मध्यप्रदेश की 6 विभागों की योजनाओं पर फंडिंग का संकट, 31 दिसंबर तक का मिला अल्टीमेटम
Aman Vaishnav | Sept 29, 2026, 12:05 IST
मध्य प्रदेश में सरकारी योजनाओं के बजट पर संकट, छह विभागों को 31 दिसंबर तक मिली नई डेडलाइन
मध्य प्रदेश के छह विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं की फंडिंग पर संकट मंडरा रहा है। इन्हें 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए वित्त विभाग का अभिमत और कैबिनेट की मंजूरी जरूरी है। 30 सितंबर 2026 तक कई विभाग प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। अब वित्त विभाग ने डेडलाइन बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी है। देर हुई तो आगामी बजट में फंड का संकट खड़ा हो सकता है।
मध्य प्रदेश के छह विभागों की योजनाओं पर फंडिंग का संकट मंडरा रहा है। ये जनकल्याणकारी योजनाएं 31 मार्च 2031 तक चलनी हैं। इन्हें जारी रखने के लिए वित्त विभाग की राय और कैबिनेट की मंजूरी चाहिए। तय तारीख 30 सितंबर 2026 थी। कई विभाग काम पूरा नहीं कर पाए। अब वित्त विभाग ने नई डेडलाइन 31 दिसंबर 2026 तय की है।
जानकारी के अनुसार हर विभाग को पहले अपनी योजना परखनी होगी। योजना कितनी काम की है इसका हिसाब जोड़ना होगा। फिर प्रस्ताव बनाकर वित्त विभाग से मंजूर कराना होगा। इसके बाद मामला कैबिनेट तक जाएगा।
विभागों को योजनाओं की उपयोगिता और परफॉर्मेंस का विश्लेषण करना है। यह जांच आउटपुट और आउटकम पर होगी। आउटपुट यानी योजना में कितना काम हुआ। आउटकम यानी उस काम से लोगों को क्या फायदा मिला।
मान लीजिए किसी जिले में अस्पताल की इमारत बन गई। यह आउटपुट है। उस अस्पताल से कितने मरीजों को इलाज मिला, यह आउटकम है। वित्त विभाग अब दोनों का हिसाब देखेगा।
सूची में छह विभाग शामिल हैं। पहला है किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग। दूसरा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग है। तीसरा है लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग। चौथा नगरीय विकास एवं आवास विभाग है। पांचवां महिला एवं बाल विकास विभाग है। छठा है पीडब्ल्यूडी(PWD – Public Works Department)।
बता दें कि कृषि विभाग की मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना भी इसमें शामिल है। फसल विस्तार कार्यक्रम भी इसी सूची में है। पंचायत विभाग की प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की राज्य पूरक योजनाएं भी हैं।
ग्रामीण आजीविका मिशन भी इस दायरे में आता है। मनरेगा (MGNREGA – Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) से जुड़ी योजनाएं हैं।
लोक स्वास्थ्य विभाग की मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना इस सूची में है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के वित्त पोषित कार्यक्रम भी शामिल हैं। जिला अस्पतालों के उन्नयन (यानी अपग्रेड) के काम भी इसमें हैं।
नगरीय विकास विभाग की शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी हैं। अमृत मिशन और शहरी आजीविका मिशन भी इसमें आते हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग की पोषण आहार योजनाएं इसमें शामिल हैं। समेकित बाल विकास सेवाओं की अनुपूरक योजनाएं भी सूची में हैं।
पीडब्ल्यूडी का राज्य सड़क विकास कार्यक्रम भी इसी दायरे में है। सेतु निर्माण और भवनों के रखरखाव के प्रावधान भी जुड़े हैं। यानी खेत से अस्पताल और सड़क तक की योजनाएं कतार में हैं।
समय पर प्रक्रिया पूरी न हुई तो फंड का संकट खड़ा हो सकता है। यह असर आगामी बजट और पंचवर्षीय वित्तीय अनुमानों में दिख सकता है। पंचवर्षीय वित्तीय अनुमान यानी अगले पांच साल के खर्च का अनुमानित हिसाब। योजनाओं की फंडिंग इसी मंजूरी पर टिकी है। लाभार्थियों पर कितना असर पड़ेगा, इसका आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।
इन छह विभागों की योजनाएं किसान, मरीज, महिलाओं, बच्चों और ग्रामीण परिवारों तक सीधे पहुंचती हैं। इनकी फंडिंग अटकी तो असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है। कल्याणकारी राज्य की पहचान यही है कि योजनाएं समय पर और बिना रुकावट चलें। साथ ही जनता के पैसे का हिसाब भी साफ रहे। आउटपुट और आउटकम की जांच इसी जवाबदेही का हिस्सा है। अब देखना है कि विभाग तीन महीने में अपनी योजनाओं का पक्ष कितनी मजबूती से रख पाते हैं।
31 दिसंबर तक क्या करना है?
योजना की उपयोगिता और परफॉर्मेंस का विश्लेषण
मान लीजिए किसी जिले में अस्पताल की इमारत बन गई। यह आउटपुट है। उस अस्पताल से कितने मरीजों को इलाज मिला, यह आउटकम है। वित्त विभाग अब दोनों का हिसाब देखेगा।
किन छह विभागों पर है संकट?
किसान और गांव की योजनाओं पर असर
ग्रामीण आजीविका मिशन भी इस दायरे में आता है। मनरेगा (MGNREGA – Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) से जुड़ी योजनाएं हैं।
सेहत और शहर की योजनाओं पर असर
नगरीय विकास विभाग की शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी हैं। अमृत मिशन और शहरी आजीविका मिशन भी इसमें आते हैं।
पोषण और सड़कों की योजनाओं का क्या?
पीडब्ल्यूडी का राज्य सड़क विकास कार्यक्रम भी इसी दायरे में है। सेतु निर्माण और भवनों के रखरखाव के प्रावधान भी जुड़े हैं। यानी खेत से अस्पताल और सड़क तक की योजनाएं कतार में हैं।
देर हुई तो किसे झटका लगेगा?
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