/sootr/media/media_files/2025/12/22/highcourt-building-trees-cut-2025-12-22-17-53-19.jpg)
JABALPUR. जिस शहर में हाईकोर्ट की मुख्य पीठ है। वहां पर ही HC के आदेश का पालन नहीं होता। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पूरे मध्य प्रदेश में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा कर रखी है। हाईकोर्ट बिल्डिंग के पास स्थित एल्गिन अस्पताल परिसर में हाईकोर्ट के आदेश की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं।
रातों-रात काट दिए वर्षों पुराने पेड़
हाईकोर्ट बिल्डिंग के पास एल्गिन अस्पताल परिसर में पेड़ काटे गए। ट्रेनिंग सेंटर के सामने रातों-रात हरे-भरे पेड़ काटे गए। इसके लिए किसी से परमिशन नहीं ली गई। उद्यान विभाग ने नोटिस जारी किया है। कोर्ट के आदेश के बावजूद अधिकारियों को कोई डर नहीं दिखा।
हाईकोर्ट ने लगा रखी है पूरे मध्यप्रदेश में रोक
जबलपुर हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पेड़ कटाई के मामले में सुनवाई शुरू की थी। याचिका क्रमांक WP 42565/2025 में चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच ने आदेश जारी किया। आदेश में पूरे मध्य प्रदेश में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी गई थी। आदेश के अनुसार, एनजीटी की गठित कमेटी और ट्राई ऑफिसर की अनुमति के बिना पेड़ नहीं काटे जा सकते। उसके बाद भी जब जिस शहर में हाईकोर्ट की मुख्य पीठ स्थित है। वहां पर ही आदेश का ऐसा उल्लंघन हो रहा है तो पूरे प्रदेश में क्या हाल होगा।
/filters:format(webp)/sootr/media/media_files/2025/12/22/trees-cut-ban-2025-12-22-18-02-31.jpeg)
ये भी पढ़ें...कागजों के जंगल पर भरोसा : कोल कंपनी के लिए वांसी–बिरदहा में 32 हजार पेड़ों की कटाई तेज
उद्यान अधिकारी बोले नहीं ली परमिशन
उद्यान विभाग के उपयंत्री सौरभ त्रिपाठी ने बताया कि एल्गिन अस्पताल की अधीक्षक को नोटिस जारी किया गया है। यदि कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो वृक्ष अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। हालांकि यह कारण बताओं नोटिस एक खानापूर्ति मात्र है। नगर निगम सीमा में उद्यान विभाग से अनुमति न लेना इसे अवैध बना देता है।
ये भी पढ़ें...पेड़ों की कटाई पर HC सख्त: 50 साल पुराने पेड़ काटकर विकास नहीं, विनाश कर रहे हैं
कड़ी सजा न होने के कारण नहीं है अधिकारियों में डर
नियम विरुद्ध पेड़ कटाई पर आमतौर पर दोगुने पेड़ कहीं और लगाने की शर्त होती है। इससे पुराने वृक्षों की भरपाई नहीं हो सकती। अधिकारियों को पेड़ काटने से डर नहीं लगता, क्योंकि नियम की कमी है।
खुलेआम हुई हाईकोर्ट की अवमानना
इस मामले में क्योंकि हाईकोर्ट पहले ही साफ और विस्तृत आदेश जारी कर चुका है। इसलिए जबलपुर में की गई पेड़ों की कटाई का मामला कोर्ट की अवमानना की श्रेणी में आता है। यह स्पष्ट हो गया है कि जबलपुर में पेड़ काटने के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को कोर्ट की अवमानना का सामना करना पड़ेगा।
गलत विभाग को जारी किया गया नोटिस
इस मामले में लेडी एल्गिन अस्पताल की अधीक्षक नीता पाराशर का कहना है कि यह नोटिस गलत विभाग को जारी किया गया है। उनके अनुसार यह जमीन जहां पर पेड़ों की कटाई हुई है वह हाउसिंग बोर्ड के अधिपत्य में है। उन्होंने बताया कि यह कंस्ट्रक्शन और पेड़ कटाई भी हाउसिंग बोर्ड के द्वारा की गई है। अब यहां एक सवाल यह भी खड़ा हो गया है कि क्या नगर निगम के अधिकारी इतने अनजान है कि उन्हें नहीं पता कि नगरीय सीमा में कौन सी जमीन किसके नाम पर है। या नोटिस जारी कर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us