इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज की 500 करोड़ की जमीन सरकारी घोषित, कलेक्टर कोर्ट का फैसला, 3 दिन छुट्टी, अब राहत नहीं

इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज की 500 करोड़ की जमीन को कलेक्टर कोर्ट ने सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया है। जमीन के अनुदान की शर्तों के उल्लंघन पर यह निर्णय लिया गया।

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Sanjay Gupta
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News in Short

  • इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज की 500 करोड़ की जमीन को सरकारी घोषित किया गया।
  • कलेक्टर कोर्ट ने कॉलेज के प्रबंधन की याचिका खारिज कर आदेश जारी किया।
  • कॉलेज की भूमि महारानी होलकर द्वारा शर्तों के तहत दी गई थी, जो अब उल्लंघित हो चुकी हैं।
  • कॉलेज ने जमीन पर व्यावसायिक नक्शा पास कराया और बिल्डरों को जमीन बेची।
  • अब कॉलेज प्रबंधन इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रहा है।

News in Detail

इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज की 500 करोड़ की जमीन को सरकारी घोषित कर दिया गया है। इस मामले में कलेक्टर कोर्ट (Collector Court ) में तीन माह से सुनवाई चल रही थी। प्रबंधन ने हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक याचिका दाखिल की। 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट से उनकी याचिका खारिज होने के बाद अब कलेक्टर शिवम वर्मा की कोर्ट ने औपचारिक आदेश जारी किया है।

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कलेक्टर कोर्ट ने यह दिया आदेश

सभी तर्कों को सुनने के बाद यह प्रमाणित होता है कि यह भूमि महारानी भागीरथी बाई होलकर की शर्तों के साथ अनुदान पर मिशनरी को दी गई थी। वर्तमान में मिशनरी अस्तित्व में नहीं है व मौके पर महिला अस्पताल संचालित नहीं है। कॉलेज भी सीमित दायरे में फीस भुगतान पर मिशन के अतिरिक्त अन्य संस्था द्वारा संचालित किया जा रहा है। 

कॉलेज प्रिंसिपल अमित डेविड द्वारा पेश टीएंडसीपी से साबित होता है कि संस्था मूल उद्देश्य से भटक चुकी है। ऐसे में अनुदान पर दी गई शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है। ऐसे में भूमि का अनुदान निरस्त किया जाता है। यह भूमि सर्वे नंबर 4071/1669/3 की रकबा 1.702 हेक्टेयर शासन हित में समाहित की जाती है। साथ ही तहसीलदार को आदेश दिया जाता है कि मौके पर शासन हित में कब्जा लेकर तीन दिन में प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। 

Collector Court

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तीन दिन छुट्टी अब जमीन गई हाथ से 

कलेक्टर कोर्ट से यह फैसला शुक्रवार 23 जनवरी को जारी हुआ है। अब तीन दिन तक सरकारी छुट्टी है। ऐसे में कॉलेज प्रबंधन के पास यह विकल्प नहीं बचा है कि वह तत्काल कोर्ट जाकर जमीन को कब्जे से रोकने के लिए स्टे प्राप्त कर सके। 

अब जब तक स्टे मिलेगा भी तो जमीन प्रशासन के पास कब्जे में होगी। ज्यादा से ज्यादा यथास्थिति का आदेश होगा। आगे कार्रवाई पर रोक मिल सकती है। लेकिन जब तक यह जमीन प्रशासन के कब्जे में हो चुकी होगी, जैसे कि भंडारी मिल के मामले में हुआ था। इसमें डॉ. कांति बम को तगड़ा झटका लगा था। 

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कलेक्टर के नोटिस के खिलाफ जा चुके कोर्ट

कलेक्टर ने इंदौर क्रिश्चन कॉलेज की जमीन को सरकारी घोषित करने के लिए प्रबंधन को नोटिस दिया था। इसके साथ ही टीएंडसीपी को भी आदेश दिए थे कि इस जमीन को लेकर कोई भी नक्शा पास नहीं किया जाए।

इस नोटिस के खिलाफ कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट ने अपील की थी। इसमें हाईकोर्ट ने नोटिस पर रोक लगाने से यह कहते हुए इंकार किया था कि अभी कलेक्टर कोर्ट में केस है और याचिकाकर्ता को वहां जवाब देने का अवसर है। इसके बाद कॉलेज सुप्रीम कोर्ट गया था।

यहां भी सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर हस्तक्षेप से इंकार कर दिया। हालांकि, यह कहा है कि हाईकोर्ट में आदेश दिए गए थे। उसी परिप्रेक्ष्य में उचित प्राधिकारी द्वारा विधि के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। अब आदेश हो गया है। निश्चित ही कॉलेज प्रबंधन इस आदेश के खिलाफ फिर हाईकोर्ट जाएगा। 

क्या कर रहा था कॉलेज खेल

कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर अमित डेविड इंदौर के इंदौर कस्बा सर्वे नंबर 407/1669/3  कुल 68.303 हेक्टेयर में से 1.702 हेक्टेयर पर बने क्रिश्चियन कॉलेज भूमि पर लंबे समय से नक्शा पास कराने में जुटे हुए हैं। यह नक्शा यहां पर व्यावसायिक ऑफिस, दुकान बनाने का है।  

इन शर्तों पर मिली थी जमीन

कलेक्टर ने जांच रिपोर्ट के आधार पर पाया था कि दस्तावेज दानपत्र, हिस्ट्री ऑफ UNCI आदि में है कि यह भूमि महाराजा होलकर द्वारा 1 दिसंबर 1887 को कुछ शर्तों के साथ बिना रेंट अनुदान के दी गई।

शर्तों के तहत भूमि उपयोग केवल विद्यालय व महिला अस्पताल के लिए किए जाने का प्रावधान था। जब तक यह उपयोग होगा मिशन द्वारा उपयोग किया जाता रहेगा। समाप्त होने पर भूमि वापस महारानी या उसके उत्तराधिकारी द्वारा ली जा सकेगी। कलेक्टर की जांच में आया कि यहां महिला अस्पताल नहीं है। कॉलेज भी समाप्ति की ओर है, ऐसे में संस्था का मूल उद्देश्य खत्म हो चुका है।

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कॉलेज कई बिल्डर को बेच चुका जमीन

मामले में यह भी चौंकाने वाली बात है कि जब एक बार टीएडंसीपी ने इस जमीन पर कमर्शियल नक्शा पास कर दिया था। तब प्रबंधन ने कई बिल्डर से सौदा कर जमीन बेच दी थी। इसमें बाजार से करोड़ों रुपए उठा लिए थे। जिसके लिए कई बिल्डर भी शिकायत के लिए तैयार बैठे हैं।

ऐसे में प्रिंसिपल डेविड मुश्किल में आ गए हैं, कारण है कि यह जमीन सरकारी घोषित हो चुकी है। ऐसे में सरकारी जमीन का सौदा करना सरासर चार सौ बीसी है। ऐसे में अब उन पर यह केस भी दायर हो सकते हैं।

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