मीडिया के सवालों पर भड़के मंत्री तुलसीराम सिलावट, संगठन पर भी उठे सवाल

ग्वालियर में मंत्री तुलसीराम सिलावट मीडिया के सवाल पर भड़क गए। इस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई। उन्होंने पत्रकारों को सवाल पूछने का अधिकार न देने की बात कही। यह लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करता है।

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Ramanand Tiwari
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BHOPAL.मध्यप्रदेश सरकार में इन दिनों सत्ता का रसूख सिर चढ़कर बोल रहा है। ग्वालियर दौरे पर प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट मीडिया के सवाल पर भड़क गए। इस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई। सवाल केवल एक मंत्री की नाराजगी का नहीं है। सवाल यह है कि क्या प्रदेश सरकार में मंत्री पत्रकारों के सवालों पर झल्लाने लगे हैं?

मीडिया के सवाल पर गरमाए प्रभारी मंत्री

ग्वालियर में एक रिपोर्टर ने सड़कों और अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था को लेकर सवाल पूछा। साथ ही तंज कसा कि मंत्री जी अक्सर महाराज यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया के दौरे के समय ही सक्रिय नजर आते हैं। इस सवाल पर मंत्री तुलसीराम सिलावट नाराज हो गए। उन्होंने कहा आप मुझे निर्देश नहीं देंगे। भाषा का सही इस्तेमाल कीजिए। यह पूछने का अधिकार मैं किसी को नहीं देता। मेरा लेखा-जोखा पार्टी और सरकार के पास है। 

मंत्री ने यह भी कहा कि मेरा सालभर का चार्ट उठा लीजिए, फिर बात कीजिए कि मैं कितनी बार ग्वालियर आया। क्या मंत्री को झल्लाने का अधिकार है लोकतंत्र में पत्रकार सवाल पूछते हैं, जवाब देना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी होती है। 

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ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 

मंत्री को यह कहने का अधिकार है कि यह पूछने का अधिकार मैं किसी को नहीं देता? पिछले एक साल में यह पहला मामला नहीं है। प्रदेश के कई मंत्री पत्रकारों पर भड़क चुके हैं। कुछ मामलों में आपत्तिजनक शब्दों का भी इस्तेमाल हुआ और शब्दों की चर्चा भी सुर्खियों में रही। मीडिया से टकराव की यह शैली अब राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बनती दिख रही है।

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गुस्से के बाद मुआवजे का ऐलान

गुस्से भरे बयान के बाद मंत्री ने ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की घोषणा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भितरवार विधानसभा क्षेत्र में 1711 किसान ओलावृष्टि से प्रभावित हुए हैं। सरकार की ओर से 2 करोड़ 63 लाख रुपये का मुआवजा 20 फरवरी तक देने की प्रक्रिया जारी है। एक मंत्री का गुस्सा, और मीडिया से टकराव प्रदेश की राजनीतिक संस्कृति पर सवाल खड़े करते हैं।

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