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News in Short
- हाईकोर्ट बार ने अधिवक्ता विनायक शाह और रूप सिंह मरावी को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
- फेसबुक पोस्ट और कथित जातिगत वैमनस्य फैलाने को गंभीर कदाचरण माना गया।
- नशे में अभद्रता और झूठी पुलिस शिकायत के आरोप में भी कार्रवाई प्रस्तावित।
- संतोषजनक जवाब न मिलने पर बार काउंसिल से लाइसेंस निरस्तीकरण की सिफारिश होगी।
- ओबीसी वेलफेयर अधिवक्ता संघ ने चीफ जस्टिस से CCTV जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
News in Detail
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में 13 जनवरी 2026 को घटना हुई। घटना ने अधिवक्ता समुदाय को दो धड़ों में बांट दिया। हाईकोर्ट बार ने दो अधिवक्ताओं पर कड़ा एक्शन लिया। ओबीसी वेलफेयर अधिवक्ता संघ ने चीफ जस्टिस से निष्पक्ष जांच की मांग की।
कारण बताओ नोटिस जारी
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ ने जातिगत तनाव और अनुशासनहीनता को गंभीर मानते हुए जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई। संघ ने अधिवक्ता विनायक शाह और रूप सिंह मरावी को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
संघ ने उनकी सदस्यता समाप्त करने और वकालत की सनद निरस्त करने के लिए राज्य अधिवक्ता परिषद को पत्र लिखा। यह निर्णय 14 जनवरी 2026 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।
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अधिवक्ता ने लिया जज विशाल मिश्रा का नाम
पहला नोटिस सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है। अधिवक्ता विनायक शाह पर आरोप है कि उन्होंने 13 जनवरी 2026 को फेसबुक पर एक भ्रामक पोस्ट साझा की। ग्वालियर के अधिवक्ता अनिल मिश्रा को मनुवादी बताया गया। दावा किया गया कि उन्हें जबलपुर बुलाकर सम्मानित किया गया। हाईकोर्ट बार ने इसे तथ्यहीन बताया।
बार ने कहा कि मिश्रा अपने निजी मामले के सिलसिले में जबलपुर आए थे। संघ ने बिना तथ्यों के पोस्ट को जातिगत वैमनस्य फैलाने वाला बताया। जज विशाल मिश्रा का नाम जोड़कर न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
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शराब के नशे में अभद्रता के आरोप
दूसरा नोटिस हाईकोर्ट परिसर में कथित कदाचरण से संबंधित है। अधिवक्ता रूप सिंह मरावी पर आरोप है कि वे 13 जनवरी को कथित रूप से शराब के नशे में हाईकोर्ट परिसर में पहुंचे। अन्य अधिवक्ताओं के साथ अभद्रता एवं मारपीट की।
इसके बाद उनके द्वारा सिविल लाइन थाना, जबलपुर में कुछ अधिवक्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। हाईकोर्ट बार का दावा है कि CCTV फुटेज से कई आरोप तथ्यहीन साबित हुए। शिकायत में दर्ज अधिवक्ता घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे। इसे जानबूझकर जातिगत सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास बताया गया। निर्दोष अधिवक्ताओं को फंसाने की कोशिश की गई।
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ओबीसी वर्ग के अधिवक्ताओं ने की चीफ जस्टिस से शिकायत
मध्य प्रदेश ओबीसी वेलफेयर अधिवक्ता संघ ने मुख्य न्यायमूर्ति को शिकायत सौंपी। संघ ने आरोप लगाया कि 13 जनवरी 2026 को कुछ अधिवक्ताओं ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी वर्ग के खिलाफ जातिसूचक भाषा का प्रयोग किया।
विरोध करने पर एक आदिवासी अधिवक्ता के साथ मारपीट हुई। संघ का कहना है कि सिविल लाइन थाना प्रभारी ने शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की। संघ ने CCTV फुटेज सुरक्षित कर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।
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अधिवक्ताओं को जातियों में ना बांटे: डीके जैन
संयुक्त बैठक में अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन ने कहा कि वकील जाति से नहीं, बल्कि न्याय का प्रतिनिधि होता है। उन्होंने बताया कि जो कोई भी वकील जातीय विवादों में शामिल होगा या ‘काले कोट’ की गरिमा को ठेस पहुंचाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नोटिस प्राप्त दोनों अधिवक्ताओं को 15 दिन का समय दिया गया है। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब न मिलने पर सदस्यता समाप्त कर लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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