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NEWS in short
- व्यापार मेलों में 50% टैक्स छूट सीमित करने का प्रस्ताव।
- 20 लाख तक के वाहनों को ही मिलेगा लाभ।
- ग्वालियर मेले से सरकार को बड़ा राजस्व नुकसान।
- पहली छमाही में परिवहन राजस्व 24.5% घटा।
- तीन साल से टैक्स छूट के फैसले में देरी जारी।
News in Detail
व्यापार मेलों में वाहनों की खरीदी पर मिलने वाली 50 प्रतिशत परिवहन कर छूट पर सरकार अब ब्रेक लगाने जा रही है। ग्वालियर व्यापार मेले में रिकॉर्ड वाहन बिक्री और बढ़ते राजस्व नुकसान के बाद परिवहन विभाग ने छूट की सीमा तय करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। व्यापार मेलों में अब 20 लाख रुपए तक की कीमत वाले वाहनों को ही टैक्स में छूट मिलेगी। प्रस्ताव कैबिनेट में जाने को तैयार, ग्वालियर मेला बना नीति बदलाव की वजह।
सरकार क्यों खींच रही है ब्रेक ?
व्यापार मेलों में वाहनों की बढ़ती बिक्री और 50 प्रतिशत टैक्स छूट से राज्य सरकार के खजाने पर सीधा असर पड़ा है। परिवहन विभाग के राजस्व का बड़ा हिस्सा वाहन कर से आता है, लेकिन मेला छूट इसे कमजोर कर रही है।
एमपी कैबिनेट में जाएगा प्रस्ताव
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, परिवहन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे मंगलवार को होने वाली राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में रखा जा सकता है। फिलहाल प्रस्ताव में ग्वालियर व्यापार मेले का ही उल्लेख है।
20 लाख तक ही राहत
यदि कैबिनेट से मंजूरी मिलती है, तो व्यापार मेलों में सिर्फ 20 लाख रुपए तक कीमत वाले वाहनों को ही टैक्स छूट का लाभ मिलेगा। महंगी कारें इस दायरे से बाहर हो जाएंगी।
राजस्व गिरावट बनी बड़ी वजह
मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में परिवहन विभाग के राजस्व में 24.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा के अनुसार, वाहन बिक्री में कमी इसकी बड़ी वजह है।
उज्जैन मेला भी बढ़ा दबाव
ग्वालियर के बाद उज्जैन में भी व्यापार मेला लगने से टैक्स छूट का दायरा बढ़ा और सरकार पर राजस्व दबाव और गहरा गया।
एक्सपर्ट कमेंट
परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि 50 प्रतिशत टैक्स छूट लंबे समय तक व्यवहारिक नहीं है। इससे महंगी कारों पर सरकार को बड़ा नुकसान होता है। सीमा तय करना जरूरी हो गया था।
Knowledge
- व्यापार मेले में टैक्स में छूट की ये अ​हम वजह
- वाहन बिक्री को बढ़ावा देने के लिए
- मेलों की लोकप्रियता बनाए रखने हेतु
- सीमित अवधि के लिए प्रोत्साहन के तौर पर
राजस्व घाटा बनी वजह
- महंगी कारों की भारी बिक्री
- छूट का लाभ संपन्न वर्ग तक सीमित
- सरकार को करोड़ों का राजस्व नुकसान
छूट में देरी के निर्णय में तीन साल से देरी
- 2022-23: मेला शुरू होने से 2 दिन पहले नोटिफिकेशन
- 2023-24 व 2024-25: मकर संक्रांति के बाद फैसला
- 2025-26: 18 दिन बीतने के बाद भी निर्णय लंबित
बुकिंग ज्यादा, डिलीवरी रुकी
सूत्रों के अनुसार, सैकड़ों खरीदारों ने वाहन बुक कर लिए हैं, लेकिन टैक्स छूट की अधिसूचना नहीं आने से डिलीवरी लेने से बच रहे हैं। इससे स्टॉल संचालकों पर भी दबाव बढ़ गया है।
पड़ोसी राज्यों से भी आते हैं खरीदार
1905 से लग रहा ग्वालियर व्यापार मेला उत्तर भारत का प्रमुख मेला है। इसमें यूपी, राजस्थान और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में खरीदार पहुंचते हैं।
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आंकड़ों में असर
- 2025 मेले में: 25,224 वाहन बिके
- ऑटोमोबाइल कारोबार: ₹2,500 करोड़+
- कारों की बिक्री: दुपहिया से अधिक
खबर का अगला असर (Next Impact)
- कैबिनेट की मंजूरी के बाद
- महंगी कारों की बिक्री घटेगी
- मध्यम वर्गीय वाहनों को बढ़ावा
- सरकार का राजस्व संतुलित होगा
- व्यापार मेलों की नीति में स्थायी बदलाव संभव
निष्कर्ष
व्यापार मेलों में टैक्स छूट अब प्रोत्साहन नहीं, बल्कि सरकार के लिए बोझ बनती जा रही है। ग्वालियर मेला इस बदलाव का ट्रिगर बन गया है। अब राहत मिलेगी लेकिन सीमित और चयनित वर्ग को।
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