सीएम मोहन यादव ने लाल परेड ग्राउंड में फहराया तिरंगा, प्रदेश को किया संबोधित
Amresh Kushwaha | Aug 15, 2026, 09:22 IST
सीएम मोहन यादव लाल परेड ग्राउंड
आज मध्यप्रदेश में देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में ध्वजारोहण किया। इससे बाद प्रदेश को संबोधित किया।
Independence Day 2026 : देश आज 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) मना रहा है। भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में स्वतंत्रता दिवस का राज्य स्तरीय मुख्य समारोह शुरू हो गया है। सीएम मोहन यादव यहां ध्वजारोहण किया और परेड की सलामी ली। इससे बाद उन्होंने प्रदेश को संबोधित किया।
स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बड़ा ऐलान किया था। मंत्रालय ने राष्ट्रपति पुलिस पदकों की सूची जारी की थी। इस सूची में मध्यप्रदेश के 20 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। इन सभी को बेहतरीन सेवा के लिए चुना गया है। चार अधिकारियों को विशिष्ट सेवा के लिए पदक आज सीएम मोहन यादव ने दिया।
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लाल परेड मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेशवासियों को संबोधित कर रहे हैं। जानिए उनके भाषण में क्या विशेष बातें है...
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- स्वतंत्रता दिवस के इस खास मौके पर प्रदेशवासियों को मेरी ओर से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। मैं मध्यप्रदेश के साढ़े आठ करोड़ लोगों की तरफ से देश की आजादी के लिए अपना योगदान देने वाले सभी महान योद्धाओं और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करता हूं।
उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में मध्यप्रदेश के भी कई वीरों ने अपना बलिदान दिया। रानी दुर्गावती, रानी अवंतीबाई, महाराजा छत्रसाल, टंट्या मामा भील से लेकर चंद्रशेखर आजाद तक कई महान सपूतों ने देश के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। आज पूरा मध्यप्रदेश उन सभी वीरों को श्रद्धा के साथ याद कर रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- सुशासन की शुरुआत तभी होती है, जब लोगों का सरकार और व्यवस्था पर भरोसा हो। जनता की भलाई के लिए सरकार और लोगों के बीच सीधा संवाद और विश्वास बेहद जरूरी है।
इसी सोच के साथ सरकार ने 7 अगस्त 2026 से मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान शुरू किया है। इसका सीधा लक्ष्य है- न देरी, न दूरी, यानी लोगों की समस्याओं का समाधान बिना देरी और आसानी से हो। अभियान का पहला चरण 8 जनवरी 2027 तक चलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए सरकार ने नई कवच योजना शुरू की है।
उन्होंने कहा कि जिन सहकारी समितियों की जांच अभी चल रही है, लेकिन उनमें जुड़े किसान भाइयों की कोई गलती नहीं है, ऐसी समितियों को नियमित किया जाएगा। इसके बाद किसानों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- किसानों के खेत हमारे लिए किसी देवस्थल से कम नहीं हैं और खेतों से पैदा होने वाला हर दाना हमारे लिए अनमोल है।
उन्होंने कहा कि साल 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित कर किसानों की मेहनत और योगदान का सम्मान किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार सरकारी योजनाओं के लिए किसानों की जमीन लेने पर उन्हें चार गुना मुआवजा देने का किसान हितैषी फैसला लागू किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- हमारी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4 लाख 38 हजार करोड़ रुपए का बजट पेश किया है। यह पिछले साल के बजट से करीब 10 प्रतिशत ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में भी पिछले साल के मुकाबले 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने तीन साल के रोलिंग बजट की व्यवस्था लागू की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के GYAN (गरीब, युवा, नारी और किसान) के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए इसमें इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर को भी जोड़ा गया है। इसे GYANII के रूप में विस्तार दिया गया है, ताकि विकास की रफ्तार और तेज हो सके।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- भारत की संस्कृति हमेशा समानता, भाईचारे और सबको साथ लेकर चलने की रही है। भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण, संतों और महापुरुषों ने भी समाज में समानता का संदेश दिया है।
उन्होंने कहा कि इसी भावना को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून व्यवस्था लागू करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि UCC से भेदभाव को खत्म करने और समाज में समानता बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही महिलाओं को अन्याय और अत्याचार से सुरक्षा मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- वसुधैव कुटुम्बकम् यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, यही भारतीय संस्कृति की मूल भावना है।
उन्होंने कहा कि यह मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है कि जून 2026 में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों और कृषि कार्य समूह की बैठक, वहीं अगस्त 2026 में ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों और संस्कृति कार्य समूह की बैठक की मेजबानी करने का अवसर प्रदेश को मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन आयोजनों से मध्यप्रदेश की पहचान दुनिया भर में और मजबूत हुई है। साथ ही, वैश्विक शांति और साझा संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई राह भी तैयार हुई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- किसान कल्याण वर्ष के दौरान सरकार ने किसानों के हित में कई बड़े कदम उठाए हैं। हर किसान को खाद और बीज उपलब्ध कराने, पर्याप्त बिजली देने, खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने और फसलों को समर्थन मूल्य पर खरीदने का काम किया गया है।
उन्होंने कहा कि जिन फसलों में भावांतर योजना लागू है, उसमें किसानों को राशि दी गई है। फसल खराब होने पर बीमा और राहत राशि भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा किसान सम्मान निधि का लाभ भी किसानों तक पहुंचाया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले ढाई साल में अलग-अलग योजनाओं के जरिए किसानों के बैंक खातों में 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि सीधे ट्रांसफर की गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के संकल्प से प्रेरणा लेकर प्रदेश में लखपति गौ-पालक दीदी योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नस्ल सुधार और बछिया पालन के जरिए प्रदेश की महिलाएं अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगी और लखपति बनने का सपना पूरा कर सकेंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- राज्य सरकार मध्यप्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में रोजाना करीब 12 लाख लीटर दूध का संकलन हो रहा है। इससे दुग्ध उत्पादकों को भी फायदा मिल रहा है और उन्हें प्रति लीटर दूध पर 8 रुपए से ज्यादा का मुनाफा मिल रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- अक्सर लोगों को लगता है कि रोजगार के अवसर सिर्फ उद्योगों या सरकारी नौकरियों से ही मिलते हैं, लेकिन अब मध्यप्रदेश में सिंचित खेती भी रोजगार का बड़ा माध्यम बन रही है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि खेती में रुचि रखने वाले लोग ज्यादा से ज्यादा उद्यानिकी फसलों को अपनाएं। आज प्रदेश में संतरा, केला, अंगूर, सीताफल, सब्जियां और मसालों के साथ-साथ मखाना, ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, गेंदा और गुलाब जैसी फसलों की खेती भी की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई तकनीक और आधुनिक खेती के तरीकों से किसानों की आय बढ़ रही है और उनकी जिंदगी में बदलाव आ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा- मध्यप्रदेश में विकास की रफ्तार को और बढ़ाने के लिए सरकार किसानों, कारीगरों और युवाओं के हित में लगातार बड़े फैसले ले रही है।
उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन नीति-2026 के तहत 7,430 करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही सिंचाई क्षमता को बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मृगनयनी के जरिए प्रदेश के कारीगरों और उनके उत्पादों को दुनिया के बाजार तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, साल 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाने का फैसला किया गया है।
उन्होंने कहा कि अब तक 85 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। आगे हर साल 1 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और बड़े स्तर पर कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा- मध्यप्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और अपना काम शुरू करने के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले ढाई साल में उद्यम पोर्टल पर 3.34 लाख से ज्यादा विनिर्माण इकाइयां रजिस्टर्ड हुई हैं। इससे करीब 33.80 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिले हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में इस समय करीब 8 हजार स्टार्टअप काम कर रहे हैं, जिनमें से आधे यानी 50 प्रतिशत की कमान महिला उद्यमियों के हाथों में है। आने वाले ढाई साल में स्टार्टअप की संख्या 12 हजार से ज्यादा करने और 100 नए इंक्यूबेशन सेंटर शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा- AI के इस दौर में मध्यप्रदेश ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को बढ़ावा दे रहा है। इसके तहत मल्टीमीडिया, गेमिंग, कला, मीडिया, मनोरंजन, संस्कृति और रचनात्मक क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले ढाई साल में प्रदेश को 34 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रस्ताव जमीन पर उतर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी तेजी से निवेश हो रहा है और अब तक 12 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश इस क्षेत्र में साकार हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा- नीति आयोग ने मध्यप्रदेश की कई औद्योगिक नीतियों को देश की सबसे ज्यादा निवेश के अनुकूल नीतियों में शामिल किया है।
उन्होंने बताया कि भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 से प्रदेश में निवेश और रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी 55 जिलों की निर्यात कार्य योजनाएं तैयार कर ली गई हैं, ताकि हर जिला अपने उत्पादों के साथ निर्यात का केंद्र बन सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल, लोकल गोज ग्लोबल के मंत्र के साथ मध्यप्रदेश का लक्ष्य है कि दुनिया में गर्व से कहा जाए- यह मध्यप्रदेश में बना है।
मुख्यमंत्री ने कहा- गांवों का हर क्षेत्र में विकास करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने बताया कि आवास योजनाओं के तहत पूरे हो चुके घरों की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है। वहीं, जल गंगा संवर्धन अभियान के जरिए प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर बेहतर काम हुआ है, जिसकी देशभर में सराहना हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना करीब 1.25 करोड़ महिलाओं के जीवन में आर्थिक मजबूती और सशक्तिकरण का जरिया बनी है। इसके अलावा लाड़ली लक्ष्मी योजना से प्रदेश की 53.55 लाख से ज्यादा बेटियां जुड़ चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा- प्रदेश में बेहतर सुविधाओं वाले सांदीपनि विद्यालय अब मध्यप्रदेश की नई पहचान बन रहे हैं। इन विद्यालयों के 50 से ज्यादा विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय मेरिट सूची में जगह बनाई है।
उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के 73 विश्वविद्यालय और 1,400 से ज्यादा महाविद्यालय 16 लाख से अधिक युवाओं के भविष्य को संवारने का काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह खुशी की बात है कि कॉलेजों में हर 100 छात्रों के मुकाबले 171 बेटियां दाखिला ले रही हैं, जो महिला शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए पिछले 3 महीने में 1,000 नए डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है। आने वाले 6 महीनों में 1,000 और डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा- प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके, इसके लिए एक और मेडिकल यूनिवर्सिटी शुरू करने का फैसला लिया गया है। इसके बाद प्रदेश में कुल 2 चिकित्सा विश्वविद्यालय हो जाएंगे।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 8 नए आयुर्वेदिक कॉलेजों का निर्माण भी शुरू हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई साल में 23 हजार करोड़ रुपए की लागत से 15 हजार किलोमीटर से ज्यादा सड़कों का निर्माण, सुधार और मजबूतीकरण किया गया है।
उन्होंने बताया कि भोपाल और इंदौर में मेट्रोपॉलिटन रीजन के विकास के साथ अब जबलपुर और ग्वालियर को भी इसी तरह विकसित करने की योजना है। वहीं, सिंहस्थ-2028 के भव्य आयोजन की तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा- मध्यप्रदेश अब बिजली गुल वाले पुराने दौर से निकलकर बिजली फुल के नए दौर में पहुंच चुका है।
उन्होंने बताया कि पिछले रबी सीजन में करीब 20 हजार मेगावाट और इस बार 21 हजार मेगावाट से ज्यादा बिजली की मांग पूरी कर प्रदेश ने नया रिकॉर्ड बनाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की कुल बिजली क्षमता में 30 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन एनर्जी का है, जिसे आने वाले समय में बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि नर्मदापुरम में देश का पहला रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण निर्माण क्षेत्र, मक्सी में सोलर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और मुरैना में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट विकसित किए जा रहे हैं।
इसके साथ ही बड़े शहरों में 550 से ज्यादा ई-बसें चल रही हैं और भोपाल-इंदौर में मेट्रो कनेक्टिविटी से प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।
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"राष्ट्र ही सर्वोपरि"
80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज लाल परेड मैदान, भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने… pic.twitter.com/xDXXfLmI48
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) August 15, 2026
20 पुलिस अधिकारियों को मिला पदक
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स्वतंत्रता दिवस पर सीएम का प्रदेश को संबोधन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- स्वतंत्रता दिवस के इस खास मौके पर प्रदेशवासियों को मेरी ओर से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। मैं मध्यप्रदेश के साढ़े आठ करोड़ लोगों की तरफ से देश की आजादी के लिए अपना योगदान देने वाले सभी महान योद्धाओं और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करता हूं।
उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में मध्यप्रदेश के भी कई वीरों ने अपना बलिदान दिया। रानी दुर्गावती, रानी अवंतीबाई, महाराजा छत्रसाल, टंट्या मामा भील से लेकर चंद्रशेखर आजाद तक कई महान सपूतों ने देश के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। आज पूरा मध्यप्रदेश उन सभी वीरों को श्रद्धा के साथ याद कर रहा है।
सरकार और लोगों के बीच सीधा संवाद बेहद जरूरी
इसी सोच के साथ सरकार ने 7 अगस्त 2026 से मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान शुरू किया है। इसका सीधा लक्ष्य है- न देरी, न दूरी, यानी लोगों की समस्याओं का समाधान बिना देरी और आसानी से हो। अभियान का पहला चरण 8 जनवरी 2027 तक चलेगा।
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किसानों के लिए नई कवच योजना
उन्होंने कहा कि जिन सहकारी समितियों की जांच अभी चल रही है, लेकिन उनमें जुड़े किसान भाइयों की कोई गलती नहीं है, ऐसी समितियों को नियमित किया जाएगा। इसके बाद किसानों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
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किसानों दिया जा रहा चार गुना तक मुआवजा
उन्होंने कहा कि साल 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित कर किसानों की मेहनत और योगदान का सम्मान किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार सरकारी योजनाओं के लिए किसानों की जमीन लेने पर उन्हें चार गुना मुआवजा देने का किसान हितैषी फैसला लागू किया गया है।
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तीन साल के रोलिंग बजट की व्यवस्था
उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में भी पिछले साल के मुकाबले 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने तीन साल के रोलिंग बजट की व्यवस्था लागू की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के GYAN (गरीब, युवा, नारी और किसान) के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए इसमें इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर को भी जोड़ा गया है। इसे GYANII के रूप में विस्तार दिया गया है, ताकि विकास की रफ्तार और तेज हो सके।
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मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC)
उन्होंने कहा कि इसी भावना को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून व्यवस्था लागू करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि UCC से भेदभाव को खत्म करने और समाज में समानता बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही महिलाओं को अन्याय और अत्याचार से सुरक्षा मिलेगी।
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ब्रिक्स की मेजबानी करने का अवसर प्रदेश को मिला
उन्होंने कहा कि यह मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है कि जून 2026 में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों और कृषि कार्य समूह की बैठक, वहीं अगस्त 2026 में ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों और संस्कृति कार्य समूह की बैठक की मेजबानी करने का अवसर प्रदेश को मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन आयोजनों से मध्यप्रदेश की पहचान दुनिया भर में और मजबूत हुई है। साथ ही, वैश्विक शांति और साझा संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई राह भी तैयार हुई है।
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किसानों के बैंक खातों में 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि सीधे ट्रांसफर
उन्होंने कहा कि जिन फसलों में भावांतर योजना लागू है, उसमें किसानों को राशि दी गई है। फसल खराब होने पर बीमा और राहत राशि भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा किसान सम्मान निधि का लाभ भी किसानों तक पहुंचाया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले ढाई साल में अलग-अलग योजनाओं के जरिए किसानों के बैंक खातों में 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि सीधे ट्रांसफर की गई है।
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लखपति गौ-पालक दीदी योजना को बढ़ावा
उन्होंने कहा कि नस्ल सुधार और बछिया पालन के जरिए प्रदेश की महिलाएं अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगी और लखपति बनने का सपना पूरा कर सकेंगी।
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मध्यप्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाने का लक्ष्य
उन्होंने बताया कि प्रदेश में रोजाना करीब 12 लाख लीटर दूध का संकलन हो रहा है। इससे दुग्ध उत्पादकों को भी फायदा मिल रहा है और उन्हें प्रति लीटर दूध पर 8 रुपए से ज्यादा का मुनाफा मिल रहा है।
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सिंचित खेती भी रोजगार का बड़ा माध्यम बन रही
उन्होंने युवाओं से अपील की कि खेती में रुचि रखने वाले लोग ज्यादा से ज्यादा उद्यानिकी फसलों को अपनाएं। आज प्रदेश में संतरा, केला, अंगूर, सीताफल, सब्जियां और मसालों के साथ-साथ मखाना, ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, गेंदा और गुलाब जैसी फसलों की खेती भी की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई तकनीक और आधुनिक खेती के तरीकों से किसानों की आय बढ़ रही है और उनकी जिंदगी में बदलाव आ रहा है।
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मध्यप्रदेश में विकास की रफ्तार
उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन नीति-2026 के तहत 7,430 करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही सिंचाई क्षमता को बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मृगनयनी के जरिए प्रदेश के कारीगरों और उनके उत्पादों को दुनिया के बाजार तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, साल 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाने का फैसला किया गया है।
उन्होंने कहा कि अब तक 85 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। आगे हर साल 1 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और बड़े स्तर पर कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
मध्यप्रदेश में विकास की गति को और तेज करते हुए सरकार किसान, कारीगर और युवाओं के लिए बड़े कदम उठा रही है। मत्स्य पालन नीति-2026 के तहत ₹7,430 करोड़ का निवेश, सिंचाई क्षमता को 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य, ‘मृगनयनी’ के माध्यम से उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल… pic.twitter.com/9aaF5QjUkh
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) August 15, 2026
मध्यप्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार को बढ़ावा
उन्होंने बताया कि पिछले ढाई साल में उद्यम पोर्टल पर 3.34 लाख से ज्यादा विनिर्माण इकाइयां रजिस्टर्ड हुई हैं। इससे करीब 33.80 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिले हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में इस समय करीब 8 हजार स्टार्टअप काम कर रहे हैं, जिनमें से आधे यानी 50 प्रतिशत की कमान महिला उद्यमियों के हाथों में है। आने वाले ढाई साल में स्टार्टअप की संख्या 12 हजार से ज्यादा करने और 100 नए इंक्यूबेशन सेंटर शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
मध्यप्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार, कौशल और उद्यमिता के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। विगत ढाई वर्षों में उद्यम पोर्टल पर 3.34 लाख से अधिक विनिर्माण इकाइयां पंजीकृत हुईं, जिससे 33.80 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिले हैं।
प्रदेश में लगभग 8 हजार… pic.twitter.com/VqVfdnUD3J
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AI के इस दौर में मध्यप्रदेश ऑरेंज इकोनॉमी
उन्होंने बताया कि पिछले ढाई साल में प्रदेश को 34 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रस्ताव जमीन पर उतर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी तेजी से निवेश हो रहा है और अब तक 12 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश इस क्षेत्र में साकार हो चुका है।
AI के दौर में प्रदेश ‘ऑरेंज इकॉनमी’ को बढ़ावा दे रहा है। मल्टीमीडिया, गेमिंग, कला, मीडिया, मनोरंजन, संस्कृति और रचनात्मक क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार खोले जा रहे हैं।
पिछले ढाई वर्षों में ₹34 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें ₹10 लाख करोड़ से अधिक… pic.twitter.com/TIRNw0XQKE
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औद्योगिक नीतियों में मध्यप्रदेश बढ़ रहा आगे
उन्होंने बताया कि भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 से प्रदेश में निवेश और रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी 55 जिलों की निर्यात कार्य योजनाएं तैयार कर ली गई हैं, ताकि हर जिला अपने उत्पादों के साथ निर्यात का केंद्र बन सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल, लोकल गोज ग्लोबल के मंत्र के साथ मध्यप्रदेश का लक्ष्य है कि दुनिया में गर्व से कहा जाए- यह मध्यप्रदेश में बना है।
नीति आयोग ने प्रदेश की विभिन्न औद्योगिक नीतियों को सर्वाधिक निवेश-मित्र नीतियों के रूप में सराहा है। भोपाल में Global Investors Summit-2027 का आयोजन प्रदेश में निवेश और रोजगार को नई गति देगा।
प्रदेश के सभी 55 जिलों की निर्यात कार्य योजनाएं तैयार हैं, ताकि हर जिला निर्यात का हब… pic.twitter.com/aU8ra62lcM
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) August 15, 2026
हर क्षेत्र में विकास करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता
उन्होंने बताया कि आवास योजनाओं के तहत पूरे हो चुके घरों की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है। वहीं, जल गंगा संवर्धन अभियान के जरिए प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर बेहतर काम हुआ है, जिसकी देशभर में सराहना हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना करीब 1.25 करोड़ महिलाओं के जीवन में आर्थिक मजबूती और सशक्तिकरण का जरिया बनी है। इसके अलावा लाड़ली लक्ष्मी योजना से प्रदेश की 53.55 लाख से ज्यादा बेटियां जुड़ चुकी हैं।
गांवों का सर्वांगीण विकास सरकार की प्राथमिकता है।
आवास योजनाओं में पूर्ण आवासों की संख्या के आधार पर मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। जल गंगा संवर्धन अभियान ने प्रदेश में जल संरक्षण की नई मिसाल कायम की है और इसका मॉडल देशभर में सराहा गया है।
वहीं मुख्यमंत्री लाड़ली बहना… pic.twitter.com/OSk5bdVdCt
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सांदीपनि विद्यालय अब मध्यप्रदेश की नई पहचान
उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के 73 विश्वविद्यालय और 1,400 से ज्यादा महाविद्यालय 16 लाख से अधिक युवाओं के भविष्य को संवारने का काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह खुशी की बात है कि कॉलेजों में हर 100 छात्रों के मुकाबले 171 बेटियां दाखिला ले रही हैं, जो महिला शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए पिछले 3 महीने में 1,000 नए डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है। आने वाले 6 महीनों में 1,000 और डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी।
सर्वसुविधायुक्त सांदीपनि विद्यालय, अब प्रदेश की पहचान बन गए हैं।
सांदीपनि विद्यालयों के 50 से अधिक विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय मेरिट सूची में स्थान बनाया है। उच्च शिक्षा में 73 विश्वविद्यालय और 1,400 से अधिक महाविद्यालय 16 लाख से अधिक युवाओं के भविष्य को आकार दे रहे हैं। जब… pic.twitter.com/PJkF3F0ZsY
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) August 15, 2026
प्रदेश में खुलेंगे नए मेडिकल कॉलेज
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 8 नए आयुर्वेदिक कॉलेजों का निर्माण भी शुरू हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई साल में 23 हजार करोड़ रुपए की लागत से 15 हजार किलोमीटर से ज्यादा सड़कों का निर्माण, सुधार और मजबूतीकरण किया गया है।
उन्होंने बताया कि भोपाल और इंदौर में मेट्रोपॉलिटन रीजन के विकास के साथ अब जबलपुर और ग्वालियर को भी इसी तरह विकसित करने की योजना है। वहीं, सिंहस्थ-2028 के भव्य आयोजन की तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं।
पूरे प्रदेश में बेहतर चिकित्सा सेवाओं के लिये निरंतर नये मेडिकल कॉलेज खुल रहें हैं। इसमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त हो सके, इसके लिये एक और चिकित्सा विश्वविद्यालय खोले जाने का निर्णय लिया है। इस तरह से प्रदेश में अब 2 चिकित्सा विश्… pic.twitter.com/km5w4HXkLw
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बिजली गुल वाले प्रदेश में बिजली फुल
उन्होंने बताया कि पिछले रबी सीजन में करीब 20 हजार मेगावाट और इस बार 21 हजार मेगावाट से ज्यादा बिजली की मांग पूरी कर प्रदेश ने नया रिकॉर्ड बनाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की कुल बिजली क्षमता में 30 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन एनर्जी का है, जिसे आने वाले समय में बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि नर्मदापुरम में देश का पहला रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण निर्माण क्षेत्र, मक्सी में सोलर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और मुरैना में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट विकसित किए जा रहे हैं।
इसके साथ ही बड़े शहरों में 550 से ज्यादा ई-बसें चल रही हैं और भोपाल-इंदौर में मेट्रो कनेक्टिविटी से प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।
मध्यप्रदेश अब ‘’बिजली गुल’’ के पुराने दौर से बाहर निकलकर ‘’बिजली फुल’’ के युग में पहुंच गया है। बीते रबी सीजन में करीब 20 हजार मेगावाट और इस बार 21 हजार मेगावाट से अधिक बिजली की मांग की आपूर्ति कर प्रदेश ने नया रिकॉर्ड बनाया है।
प्रदेश की विद्युत क्षमता में 30% हिस्सा ग्रीन… pic.twitter.com/56Gmod4pPN
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