R&D के काम पर कैंपा का कब्जा, वन विभाग की दो इकाइयों में बढ़ी तकरार

Sanjay Sharma | Apr 16, 2026, 24:05 IST
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forest department
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भोपाल में वन विभाग का विवाद बढ़ा हुआ है। कैंपा प्रमुख ने आरएंडडी का काम किया। आदेश पर प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप लगे है। अधिकारियों में असमंजस बना हुआ है।

News in Short

  • भोपाल में वन विभाग के आदेश पर विवाद, कैम्पा ने अनुसंधान शाखा का काम किया।
  • इस आदेश से विभाग के प्रोटोकॉल पर सवाल उठने लगे हैं।
  • मैदानी वनकर्मियों में असमंजस, कई क्षेत्रों में काम शुरू नहीं हो सका।
  • वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने जांच की तैयारी की है।
  • आदेश में बदलाव से अफसरों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जांच के बाद कार्रवाई तय होगी।

News in Detail

भोपाल में वन विभाग का एक आदेश चर्चा में है। यह आदेश कैंपा प्रमुख मनोज अग्रवाल ने जारी किया। जो काम वन विभाग की अनुसंधान शाखा (आरएंडडी) का था उसे कैम्पा ने कर दिया है। यह सब एक आदेश की गफलत के कारण हुआ। अब इस आदेश के लिए जारी चिट्ठी ने दोनों इकाइयों में मतभेद उजागर कर दिया है।

वन विभाग के काम बंटे

वन विभाग के काम अलग-अलग कार्यों में बंटे हुए हैं। अधिकार क्षेत्र के कामों की निगरानी के लिए अधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंप गई है। इसके बावजूद एक पत्र इन दोनों इकाइयों के बीच असमंजस भरे आदेश को लेकर चर्चा में है। इस पत्र की वजह से विभाग के प्रोटोकॉल पर भी सवाल उठ रहे हैं। कैम्पा इकाई को प्लांटेशन के लिए आवश्यक राशि ही उपलब्ध करानी होती है, वहीं मॉनिटरिंग दूसरी इकाई के हाथ में है। लेकिन इस बार एक आदेश के चलते कैंपा ने आरएंडडी यानी अनुसंधान शाखा के हिस्से का काम भी कर डाला है।

क्या बोले जिम्मेदार ?

वहीं इस मामले वन बल प्रमुख शुभ रंजन सेन ने कहा है कि तालाब के गहरीकरण से निकलने वाली मिट्टी के उपयोग संबंध बात तो ठीक है। लेकिन जिस तरह सीधे तौर पर सीएफ- डीएफओ को पत्र लिखने का मामला है वह जांच का विषय है। इसकी जांच कराई जा रही है। जांच के बाद तय करेंगे क्या कार्रवाई की जानी है।

आदेश से बदली इकाइयों की भूमिका

पूर्व वन बल प्रमुख द्वारा तय जिम्मेदारियों के साथ ही शाखों की भूमिका भी अब बदलती नजर आ रही है। हाल ही में जारी पत्र में वनकर्मियों को प्लांटेशन के लिए तालाब की खुदाई से निकली मिट्टी के उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। कहा गया है कि ऐसा करने से जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे प्लांटेशन की लागत में कटौती के भी तर्क दिए गए हैं।

मैदानी वननकर्मियों में भ्रम

इकाइयों के कार्य विभाजन में नए आदेश से हुए बदलाव ने मैदानी अमले को असमंजस में डाल दिया है। मार्च- अप्रैल माह में कैम्पा के तहत होने वाले प्लांटेशन के काम कई क्षेत्रों में शुरू भी नहीं हो पाए हैं। वनकर्मी आदेशों के स्पष्ट न होने से भी काम को आगे बढ़ाने से कतरा रहे हैं।

वन बल प्रमुख ने की जांच की तैयारी

कैंपा प्रमुख मनोज अग्रवाल के पत्र में जो निर्देश दिए गए हैं, वे आरएंडडी शाखा द्वारा दिए जाने थे। कार्य विभाजन में मतभेद को लेकर पूर्व वन बल प्रमुख बीएस अंबाडे ने स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसी पत्र में सामाजिक वानिकी का जिक्र तालाबों की खुदाई से निकली मिट्टी उपलब्ध कराने के संबंध में है। इसको लेकर वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने जांच की तैयारी कर ली है।

अफसरों में असमंजस

मैदानी अफसरों में भ्रम की स्थिति बनी है। कई अधिकारी आदेश को लेकर स्पष्ट नहीं हैं। इस वजह से अब तक प्रदेश में कैम्पा नर्सरी के पास काम शुरू नहीं हुआ है। वहीं कई वन क्षेत्रों में निर्देशों की कमी से काम अटका हुआ है।

जांच बनेगी कार्रवाई का आधार

वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच के संकेत दिए हैं। वन बल प्रमुख ने मामले को जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की बात कही। यानी जो इसके लिए जिम्मेदार पाया जाएगा उस पर कार्रवाई तय है। वन बल प्रमुख के सख्त रुख को देख विभाग में खलबली मची हुई है।

क्या है कैम्पा ?

कैम्पा (CAMPA) वन विभाग एक महत्वपूर्ण संस्था है, जो गैर-वन कार्यों (जैसे उद्योग, खदान) के लिए डायवर्ट की गई वन भूमि के बदले क्षतिपूर्ति वनीकरण (Afforestation) के लिए धन का प्रबंधन करती है। यह निधि National CAMPA और राज्य कैम्पा के माध्यम से वनों की बहाली, वन्यजीव संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च की जाती है।

कैम्पा (CAMPA) के मुख्य काम

उद्देश्य: वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत डायवर्ट की गई भूमि के बदले प्रतिपूरक वनीकरण और पारिस्थितिक बहाली। निधि (Fund): इसमें 'नेट प्रेजेंट वैल्यू' (NPV), क्षतिपूर्ति वनीकरण शुल्क और दंडात्मक राशि शामिल होती है, जो National CAMPA (90%) और राज्य सरकारों (10%) द्वारा प्रबंधित की जाती है।

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