नगर निगम के 150 करोड़ घोटाले में ED कर रही आरोपियों की संपत्ति अटैच
Sanjay Gupta | Jan 07, 2025, 12:59 IST
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'द सूत्र' को मिली जानकारी के अनुसार इस घोटाले के आरोपियों की 40 से ज्य़ादा प्रॉपर्टी की लिस्ट ईडी ने जांच के बाद बना ली है और इसके अटैचमेंट की प्रोसेस शुरू कर दी है।
नगर निगम के 150 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में एक बार फिर ED (प्रवर्तन निदेशालय) एक्शन मोड़ में आने वाली है। ईडी ने इस मामले में 7 अगस्त 2024 में आरोपियों के एक दर्जन से ज्यादा ठिकानों पर छापे मारकर पहले ही 1.25 करोड़ रुपए की नकदी, 20.8 करोड़ की चल संपत्तियों और निवेश को अटैच किया था। इसके बाद अब ईडी ने अचल संपत्तियों की जानकारी निकाली है और अब इनके अटैचमेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी औपचारिक सूचना किसी भी दिन जारी हो सकती है।
सूत्र को मिली जानकारी के अनुसार इस घोटाले के आरोपियों की 40 से ज्यादा प्रॉपर्टी की लिस्ट ईडी ने जांच के बाद बना ली है और इसके अटैचमेंट की प्रोसेस शुरू कर दी है। इसकी कीमत भी 50 करोड़ रुपए से ज्यादा की बताई जा रही है। इसमें मूल रूप से फ्लैट और मकान हैं। कुछ लोगों के पास खेती की जमीन भी है, इसे भी अटैच किया जाएगा।
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घोटाले के मुख्य आरोपी नगर निगम के इंजीनियर अभय सिंह राठौर निशाने पर है। उसके खुद के नाम की संपत्ति के साथ ही बहन मीरा राठौर, पिता प्रकाश सिंह राठौर और मां सरला के नाम की प्रापर्टी अटैच की जाएगी। वहीं मोहम्मद एहतेश्याम खान उर्फ काकू, मोहम्मद असलम खान, रहेल खान व बिल्किस खान की भी संपत्तियां हैं। साथ ही राहुल बढेरा, रेणु बढेरा, मोहम्मद जाकिर, मोहम्मद साजिद, मीरा शर्मा, राजेंद्र शर्मा, किरन सिरोजिया, राजकुमार साल्वी, शीला बढेरा की भी प्रॉपर्टी अटैच की जाएगी।
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ईडी ने नगर निगम घोटाले में मारे गए छाप के बाद औपचारिक तौर पर बताया था कि इंदौर सब रीजनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) 2002 के तहत निगम के फर्जी बिल घोटाले में 5 और 6 अगस्त को इंदौर में 20 ठिकानों पर छापे मारकर तलाशी अभियान चलाया था। तलाशी अभियान के दौरान, विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, 1.25 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी जब्त की गई और बैंक खाते, सावधि जमा और म्यूचुअल फंड और इक्विटी के रूप में कुल 20.8 करोड़ रुपए के निवेश को फ्रीज कर दिया गया। आगे की जांच जारी है।
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ईडी ने बताया कि आईएमसी फर्जी बिल घोटाले के संबंध में आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत मध्य प्रदेश पुलिस, इंदौर द्वारा दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। ईडी की जांच से पता चला कि आईएमसी अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके विभिन्न ठेकेदारों ने आपराधिक साजिश रची और ड्रेनेज के निर्माण कार्य के फर्जी बिल पेश करके क्राइम किया और इससे कमाई की। जिस काम के लिए फर्जी बिल बनाए गए थे, उसका भुगतान करने से पहले न तो जमीन पर काम किया गया था और न ही आईएमसी के लेखा और लेखा परीक्षा विभाग द्वारा उसका सत्यापन किया गया था। विभिन्न निजी ठेकेदारों द्वारा आईएमसी के समक्ष फर्जी बिल प्रस्तुत करके बनाए गए पीओसी को उनके और विभिन्न आईएमसी अधिकारियों के बीच लूटा गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने घोटाले के मास्टर माइंड अभय राठौर, नगर निगम के अकाउंटेंट अनिल गर्ग के ठिकानों सहित 20 स्थानों पर छापे मारे थे। इसमें मुख्य मास्टमाइंड माने जाने वाले गिरफ्तार इंजीनियर अभय राठौर के साथ ही ज्वाइंट डायरेक्टर ऑडिटर अनिल गर्ग सहित सभी आरोपी ठेकेदार व निगम के आरोपी अधिकारी शामिल थे। निगम के फर्जी बिल घोटाले में पुलिस ने करीब 20 आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग के दर्ज किए थे। यह सभी ईडी के केस में भी आरोपी बने हैं। इनमें ठेकेदारों के अलावा, निगम अधिकारी, कर्मचारी आदि शामिल हैं। ईडी द्वारा रेणु वडेरा निवासी 6 आशीष नगर, मोहम्मद जाकिर निवासी 147 मदीना नगर, राहुल वडेरा निवासी 2 आशीष नगर, राजकुमार पिता पन्नालाल साल्वी निवासी 78 अम्बिकापुरी हरीश श्रीवास्तव निवासी 55 सुखदेवनगर, प्रो. एहतेशाम पिता बिलकीस खान निवासी 128 माणिक बाग, जाहिद खान निवासी 101 सकीना अपार्टमेंट अशोाका कॉलोनी, मोहम्मद साजिद निवासी मदीना नगर, मोहम्मद सिध्दिकी निवासी मदीना नगर), उदयसिंह पिता रामनरेश सिंह भदौरिया निवासी 31-सी सुखलिया, मुरलीधर पिता चंद्रशेखर निवासी 697 शिव सिटी राऊ, मौसम व्यास के ठिकानों पर भी जांच की गई।
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अभी तक इस मामले में पुलिस ने करीब 7 एफआईआर दर्ज की है। जिसमें आरोपियों पर आईपीसी धारा 420, 467, 468, 471, 474, 120बी और 34 की धाराएं लगी हैं। इसमें नगर निगम इंजीनियर अभय राठौर के साथ ही निगम के उदय भदौरिया, चेतन भदौरिया, मुरलीधर, राजकुमार साल्वी, संयुक्त संचालक अनिल कुमार गर्ग, डिप्टी डायरेक्टर समर सिंह, असिस्टेंट ऑडिटर रामेश्वर परमार को आरोपी बनाया गया है। यह सभी गिरफ्तार हो चुके हैं और इसमें से मुरलीधर की जमानत हाईकोर्ट से हो चुकी है।
वहीं ठेकेदारों में मोहम्दद सिद्दकी, मोहम्मद जाकिर, मोहम्मद साजिद, रेणु वढेरा, राहुल वढेरा, जाकिर, एहतेमाश उर्फ काकू, बिकलिस खान, जाहिद खान, राजेंद्र शर्मा , मौसम व्यास इन सभी पर भी पुलिस ने केस दर्ज किया है।
आरोपियों की 40 से ज्यादा प्रॉपर्टी होगी अटैच
इंदौर नगर निगम फर्जी बिल घोटाला कर कमाए काली कमाई से 1.18 करोड़ जमा करने की शर्त पर काकू ले आया जमानत, उसके कर्मचारी जेल में ही
इन आरोपियों की प्रॉपर्टी होगी अटैच
ED ने छापे में यह पाया था
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ईडी ने नगर निगम घोटाले में मारे गए छाप के बाद औपचारिक तौर पर बताया था कि इंदौर सब रीजनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) 2002 के तहत निगम के फर्जी बिल घोटाले में 5 और 6 अगस्त को इंदौर में 20 ठिकानों पर छापे मारकर तलाशी अभियान चलाया था। तलाशी अभियान के दौरान, विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, 1.25 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी जब्त की गई और बैंक खाते, सावधि जमा और म्यूचुअल फंड और इक्विटी के रूप में कुल 20.8 करोड़ रुपए के निवेश को फ्रीज कर दिया गया। आगे की जांच जारी है।
इंदौर नगर निगम में नहीं थम रहे घोटाले- मेजरमेंट बुक में फर्जी काम दिखा 52 लाख लिए, झोनल अधिकारी सस्पेंड
पुलिस एफआईआर के आधार पर किया है केस दर्ज
इन जगहों पर मारे गए थे छापे
नगर निगम का 150 करोड़ का घोटाला दबाया, सालभर पहले ही GST जांच में आया
नगर निगम के यह अधिकारी उलझे
दर्जनभर ठेकेदार भी आए उलझन में
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