SC-ST केस में आरोपी TI डेढ़ साल से फरार, लेकिन नौकरी जारी, प्रमोशन तक मिल गया
Pawan Modiya | May 19, 2026, 18:06 IST
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मुरैना में SC-ST एक्ट के आरोपी TI पुष्पक शर्मा डेढ़ साल से फरार हैं। 15 गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं, लेकिन पुलिस ने अब तक गिरफ्तारी नहीं की। फरारी के दौरान ही उन्हें पदोन्नति भी मिल गई।
समझें क्या है पूरा मामला
- मुरैना के TI पुष्पक शर्मा पर SC-ST एक्ट में केस है।
- दलित पीड़ित रामशंकर जाटव की शिकायत पर पुलिस ने उल्टा उन पर ही केस दर्ज किया।
- कोर्ट के आदेश पर 15 गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं।
- TI डेढ़ साल से फरार है, लेकिन नौकरी और पदोन्नति जारी रही।
- पुलिस का कहना है कि वारंट की जानकारी मिलने पर कार्रवाई होगी।
जब शिकायतकर्ता पर ही दर्ज हो गया केस
रामशंकर ने बताया कि जब उन्होंने सीएम (Chief Minister) हेल्पलाइन पर शिकायत की तो पुलिसकर्मी उन्हें थाने बुलाकर पीटने लगे। उनका आरोप है कि आरोपी खुद पुलिस अधिकारी है, इसलिए पुलिस उसे बचा रही है।
कोर्ट ने दिया SC-ST केस का आदेश
आरोपी पुष्पक शर्मा कोर्ट में लगातार गैरहाजिर रहे। इसके बाद अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए। विशेष न्यायालय मुरैना ने 18 सितंबर 2024 को गिरफ्तारी वारंट जारी किए और 12 दिसंबर 2024 तक उन्हें कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए। बीते डेढ़ साल में 15 गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं, लेकिन पुलिस आज तक उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई।
फरारी में पदोन्नति, छतरपुर में पदस्थी
एसआई (Sub Inspector) से निरीक्षक बने इस अधिकारी ने अदालत के आदेशों की ही नहीं, बल्कि विभागीय सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर खुद को बचाए रखा।
5 मई 2026 को फिर कोर्ट में पेशी थी, लेकिन पुलिस आरोपी टीआई (थाना निरीक्षक) को पेश नहीं कर सकी। इसके बाद न्यायालय ने फिर से गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए आरोपी को 7 जुलाई 2026 को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं।
आरोपी बोले: वारंट की जानकारी नहीं
उन्होंने यह भी बताया कि विशेष न्यायालय से वारंट जारी होने के बाद 4 सितंबर 2025 को उन्होंने अपने वकील के माध्यम से ग्वालियर हाईकोर्ट (Gwalior High Court) में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। इसलिए उनका कहना है कि अग्रिम जमानत याचिका लगी होने पर उन्हें गिरफ्तारी वारंट की जरूरत नहीं पड़ी।
थाना प्रभारी और एएसपी क्या बोले
वहीं एएसपी (Additional Superintendent of Police) पूर्णिमा मिश्रा ने बताया कि पुष्पक शर्मा 2023 से 2025 तक जिले के बमोरी और हरपालपुर थानों में पदस्थ रहे हैं। वर्तमान में वे जिले में पदस्थ नहीं हैं। लगभग चार से पांच माह पहले उनका स्थानांतरण पुलिस मुख्यालय भोपाल हो चुका है।
पीड़ित की पीड़ा: दलित हूं, न्याय नहीं मिला
उनका कहना है, "यह लड़ाई सिर्फ इसलिए लड़ रहा हूं क्योंकि मैं दलित हूं और आरोपी पुलिस अधिकारी है। इसलिए पुलिस आज तक उसे गिरफ्तार नहीं कर रही।"
सिस्टम पर गंभीर सवाल
SC-ST एक्ट जैसे कानून कमजोर तबके की रक्षा के लिए बने हैं। लेकिन जब खुद कानून के रखवाले ही इस कानून को नजरअंदाज करें, तो पीड़ित के लिए न्याय पाना और मुश्किल हो जाता है।
यह खबर क्यों जरूरी है
जरूरी FAQ
यह मामला 7 अक्टूबर 2019 का है। मुरैना के अंबाह थाना क्षेत्र में दलित पीड़ित रामशंकर जाटव के साथ मारपीट हुई। जब वे शिकायत दर्ज कराने गए तो तत्कालीन थाना प्रभारी पुष्पक शर्मा ने उनकी बात सुनने की जगह उन्हीं पर केस दर्ज कर दिया। इसके अलावा सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने पर पीड़ित को थाने बुलाकर पीटने का भी आरोप है। बाद में कोर्ट के आदेश पर पुष्पक शर्मा सहित चार लोगों पर मारपीट और SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ।
15 गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद भी TI को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
जवाब: विशेष न्यायालय मुरैना ने 18 सितंबर 2024 से लेकर अब तक कुल 15 गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। इसके बावजूद पुलिस ने आरोपी टीआई को गिरफ्तार नहीं किया। खबर के मुताबिक फरारी के दौरान वे छतरपुर जिले में पदस्थ रहे और पदोन्नति भी मिली। थाना प्रभारी का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी। एएसपी ने बताया कि आरोपी का तबादला अब पुलिस मुख्यालय भोपाल हो चुका है। आरोपी का दावा है कि उसने ग्वालियर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।
SC-ST एक्ट के मामले में न्यायालय के आदेश की अनदेखी करने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
जवाब: SC-ST एक्ट एक गंभीर कानून है। न्यायालय के वारंट की अनदेखी करना अदालत की अवमानना (Contempt of Court) के दायरे में आ सकता है। किसी आरोपी को फरार रहने देना और विभागीय संरक्षण देना दोनों ही प्रशासनिक और कानूनी जांच के दायरे में आते हैं। इस मामले में अगर यह साबित हो कि पुलिस ने जानबूझकर अपने अफसर को बचाया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय और आपराधिक कार्रवाई हो सकती है।
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