फर्जी आईएएस मंत्रालय में घुसा : डिप्टी सेक्रेटरी कटेसरिया की सजगता से पकड़ा गया

Ramanand Tiwari | Feb 13, 2026, 17:44 IST
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Fake IAS entered the ministry Question on security of Ballabh Bhawan
Photograph: (the sootr)

भोपाल के वल्लभ भवन में एक फर्जी IAS अधिकारी के घुसने से हड़कंप मच गया। इससे सुरक्षा व्यवस्था और पास बनाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

NEWS IN SHORT

  • युवक का नाम: योगेंद्र सिंह चौहान
  • दावा: 2019 बैच का आईएएस अधिकारी
  • मूल निवास: उत्तर प्रदेश
  • कथित पदस्थापना: इंदौर
  • उद्देश्य: ट्रांसफर के सिलसिले में जीएडी पहुंचना

NEWS IN DETAIL

BHOPAL। राजधानी भोपाल के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले मंत्रालय वल्लभ भवन में एक फर्जी आईएएस अधिकारी के पहुंचने से हड़कंप मच गया। खुद को 2019 बैच का आईएएस बताने वाला युवक सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) तक पहुंच गया और डिप्टी सेक्रेटरी अजय कटेसरिया से मुलाकात भी कर ली।

डिप्टी सेक्रेटरी कटेसरिया को जब शक हुआ तो उन्होंने उससे पूछताछ की और तथाकथित आईएएस योगेंद्र सिंह चौहान के फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए वल्लभ भवन की सिक्योरिटी को सौंप दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि उसे मंत्रालय का प्रवेश पास भी आसानी से बनाकर दे दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने मंत्रालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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ऐसे पहुंचा मंत्रालय के भीतर

योगेंद्र सिंह चौहान खुद को आईएएस बताते हुए वल्लभ भवन पहुंचा। उसने कहा कि उसे ट्रांसफर संबंधी कार्य के लिए सामान्य प्रशासन विभाग में आना है।

सबसे हैरानी की बात यह रही कि मंत्रालय के पास सेक्शन में उसका प्रवेश कार्ड कंप्यूटर से बन गया। पास पर साफ लिखा था कि उसे जीएडी में अजय कटेसरिया (डिप्टी सेक्रेटरी) से मिलना है। यानी बिना ठोस सत्यापन के उसे मंत्रालय परिसर में एंट्री दे दी गई।

तीन घंटे इंतजार, फिर पहुंचा तीसरी मंजिल

चौहान ने बताया कि उसे करीब तीन घंटे इंतजार करना पड़ा। इसके बाद वह मंत्रालय की तीसरी मंजिल पर जीएडी कार्यालय तक पहुंच गया। उसने दावा किया कि वह पहले भी यूपीएससी की परीक्षा दो बार क्लियर कर चुका है। साथ ही कहा कि उसका सर्विस आईडी नंबर भी है। हालांकि, जब उससे नंबर पूछा गया तो वह स्पष्ट जवाब नहीं दे सका।

फर्जी IAS को किया सुरक्षा अधिकारियों के हवाले

सामान्य प्रशासन विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी अजय कटसेरिया ने जब तथाकथित आईएएस योगेंद्र चौहान से उसका बैच नंबर पूछा और उसे आने का पर्पस पूछा तो उसने बताया कि मैं ट्रांसफर के लिए आया हूं, बस यहीं से उन्हें शक हो गया। उन्होंने सिक्योरिटी ऑफिसर के यहां से स्टाफ को बुलाकर उसके हवाले कर दिया।

पड़ताल करने के दौरान 2019 बैच की यूपीएससी सूची दिखाई गई, लेकिन उसमें उसका नाम नहीं था। इस पर उसने कहा कि वह "होम कैडर" की सूची है, आयोग की दूसरी सूची निकालो। यहीं से मामला संदिग्ध हो गया और उसे रोक लिया गया।

तथाकथित आईएएस ने डिप्टी सेक्रेटरी अजय कटेसरिया से कहा कि मेरी पोस्टिंग इंदौर में है। मुझे लगा जीएडी, मुझे भूल गई है, इसलिए यहां आपके पास आया हूं जानकारों की मानें तो उसके पास यदि फर्जी आईडी अथवा अन्य चीज नहीं मिलती है तो कोई बड़ा अपराध भी दर्ज नहीं होगा।

मंत्रालय की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं-

  • क्या मंत्रालय में प्रवेश से पहले सख्त वेरिफिकेशन नहीं होता?
  • बिना आधार या सर्विस आईडी मिलान के पास कैसे बन गया?
  • पास बनाने वाले कर्मचारियों ने पहचान क्यों नहीं जांची?
  • क्या संवेदनशील विभागों तक पहुंचना इतना आसान है?
  • राज्य के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले प्रशासनिक केंद्र में इस तरह की चूक चिंता का विषय है।

पहले भी पकड़े जा चुके हैं फर्जी अफसर

देश के कई राज्यों में पहले भी फर्जी आईएएस और आईपीएस पकड़े जा चुके हैं। कुछ मामलों में आरोपियों ने खुद को जिला कलेक्टर बताकर सरकारी बैठकों में हिस्सा लिया। कहीं फर्जी अफसर बनकर निरीक्षण किए गए, तो कहीं ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर ठगी की गई। ऐसे मामलों में आमतौर पर सुरक्षा जांच या दस्तावेज मिलान में गड़बड़ी सामने आती है।

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अब क्या होगी कार्रवाई?

फिलहाल योगेंद्र सिंह चौहान से सुरक्षा कार्यालय में पूछताछ की जा रही है। मंत्रालय स्तर पर उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की तैयारी है। संभावना है कि पुलिस में मामला दर्ज कर आगे की जांच कराई जाए। फर्जी आईएएस का मंत्रालय तक पहुंच जाना सिर्फ एक व्यक्ति की हरकत नहीं, बल्कि सुरक्षा तंत्र की बड़ी चूक है।

अब देखना होगा कि इस घटना के बाद मंत्रालय की एंट्री प्रक्रिया और पहचान सत्यापन व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं। क्योंकि सवाल सिर्फ एक फर्जी अफसर का नहीं, बल्कि शासन की सुरक्षा और विश्वसनीयता का है।



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