ईडी की बड़ी कार्रवाई: तीन सरकारी अफसरों की 24.14 करोड़ की संपत्ति अटैच
Sanjay Dhiman | Jul 06, 2026, 23:30 IST
Photograph: (the sootr)
ईडी भोपाल ने भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के तीन मामलों में तीन पूर्व अफसरों की 24.14 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की है। विशेष अदालतों में शिकायत दाखिल हो चुकी है।
ईडी भोपाल ने भ्रष्टाचार के तीन मामलों में बड़ी कार्रवाई की है। तीन पूर्व अफसरों की कुल 24.14 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की गई है। पहला मामला अलीराजपुर के पूर्व आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया से जुड़ा है। दूसरा मामला NTPC के पूर्व AGM राकेश कुमार उपाध्याय का है। तीसरा मामला नॉर्दर्न कोलफील्ड्स के पूर्व CMD भोला सिंह से जुड़ा है।
ईडी भोपाल ने भ्रष्टाचार के तीन बड़े मामलों में कार्रवाई की है। तीनों मामले अलग-अलग विभागों से जुड़े हैं। जांच में तीन पूर्व अफसरों की करोड़ों की संपत्ति सामने आई।
ईडी (ED) ने तीनों आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। कुल 24.14 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति, नकदी और जेवरात अटैच किए गए हैं। विशेष अदालतों में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई है।
पहला मामला अलीराजपुर के पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया से जुड़ा है। ईडी ने उनके खिलाफ 18.20 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। इंदौर की विशेष पीएमएलए (PMLA – Prevention of Money Laundering Act) अदालत में शिकायत दाखिल की गई। अदालत ने आरोपी को नोटिस भेज दिया है।
जांच लोकायुक्त इंदौर की एसपीई (SPE – Special Police Establishment) की एफआईआर (FIR) पर शुरू हुई थी। भदौरिया पर सेवा के दौरान आय से अधिक संपत्ति बनाने का आरोप है। उन्होंने कथित तौर पर अपराध का पैसा खुद और परिवार के नाम पर निवेश किया।
जांच में उनकी संपत्ति वैध आय से काफी ज्यादा पाई गई। कुल 18.20 करोड़ रुपए की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की गई। इसमें नकदी, सोना, चांदी और अचल संपत्ति शामिल है।
दूसरा मामला एनटीपीसी (NTPC – National Thermal Power Corporation) के पूर्व एजीएम (AGM) राकेश कुमार उपाध्याय का है। वे सिंगरौली स्थित एनटीपीसी विंध्यनगर में पदस्थ थे। ईडी ने उनकी 3.15 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की है।
यह कार्रवाई सीबीआई (CBI) की एफआईआर पर आधारित है। जांच 2007 से 2019 के बीच की आय से जुड़ी है। शुरुआत में आय से अधिक संपत्ति 1.39 करोड़ रुपए आंकी गई थी। बाद में सीबीआई की चार्जशीट में यह आंकड़ा बढ़कर 1.96 करोड़ हो गया।
ईडी को कई बैंक खातों में 40.37 लाख रुपए की नकद जमा मिली। पैसा बार-बार खातों में घुमाया गया ताकि उसे छिपाया जा सके। इस पैसे से करीब 1.88 करोड़ रुपए की एफडी (FD) बनाई गई।
वाराणसी के चितईपुर इलाके में एक मकान बनाने में भी यही पैसा लगाया गया। जांच में यह मकान करीब 1.26 करोड़ रुपए का पाया गया। दोनों संपत्तियां अब अटैच कर ली गई हैं।
तीसरा मामला नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड यानी एनसीएल (NCL – Northern Coalfields Limited) के पूर्व सीएमडी (CMD) भोला सिंह का है। ईडी ने जबलपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में उनके खिलाफ शिकायत दाखिल की। अदालत ने उन्हें भी नोटिस जारी किया है।
यह जांच सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच-टू, नई दिल्ली की एफआईआर पर शुरू हुई थी। जांच का दायरा जनवरी 2022 से जनवरी 2024 तक का है। इस दौरान भोला सिंह के पास नकदी, सोने के जेवर और तीसरे पक्ष से भेजा गया पैसा मिला।
जांच में सामने आया कि 50 लाख रुपए तीसरे पक्ष से लिए गए थे। इसी पैसे से रांची के सेल सिटी में एक फ्लैट खरीदा गया। कुल मिलाकर 2.79 करोड़ रुपए की संपत्ति अपराध से जुड़ी पाई गई।
ईडी ने बैंक लॉकर से मिले सोने के जेवर और रांची का फ्लैट अटैच कर लिया है।
तीनों मामलों में मिलाकर 24.14 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच हुई है। तीनों आरोपी अलग-अलग विभागों में बड़े पदों पर रहे हैं। तीनों मामलों की जांच अलग-अलग एजेंसियों की एफआईआर से शुरू हुई थी।
अब तीनों मामले विशेष अदालतों में पहुंच चुके हैं। आरोपियों को अदालत से नोटिस भी भेजे जा चुके हैं। आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि जब्त संपत्ति स्थायी रूप से जब्त होगी या नहीं।
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ईडी की बड़ी कार्रवाई
ईडी (ED) ने तीनों आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। कुल 24.14 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति, नकदी और जेवरात अटैच किए गए हैं। विशेष अदालतों में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई है।
केस एक: आबकारी अधिकारी
जांच लोकायुक्त इंदौर की एसपीई (SPE – Special Police Establishment) की एफआईआर (FIR) पर शुरू हुई थी। भदौरिया पर सेवा के दौरान आय से अधिक संपत्ति बनाने का आरोप है। उन्होंने कथित तौर पर अपराध का पैसा खुद और परिवार के नाम पर निवेश किया।
जांच में उनकी संपत्ति वैध आय से काफी ज्यादा पाई गई। कुल 18.20 करोड़ रुपए की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की गई। इसमें नकदी, सोना, चांदी और अचल संपत्ति शामिल है।
केस दो: NTPC के अफसर
यह कार्रवाई सीबीआई (CBI) की एफआईआर पर आधारित है। जांच 2007 से 2019 के बीच की आय से जुड़ी है। शुरुआत में आय से अधिक संपत्ति 1.39 करोड़ रुपए आंकी गई थी। बाद में सीबीआई की चार्जशीट में यह आंकड़ा बढ़कर 1.96 करोड़ हो गया।
ईडी को कई बैंक खातों में 40.37 लाख रुपए की नकद जमा मिली। पैसा बार-बार खातों में घुमाया गया ताकि उसे छिपाया जा सके। इस पैसे से करीब 1.88 करोड़ रुपए की एफडी (FD) बनाई गई।
वाराणसी के चितईपुर इलाके में एक मकान बनाने में भी यही पैसा लगाया गया। जांच में यह मकान करीब 1.26 करोड़ रुपए का पाया गया। दोनों संपत्तियां अब अटैच कर ली गई हैं।
केस तीन: NCL के पूर्व CMD
यह जांच सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच-टू, नई दिल्ली की एफआईआर पर शुरू हुई थी। जांच का दायरा जनवरी 2022 से जनवरी 2024 तक का है। इस दौरान भोला सिंह के पास नकदी, सोने के जेवर और तीसरे पक्ष से भेजा गया पैसा मिला।
जांच में सामने आया कि 50 लाख रुपए तीसरे पक्ष से लिए गए थे। इसी पैसे से रांची के सेल सिटी में एक फ्लैट खरीदा गया। कुल मिलाकर 2.79 करोड़ रुपए की संपत्ति अपराध से जुड़ी पाई गई।
ईडी ने बैंक लॉकर से मिले सोने के जेवर और रांची का फ्लैट अटैच कर लिया है।
कुल मिलाकर क्या हुआ
अब तीनों मामले विशेष अदालतों में पहुंच चुके हैं। आरोपियों को अदालत से नोटिस भी भेजे जा चुके हैं। आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि जब्त संपत्ति स्थायी रूप से जब्त होगी या नहीं।
यह खबरें भी पढ़ें...
500 करोड़ की नवअंश चिटफंड ठगी में ईडी की एंट्री, पीड़ितों को समन
111 करोड़ की सीवरेज योजना फेल, हाईकोर्ट सख्त; पूर्व ईडी को बनाया पक्षकार
ईडी इंदौर ने नवभारत गृह सोसाइटी के 4.64 करोड़ घोटाले में किया केस
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