स्टेनो कक्ष तक पहुंचती थीं।
- आकस्मिक निरीक्षण की खबर लीक होने पर कलेक्टर को शक हुआ।
- जांच में कर्मचारी सचिन खरे को तत्काल निलंबित किया गया।
- दो अन्य कर्मचारियों को हटाकर मूल विभाग भेज दिया गया।
फोन कॉल ने खोल दिया राज
तभी कलेक्टर के पास एक फोन कॉल आया। उस कॉल में पूछा गया कि "सर, आप आज यहां आने वाले हैं।" बस यही एक वाक्य काफी था। कलेक्टर यादव को तुरंत समझ आ गया कि कुछ गड़बड़ है।
पुराना फोन बना जासूसी का हथियार
तीन कर्मचारियों पर गिरी गाज
कलेक्टर बोले, यह आपराधिक प्रवृत्ति है
सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा पर सवाल
यह खबर क्यों जरूरी है
3 जरूरी FAQ
दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के दफ्तर में एक अनुपयोगी फोन के जरिए गोपनीय बातें स्टेनो कक्ष तक पहुंचाई जा रही थीं। आकस्मिक निरीक्षण की गुप्त योजना लीक होने पर कलेक्टर को शक हुआ। जांच में सच सामने आया और तीन कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई।
इस मामले में किन कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई?
सहायक ग्रेड-3 सचिन खरे को तत्काल निलंबित किया गया। सहायक ग्रेड-3 अजय कुमार असाटी और भृत्य जयदेव अहिरवार को भारमुक्त कर सर्व शिक्षा केंद्र भेजा गया। दोनों संदिग्ध टेलीफोन सील कर दिए गए हैं और विस्तृत जांच जारी है।
सरकारी दफ्तरों में इस तरह की जासूसी रोकने के लिए क्या करना चाहिए?
कलेक्टर यादव ने खुद सुझाव दिया कि सभी अधिकारी अपने दफ्तर के टेलीफोन की जांच करें। विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकारी दफ्तरों में नियमित तकनीकी ऑडिट होनी चाहिए। अनुपयोगी उपकरणों को तत्काल हटाया या बंद किया जाना चाहिए। इससे सूचना लीक और जासूसी के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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