इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज 500 करोड़ की जमीन पर संभागायुक्त की चेतावनी के बाद भी अपर आयुक्त भटनागर ने दिया स्टे

इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज की 500 करोड़ की जमीन पर प्रशासनिक विवाद तेज हो गया है। संभागायुक्त सुदाम पी खाड़े की चेतावनी के बावजूद अपर आयुक्त ने इस मामले पर स्टे जारी कर दिया है। अब मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बावजूद नई मुसीबत में फंस चुका है।

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Sanjay Gupta
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INDORE. इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज की 500 करोड़ की जमीन के मामले में जिला प्रशासन की अहम कार्रवाई में संभागायुक्त कार्यालय ने सेंध मार दी है। अपर आयुक्त तरूण भटनागर ने इस मामले में प्रक्रिया पर ही स्टे दे दिया है। साथ ही, यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दे दिया है।

इस पूरे मामले में लंबे समय से कई लाइजनर जमीन बचाने के लिए जुटे हुए थे। ऐसे में इस आदेश पर सवाल खड़े हो गए हैं। जबकि याचिकाकर्ता कॉलेज प्रबंधक प्रिंसिपल अमित डेविड सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में भी हार चुके हैं।

संभागायुक्त ने दी थी चेतावनी

इस मामले में द सूत्र को मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार यह गंभीर और बड़ा मामला था। जब यह अपील संभागायुक्त कार्यालय में आई, तो संभागायुक्त सुदाम पी खाड़े ने अपर आयुक्त को चेतावनी दी।

उन्होंने कहा कि इस मामले में नियमों का पालन किया जाए। साथ ही शासन के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाए। उन्होंने इस बात पर विशेष ध्यान देने को कहा था। वहीं, इन नसीहत/चेतावनी को ताक पर रखते हुए अपर आयुक्त आईएएस भटनागर ने आदेश जारी कर दिया है।

इस तरह का हुआ आदेश

कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस मामले में सख्त स्टैंड लिया था। सरकारी जमीन को अपने पास लाने के लिए यह अहम कदम था। एसडीएम जूनी इंदौर प्रदीप सोनी ने इसमें जांच कर सालों के दस्तावेज खंगालकर पूरी रिपोर्ट दी।

कलेक्टर कोर्ट में केस हुआ था। इस दौरान प्रिंसिपल अमित डेविड हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए और हर जगह आवेदन खारिज हुआ था। फिर कलेक्टर कोर्ट में सुनवाई हुई, इसमें प्रतिपरीक्षण की धारा 32 के तहत आवेदन लगाया गया था। इसे कलेक्टर ने खारिज कर दिया था।

इस धारा के तहत आवेदक कहता है कि वह इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है और यह सही नहीं है। जब इस धारा का आवेदन खारिज हुआ तो अपील अपर आयुक्त तरूण भटनागर के पास संभागायुक्त कार्यालय में हुई। वहां से स्टे दे दिया गया है।

कलेक्टर कोर्ट के आदेश के पहले ही स्टे

कलेक्टर कोर्ट ने इस मामले में आदेश 12 जनवरी की तारीख में जारी किया था। हालांकि आदेश इसके कुछ दिन बाद सामने आया। इसी दौरान 21 जनवरी को ही अपर आयुक्त ने इसमें स्टे जारी कर दिया था।

आदेश में कहा गया कि तर्कों व साक्ष्य के प्रतिपरीक्षण का अधिकार आवेदक का बनता है और नियमों के अनुसार होना चाहिए। ऐसे में 26 दिसंबर को कलेक्टर कोर्ट के जरिए दिए गए आदेश पर स्टे दिया जाता है और यथास्थिति के आदेश किए जाते हैं। अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी।

आदेश से भोपाल तक हिली सरकार

इस आदेश की जानकारी कलेक्टर कार्यालय को भी एक दिन पहले ही हुई, जब कॉलेज प्रबंधन ने प्रशासन को सूचना दी कि उन्हें स्टे मिल गया है। इस आदेश के बाद इंदौर से भोपाल तक हड़कंप मच गया है।

अब भोपाल तक पूरी जानकारी दी जा रही है कि यह आदेश क्यों और कैसे हुआ है? जबकि इस मामले में हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी थी। इसमें साफ कहा था कि नियमानुसार उपलब्ध अपील अधिकारों का उपयोग कीजिए। अभी नोटिस और सुनवाई पर स्टे नहीं दे सकते। वहीं, इधर अपर आयुक्त ने स्टे दे दिया है।

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