इंदौर EOW का बड़ा एक्शन: फर्जीवाड़ा कर कॉलोनी काटने वालों पर FIR दर्ज

इंदौर EOW ने दृष्टि देवकॉन प्रा.लि. के डायरेक्टर और अन्य पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया। आरोप है कि गलत जानकारी देकर कॉलोनी का ले-आउट पास कराया गया था।

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Sanjay Dhiman
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Big action of Indore EOW, FIR registered against those who cut the colony by fraudulent means

Photograph: (the sootr)

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NEWS IN SHORT

  • इंदौर EOW ने गगरी राज कॉलोनी धोखाधड़ी मामले में FIR दर्ज की।
  • आरोपियों ने गलत जानकारी देकर अवैध ले-आउट स्वीकृति प्राप्त की।
  • मार्ग चौड़ाई के बारे में भ्रामक जानकारी दी गई, जो वास्तविकता से भिन्न थी।
  • जांच में आरोपियों ने अवैध लाभ प्राप्त करने के लिए गलत दस्तावेज प्रस्तुत किए।
  • धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

NEWS IN DETAIL

INDORE. इंदौर के प्रॉपर्टी बाजार में एक बड़ा खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने एक बड़े भूमाफिया नेटवर्क पर शिकंजा कसा है। यह मामला ग्राम पिपल्या लोहार और खडराखेड़ा की 'गिरिराज कॉलोनी' से जुड़ा हुआ है। यहां के डायरेक्टरों ने सरकारी विभागों को धोखे में रखकर फर्जी ले-आउट पास कराया। अब पुलिस ने इन सभी जालसाजों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। 

धोखेबाजी का खेल: कागजों पर सड़क

इस पूरे घोटाले की शुरुआत मेसर्स सुन्दरम रियल इन्फ्रा प्रा.लि. की शिकायत से हुई। डायरेक्टर पवन नारंग ने बताया कि दृष्टि देवकॉन ने नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं। इन्होंने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) विभाग को पूरी तरह गुमराह किया। कागजों में कॉलोनी का रास्ता 9 मीटर यानी करीब 30 फीट चौड़ा दिखाया गया, लेकिन जब जांच टीम मौके पर पहुंची, तो सच्चाई कुछ और ही निकली। असल में वहां मात्र 8 से 10 फीट का एक संकरा सा मार्ग था। 

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किन लोगों पर गिरी गाज?

EOW ने इस मामले में कुल पांच मुख्य लोगों को नामजद किया है- 

  • शैलेश माहेश्वरी: डायरेक्टर, दृष्टि देवकॉन प्रा.लि. 
  • विनोद माहेश्वरी: पिता रामस्वरूप माहेश्वरी। 
  • कुवंर सिंह: पिता अमर सिंह। 
  • राजू पंवार: पिता श्री अमर सिंह पंवार। 
  • माया राजपूत: पति सालगराम राजपूत। 

ये सभी आरोपी नवलखा बस स्टैंड के पास पुखराज कॉर्पोरेट से काम कर रहे थे। 

जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

जब EOW और T&CP के संयुक्त संचालक ने स्थल निरीक्षण किया, तो सब हैरान रह गए। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि मौके पर पहुंच मार्ग है ही नहीं। आरोपियों ने सोची-समझी साजिश के तहत सरकारी अफसरों से सांठ-गांठ की। उन्होंने गलत नक्शा पेश कर आवासीय प्लॉट काटने की मंजूरी हासिल कर ली। इस फर्जीवाड़े से प्लॉट खरीदने वाले मासूम लोग अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। 

कानूनी कार्रवाई और धाराओं का जाल

पुलिस ने प्राथमिक जांच में पाया कि यह केवल एक गलती नहीं थी। यह अवैध लाभ कमाने की नीयत से किया गया एक आर्थिक अपराध है। इसीलिए आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड विधान की कड़ी धाराएं लगाई गई हैं: 

धारा 420: धोखाधड़ी और बेईमानी के लिए। 

धारा 120-बी: आपराधिक षड्यंत्र रचने के जुर्म में। 

अब विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि किन अधिकारियों ने आंखें मूंद ली थीं।  

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जनता के लिए चेतावनी: प्लॉट लेने से पहले क्या करें?

इस घटना ने इंदौर के रियल एस्टेट में हड़कंप मचा दिया है। अगर आप भी इंदौर में प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, तो केवल कागजों पर भरोसा न करें। रेरा (RERA) की वेबसाइट पर जाकर प्रोजेक्ट का अप्रूवल जरूर चेक करें। साथ ही, मौके पर जाकर रास्ते और सुविधाओं की खुद पुष्टि करें।

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