एक और चौंकाने वाली जांच रिपोर्ट- नर्मदा जल, टैंकर और अब 516 बोरिंग में भी दूषित पानी

भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों के बाद प्रशासन ने 516 बोरिंग बंद कराए। इनमें 400 निजी और 116 सरकारी बोरिंग शामिल हैं। जल संकट के कारण अब लोग RO लगवा रहे हैं।

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Rahul Dave
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Indore. भागीरथपुरा में नर्मदा जल जानलेवा निकलने और टैंकरों का पानी भी पीने योग्य नहीं है। अब इसके बाद एक और चौंकाने वाली जांच रिपोर्ट ने सबकी नींद उड़ा दी है। दरअसल जो जांच रिपोर्ट आई है उसमें 516 बोरिंग का पानी पीने योग्य नहीं है। इसके बाद इन बोरिंग का पानी उपयोग करने पर रोक लगा दी गई है। 

400 निजी, 116 सरकार बोरिंग  

भागीरथपुरा कांड के बाद जब प्रशासन ने बोरिंग के पानी की जांच करवाई, तो हालात और भयावह सामने आए। शहर के विभिन्न इलाकों से लिए गए सैंपल में 35 बोरिंग फेल हो गए।

जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने 516 बोरिंग के पानी के उपयोग पर रोक लगा दी है। इनमें 400 निजी और 116 सरकारी बोरिंग शामिल हैं। साफ शब्दों में कहें तो इनका पानी पीने योग्य नहीं माना गया है।

कर्मचारियों की कमी, लैब पर सवाल

4 जनवरी रविवार को नगर निगम ने 112 पानी की टंकियों, नलों और बोरिंग के सैंपल एकत्र किए गए हैं। अब इन्हें निजी लैब में जांच के लिए भेजा गया है। निगम की अपनी लैब मौजूद होने के बावजूद वहां कर्मचारियों की कमी सामने आई है, जिस पर भी सवाल उठने लगे हैं।

बढ़ी आरओ की डिमांड

आरओ सप्लायरों के अनुसार, भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों से लगातार इन्क्वायरी कॉल आ रहे हैं। लोगों में यह डर बैठ गया है कि अगर अब भी सावधानी नहीं बरती, तो अगला नंबर किसी और का हो सकता है।

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आरओ लगवाने की मची होड़

इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई 17 मौतों ने शहर की जल-व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अब लोग न तो नर्मदा जल पर भरोसा कर पा रहे हैं और न ही टैंकरों से आने वाले पानी पर।

डर का आलम यह है कि पूरे इलाके में आरओ लगाने की होड़ मच गई है। कई परिवार मजबूरी में किस्तों पर आरओ खरीद रहे हैं, ताकि अपने बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित रख सकें।

इलाके में डर, पानी उबालकर भी नहीं पी रहे

दूषित जल से मौत के बाद भागीरथपुरा में हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। लोग नर्मदा जल भरने से बच रहे हैं। कई परिवारों ने बोरिंग का पानी तक इस्तेमाल करना बंद कर दिया है।

कुछ लोग मजबूरी में पानी लेते भी हैं, वे उसे छानकर और उबालकर उपयोग कर रहे हैं। चाय से लेकर नाश्ते तक, दुकानों पर बोतलबंद पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

रहवासियों की मजबूरी

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि हालात ने उन्हें आर्थिक रूप से भी तोड़ दिया है। कोई 10-12 हजार रुपए खर्च कर आरओ लगवा रहा है, तो कोई किस्तों का सहारा ले रहा है। कई परिवारों में बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ चुके हैं, जिसके बाद आरओ लगवाना मजबूरी बन गया है। 

जांच में मिला कोलिफार्म बैक्टीरिया

अलग-अलग स्थानों पर बोरिंग के पानी से जो सैंपल लिए गए हैं। उन सैंपल की माइक्रोबायोलॉजी लैब में जांच कराई गई, जिसमें बोरिंग के पानी में कोलिफार्म बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली है। यह एक हानिकारक बैक्टीरिया माना जाता है। 

यह पानी के साथ शरीर के अंदर जाने पर जानलेवा साबित हो सकता है। कहीं पर बोरिंग के पानी में ई-कोलाई, शिगेला आदि बैक्टीरिया भी मिला है। भागीरथपुरा में दूषित पानी की सप्लाई

बोरिंगों पर लगाए रेड निशान 

बोरिंगों का पानी दूषित होने की पुष्टि के बाद इनके पानी का कोई उपयोग न करे। इसे लेकर इन पर रेड निशान यानि खतरे के निशान लगा दिए गए है। साथ ही रहवासियों को समझाइश दी जा ही है। ये पानी पीने में बिल्कुल भी उपयोग में न लें।

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