कागजों के जंगल पर भरोसा : कोल कंपनी के लिए वांसी–बिरदहा में 32 हजार पेड़ों की कटाई तेज

सिंगरौली के वांसी-बिरदहा जंगल में कोल कंपनी के लिए 32,000 पेड़ों की कटाई तेज हो गई है। वन विभाग ने कागजी भरोसे पर यह कदम उठाया है, जबकि जमीन का सत्यापन और सीमांकन नहीं हुआ। विरोध-प्रदर्शन भी जारी हैं और पर्यावरणीय नुकसान की आशंका है।

author-image
Ravi Awasthi
New Update
tree cutting

Photograph: (THESOOTR)

Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

BHOPAL. सिंगरौली के वांसी-बिरदहा जंगल में वन विभाग ने कोल कंपनी के कागजी भरोसे पर ​हजारों पेड़ों की कटाई शुरू कर दी है। बदले में मिलने वाली जमीन का न तो सत्यापन हुआ है और न ही सीमांकन, फिर भी हजारों पेड़ तेजी से गिराए जा रहे हैं।

32 हजार से अधिक पेड़ों की बलि 

सूत्रों के मुताबिक, सिंगरौली में कोल ब्लॉक पाने वाली कंपनी के लिए वांसी-बिरदहा के जंगल में 32 हजार से अधिक पेड़ खड़े हैं। इनमें सागौन, शीशम समेत अन्य प्रजाति के पेड़ शामिल हैं। 

तय शर्तों के मुताबिक,​ वन वि​भाग को दो चरणों में यह जमीन कंपनी को आवंटित करना है। पहले चरण में ही करीब 70 हेक्टेयर भूमि दी जानी है। इस पर हजारों की संख्या में खड़े पेड़ों की कटाई का काम तेजी से किया जा रहा है। दूसरे चरण में शेष भूमि का आवंटन होगा। इसमें कुछ हिस्सा राजस्व भूमि का भी है।

ये खबर भी पढ़ें...

मध्य प्रदेश पेंशन योजना: दो लाख अफसर निर्णय के इंतजार में, सरकार की कमेटी 7 महीने से साइलेंट मोड पर

7 सौ किमी दूर तैयार होगा नया जंगल

वांसी-बिरदहा में स्वीकृत जमीन के बदले कोल कंपनी ने सागर, रायसेन, आगर और शिवपुरी में करीब 14सौ हेक्टेयर जमीन वन विभाग को देने का प्रस्ताव दिया है। विभाग भविष्य में इस जमीन पर पौधरोपण कर सिंगरौली जिले में पर्यावरण को पहुंच रहे नुकसान की भरपाई करेगा। 

एमपी सरकार के दो साल पूरे होने पर सर्वे में शामिल होने के लिए फोटो पर क्लिक करें...

MP GOVERNMENT

जमीन के बदले जमीन फिलहाज कागजों पर

सूत्रों के मुताबिक, विभाग ने कंपनी ने अब तक सिर्फ उक्त चारों जिलों में जमीन दिए जाने का प्रस्ताव विभाग को सौंपा है। इसका मौके पर भौतिक सत्यापन अब तक नहीं हुआ है। इसके विपरीत वन विभाग ने जोखिम उठा रहा है। उसने कंपनी के प्रस्ताव पर भरोसा कर कोल ब्लॉक वाले क्षेत्र में पेड़ों की कटाई शुरू कर दी है।

ये खबर भी पढ़ें...

ई-अटेंडेंस प्रणाली: डेटा लीक और साइबर फ्रॉड का आरोप, 1 दिसंबर को राज्य सरकार देगी जवाब

बड़ा खतरा, अतिक्रमण पथरीली जमीन का

विभागीय सूत्रों का दावा है कि ऐसे मामलों में वन विभाग आमतौर पर ठगी का शिकार होता रहा है। सागर का बहुचर्चित वनीकरण क्षतिपूर्ति घोटाला इसका उदाहरण है। यह पथरीली जमीन है। जो मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में लगे उद्योगों के बदले मिली थी। यहां पौधरोपण असफल रहने पर तत्कालीन डीएफओ प्रशांत कुमार सिंह के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हुई। इसके जारी रहते वह अब तक पदोन्नति नहीं पा सके। 

ये खबर भी पढ़ें...

सिवनी हवाला कांड : SDOP पूजा पांडे की जमानत सुनवाई टली, 1 दिसंबर के लिए हुई लिस्ट

नोटिफिकेशन के बाद ही होगा भौतिक सत्यापन

महान एनर्जेन कोल कंपनी की ओर से जिन चार जिलों में जमीन बताई गई, विभागीय अफसर अब तक इससे अंजान हैं। इस संबंध में पीसीसीएफ लैंड रिकॉर्ड एचएस मोहंता कहते हैं- बताई गई जमीन का नोटिफिकेशन के बाद ही इसका भौतिक सत्यापन किया जा सकता है। अतिक्रमित या विवादित जमीन विभाग स्वीकार नहीं करता है। 

ये खबर भी पढ़ें...

इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज भी पहुंची थी ED, जारी हुई सूचना, सुरेश भदौरिया बोलते रहे झूठ

सिंगरौली में विरोध- प्रदर्शन जारी

इधर, सिंगरौली जिले के वांसी बिरदहा वन क्षेत्र में आदिवासियों के कथित विस्थापन व पेड़ों की कटाई का विरोध जारी है। विशेषकर, कांग्रेस इसके खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर मोर्चा खोले हुए है। 

झाबुआ विधायक विक्रांत भूरिया ने हाल ही में प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कोल ब्लॉक के लिए करीब 27 सौ हेक्टेयर जमीन आवंटित की जानी है, लेकिन प्रशासन व संबंधित कोल कंपनी वास्तविक आंकड़े छिपा रहे हैं।उन्होंने जंगल की कटाई को आदिवासी हितों के विपरीत व पर्यावरण के लिए खतरा बताया।

विक्रांत भूरिया सिंगरौली पीसीसीएफ वांसी-बिरदहा जंगल पेड़ों की कटाई
Advertisment