IAS नियाज करेंगे खान सरनेम से तौबा... ले लिया ये बड़ा फैसला
Sourabh Bhatnagar | Oct 02, 2024, 14:54 IST
अब से My Name is Khan नहीं!
मध्य प्रदेश के चर्चित आईएएस अधिकारी नियाज खान ने अपने सरनेम से मुक्ति पाने का फैसला कर लिया है। अब वे एक नए नाम से अपने उपन्यास लिखेंगे। खान का मानना है कि खान सरनेम के कारण उनकी किताबें यूएसए और यूरोप में लोकप्रियता नहीं हो पा रहीं।
मध्य प्रदेश के चर्चित आईएएस अधिकारी नियाज खान (Niyaz Khan) अब अपने नाम से खान सरनेम (Khan Surname) हटाने का निर्णय ले चुके हैं। खान ने कई चर्चित उपन्यास जैसे 'ब्राह्मण द ग्रेट' (Brahman the Great) और 'वॉर ऑफ कलियुग' (War of Kaliyug) लिखे हैं, लेकिन उनका मानना है कि उनका सरनेम उनके उपन्यासों की लोकप्रियता को प्रभावित कर रहा है, खासकर पश्चिमी देशों में। उन्होंने घोषणा की है कि भविष्य में वे अपने उपन्यासों और लेखों में 'माइकन ए' (Mikean A) नाम का उपयोग करेंगे, जो उनके नाना ने उन्हें बचपन में दिया था। उनका कहना है कि यूएसए (USA) और यूके (UK) में उनकी किताबें खान सरनेम की वजह से रिजेक्ट हो रही हैं, और यही कारण है कि उन्होंने अपनी पहचान बदलने का फैसला लिया है।
नियाज खान का मानना है कि दुनिया के कुछ देशों में खान सरनेम (Khan Surname) के प्रति नकारात्मक धारणा है, जिसके चलते उनकी किताबें एशियाई देशों (Asian Countries) में तो पढ़ी जाती हैं, लेकिन यूरोप (Europe) और अमेरिका (America) में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाती। उनकी राय में, यह एक आइडियोलॉजिकल समस्या (Ideological Problem) है और इसी के चलते उन्होंने अपना पेन नेम बदलने का निर्णय लिया है। खान अब अपनी किताबों को नए नाम से प्रकाशित करेंगे ताकि वे ज्यादा पाठकों तक पहुंच सकें।
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उनके उपन्यासों में ग्लोबल स्तर पर विषय उठाए गए हैं। खासकर उनके उपन्यास में फिलिस्तीन (Palestine), इजराइल (Israel), सऊदी अरब (Saudi Arabia), आयरलैंड (Ireland), सूडान (Sudan), और अफगानिस्तान (Afghanistan) जैसे देशों से पात्रों को जोड़ा गया है। खान के अनुसार, उनके उपन्यास का प्रमुख पात्र सलेम (Salem) एक रहस्यमयी किरदार है, जो जैविक हथियार से वैश्विक स्तर पर आतंक फैलाने का काम करता है।
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नियाज खान अपने उपन्यासों के अलावा अपने ट्वीट्स (Tweets) और बयानों के कारण भी चर्चा में रहते हैं। उन्होंने हिजाब विवाद (Hijab Controversy) पर कहा था कि हिजाब हमारे जीवन की सुरक्षा करता है और हमें प्रदूषण से बचाता है। उन्होंने वर्ष 2019 में कहा था कि उनके खान सरनेम (Khan Surname) की वजह से उन्हें अपने करियर में बहुत कुछ सहना पड़ा है। इसके अलावा, उन्होंने कश्मीर फाइल्स (Kashmir Files) पर भी ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने मुस्लिमों के नरसंहार पर एक किताब लिखने की बात कही थी। वे प्रकाशकों से अपने पुराने उपन्यास के लेखक के नाम में भी नियाज खान के बजाय माइकन ए लिखवाने जा रहे हैं। उनका कहना है कि वे यूएसए, यूएसई में जो किताबें वे भेजते रहे हैं, वे रिजेक्ट होती रही हैं।
IAS नियाज खान मध्य प्रदेश कैडर के एक वरिष्ठ अधिकारी हैं, जो वर्तमान में राज्य के लोक निर्माण विभाग में उप सचिव के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने कई बार अपने ट्वीट्स और बयानों के कारण विवादों में सुर्खियां बटोरी हैं। 2022 में, उन्होंने फिल्म "द कश्मीर फाइल्स" पर टिप्पणी करते हुए फिल्म निर्माताओं से आग्रह किया कि वे भारत में मुसलमानों की दुर्दशा पर भी एक फिल्म बनाएं। इस टिप्पणी के बाद, राज्य सरकार ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
इसके अलावा, निज़ान खान बॉलीवुड को धार्मिक परिवर्तन के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए भी विवादों में आए। उन्होंने लिखा है कि बॉलीवुड में फिल्मों के माध्यम से धार्मिक रूपांतरण हो रहे हैं, जो उनके अनुसार समाज के लिए नुकसानदायक है।
नियाज खान एक लेखक भी हैं और उन्होंने कई उपन्यास लिखे हैं जो सामाजिक मुद्दों पर आधारित हैं। उनके इस साहित्यिक और सामाजिक सक्रियता के कारण वे अक्सर मीडिया और सामाजिक प्लेटफॉर्म्स पर चर्चा का विषय बने रहते हैं।
इन सबके बावजूद उनका मुख्य कार्य प्रशासनिक सेवा में है और वे मध्य प्रदेश में विभिन्न सरकारी विभागों में महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन कर चुके हैं।
नई पहचान की जरूरत क्यों महसूस हुई?
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उपन्यास के मुख्य विषय
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विवाद और चर्चा में बने रहने का कारण
कौन हैं IAS नियाज खान
इसके अलावा, निज़ान खान बॉलीवुड को धार्मिक परिवर्तन के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए भी विवादों में आए। उन्होंने लिखा है कि बॉलीवुड में फिल्मों के माध्यम से धार्मिक रूपांतरण हो रहे हैं, जो उनके अनुसार समाज के लिए नुकसानदायक है।
नियाज खान एक लेखक भी हैं और उन्होंने कई उपन्यास लिखे हैं जो सामाजिक मुद्दों पर आधारित हैं। उनके इस साहित्यिक और सामाजिक सक्रियता के कारण वे अक्सर मीडिया और सामाजिक प्लेटफॉर्म्स पर चर्चा का विषय बने रहते हैं।
इन सबके बावजूद उनका मुख्य कार्य प्रशासनिक सेवा में है और वे मध्य प्रदेश में विभिन्न सरकारी विभागों में महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन कर चुके हैं।
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