ED रेड में चौकसे ग्रुप से 3.97 करोड़ कैश और 3.45 करोड़ के सोने के गहने मिले

Pawan Modiya | Jun 25, 2026, 19:10 IST
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ईडी का छापा
ईडी का छापा

ED ने भोपाल में चौकसे ग्रुप से जुड़े 12 ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में 3.97 करोड़ नकद और 3.45 करोड़ के सोने के आभूषण जब्त हुए। अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत भी मिले। मामला आस्था फाउंडेशन में फीस और स्कॉलरशिप के पैसे की हेराफेरी से जुड़ा है।

    समझें क्या है पूरा मामला

    • ED (Enforcement Directorate) ने भोपाल में चौकसे ग्रुप पर बड़ी कार्रवाई की है।
    • 12 ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसमें एक बैंक लॉकर भी शामिल था।
    • इस दौरान 3.97 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए हैं।
    • 3.45 करोड़ रुपए के सोने के आभूषण भी जब्त किए गए हैं।
    • मामला आस्था फाउंडेशन में फीस और स्कॉलरशिप के पैसे की हेराफेरी से जुड़ा है।

    ED की टीम ने की बड़ी छापेमारी

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ED की जोनल इकाई ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ED की ओर से बताया गया कि यह कार्रवाई PMLA (Prevention of Money Laundering Act) की धारा 17 के तहत की गई। टीम ने चौकसे ग्रुप और उससे जुड़े संस्थानों के 12 परिसरों पर तलाशी ली। यह छापेमारी 23 जून 2026 को की गई थी। तलाशी में शामिल जगहों में आवासीय परिसर, ऑफिस, शैक्षणिक संस्थान, ट्रस्ट और कारोबारी प्रतिष्ठान शामिल थे। इनमें एक बैंक लॉकर भी शामिल था, जिसे भी खोलकर जांचा गया।

    करोड़ों का कैश और सोना मिला

    इस छापेमारी में ED को बड़ी मात्रा में संपत्ति मिली है। टीम ने विभिन्न परिसरों से लगभग 3.97 करोड़ रुपए नकद बरामद किए। इसके साथ ही 3.45 करोड़ रुपए मूल्य के सोने के आभूषण भी जब्त किए गए। इतनी बड़ी रकम और सोना एक साथ मिलने से मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। ED की टीम अब इन सभी संपत्तियों के स्रोत की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि यह पैसा कहां से आया और किस तरह इस्तेमाल किया गया।

    ईडी की प्रेस विज्ञप्ति
    ईडी की प्रेस विज्ञप्ति


    फीस घोटाले से जुड़ा है मामला

    यह पूरा मामला श्री आस्था फाउंडेशन फॉर एजुकेशन सोसायटी से जुड़ा है। यह संस्था शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में कई संस्थानों का संचालन करती है। ED ने अपनी जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) भोपाल की एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इस एफआईआर में जयनारायण चौकसे और अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और फंड डायवर्जन किया गया। जांच में पता चला कि इस सोसायटी पर चौकसे परिवार और उनके सहयोगियों का नियंत्रण था।

    छात्रों के पैसे के दुरुपयोग का आरोप

    ED की जांच में एक चिंताजनक पहलू सामने आया है। एजेंसी का आरोप है कि छात्रों से ली गई फीस का गलत इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा छात्रवृत्ति के तौर पर मिले अनुदान को भी डायवर्ट किया गया। बैंक से लिए गए लोन की राशि भी इसी तरह दूसरी जगह भेजी गई। यह सारा पैसा कथित तौर पर अलग अलग ट्रस्टों और कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। यह आरोप बेहद गंभीर है क्योंकि इसमें सीधे छात्रों के हित प्रभावित होने की बात है।

    दस्तावेज और डिजिटल सबूत भी मिले

    छापेमारी के दौरान ED को कई महत्वपूर्ण सबूत भी मिले हैं। टीम ने जरूरी दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण अपने कब्जे में लिए। इसके अलावा ERP और टैली डेटा भी बरामद किया गया है। ये डेटा वित्तीय लेनदेन को समझने में मदद कर सकते हैं। साथ ही अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी अलग से बरामद किए गए हैं। ED ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में साफ किया है कि इन सभी सबूतों की गहराई से जांच की जा रही है।

    आगे की जांच पर टिकी हैं निगाहें

    ED ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि पैसों का असली इस्तेमाल कहां हुआ। यह भी देखा जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन कौन लोग शामिल हैं। मामला बड़ा होने की वजह से जांच में अभी समय लग सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

    शिक्षा क्षेत्र की साख पर सवाल

    इस तरह के मामले शिक्षा क्षेत्र की साख पर भी असर डालते हैं। जब किसी शिक्षण संस्था पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं, तो छात्रों और परिवारों का भरोसा कमजोर होता है। यह मामला दिखाता है कि बड़े शिक्षण समूहों में भी पैसों की गड़बड़ी हो सकती है। इसीलिए जांच एजेंसियों की भूमिका इस तरह के मामलों में बहुत अहम हो जाती है। प्रशासन और जनता दोनों की निगाहें अब इस जांच के नतीजों पर टिकी हैं।

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