शिक्षकों की पोस्टिंग पर HC सख्त, अधिक अंक पाने वाले शिक्षकों को नहीं कर सकते पीछे
Sandeep Kumar | Aug 20, 2026, 23:04 IST
शिक्षकों की पोस्टिंग पर HC सख्त
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शिक्षकों की पोस्टिंग को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि ज्यादा अंक पाने वाले उम्मीदवार को कम मेरिट वाले से पीछे नहीं रखा जा सकता।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षकों की पोस्टिंग को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि ज्यादा अंक पाने वाले उम्मीदवार को कम मेरिट वाले से पीछे नहीं रखा जा सकता। यह मामला रामनाथ शाह और अन्य उम्मीदवारों की अपील से जुड़ा है। कोर्ट ने एकलपीठ का पुराना आदेश निरस्त कर दिया। अब मेरिट के आधार पर नियुक्त उम्मीदवारों को पसंद की पोस्टिंग पर विचार होगा।
हाईकोर्ट के प्रशासनिक जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने यह फैसला सुनाया। युगलपीठ ने कहा कि प्रशासनिक कारणों से मेरिट में आगे रहने वाले उम्मीदवार को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। कोर्ट ने एकलपीठ के पहले के आदेश को निरस्त करते हुए अपीलकर्ताओं की अपील स्वीकार कर ली।
प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (PEB – Professional Examination Board) ने शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 के जरिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें स्कूल शिक्षा विभाग और आदिवासी कल्याण विभाग के पदों के लिए साझा विज्ञापन जारी हुआ था। दोनों विभागों की रिक्तियों को एक ही चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया।
आरक्षित वर्ग के कई उम्मीदवारों ने अनारक्षित उम्मीदवारों से भी ज्यादा अंक हासिल किए। इसके बावजूद उन्हें सामान्य रिक्तियों के विरुद्ध चयनित होने का मौका मिला।
याचिका के अनुसार कई ज्यादा मेरिट वाले उम्मीदवारों को आदिवासी कल्याण विभाग के स्कूल दिए गए, जबकि उन्होंने प्राथमिकता में स्कूल शिक्षा विभाग को चुना था। दूसरी ओर उनसे कम अंक वाले उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग में पद मिल गए।
अधिकारियों ने दो नवंबर और 21 दिसंबर 2022 के आदेशों के जरिए पहले से नियुक्त उम्मीदवारों को रिक्त पदों की काउंसलिंग में शामिल होने से रोक दिया था।
अपीलकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को विज्ञापन की शर्तों और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के खिलाफ बताया। युगलपीठ ने भी माना कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि कम योग्यता वाले उम्मीदवारों को काउंसलिंग का मौका मिला। वहीं अधिक योग्य उम्मीदवार पहले से नियुक्ति के कारण इस अवसर से वंचित रह गए। कोर्ट ने कहा कि ऐसी व्यवस्था स्वीकार्य नहीं है।
हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि यदि वैकेंसी उपलब्ध है, तो उम्मीदवारों को पसंद के अनुसार समायोजित करने पर विचार किया जाए। अगर वैकेंसी नहीं है, तो दो महीने के भीतर स्कूल चॉइस फिलिंग नीति के अनुसार उम्मीदवारों को दूसरे विभाग में समायोजित किया जाए।
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युगलपीठ ने क्या कहा
शिक्षक भर्ती से जुड़ा पूरा विवाद
आरक्षित वर्ग के कई उम्मीदवारों ने अनारक्षित उम्मीदवारों से भी ज्यादा अंक हासिल किए। इसके बावजूद उन्हें सामान्य रिक्तियों के विरुद्ध चयनित होने का मौका मिला।
कम अंक वालों को मिला पसंदीदा विभाग
अधिकारियों ने दो नवंबर और 21 दिसंबर 2022 के आदेशों के जरिए पहले से नियुक्त उम्मीदवारों को रिक्त पदों की काउंसलिंग में शामिल होने से रोक दिया था।
अपीलकर्ताओं का तर्क
कोर्ट का निर्देश
FAQ
- हाईकोर्ट ने शिक्षकों की पोस्टिंग पर क्या कहा
कोर्ट ने कहा कि ज्यादा अंक पाने वाले उम्मीदवार को कम मेरिट वाले से पीछे नहीं रखा जा सकता। मेरिट के आधार पर नियुक्त उम्मीदवारों को पसंद की पोस्टिंग मिलनी चाहिए। - कोर्ट ने आगे क्या निर्देश दिया है?
कोर्ट ने कहा कि वैकेंसी होने पर पसंद के अनुसार समायोजन पर विचार किया जाए। वैकेंसी न होने पर दो महीने के भीतर स्कूल चॉइस फिलिंग नीति के अनुसार दूसरे विभाग में समायोजन हो। यह निर्देश संबंधित विभाग को दिया गया है।
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