इंदौर ED की शाहरा के रूचि ग्रुप पर बड़ी कार्रवाई, 10.15 करोड़ की प्रापर्टी अटैच

ईडी ने इंदौर की शाहरा के रुचि ग्रुप की 10.15 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की। यह कार्रवाई 58 करोड़ रुपए के बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में की गई है।

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Sanjay Gupta
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Indore ED big action against Shahras interest group

Photograph: (the sootr)

indore. इंदौर ईडी (ED) ने शाहरा परिवार के रुचि ग्रुप को जोर का झटका दिया है। ईडी ने द मेसर्स रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (नया नाम मेसर्स स्टीलटेक रिसोर्सेज लिमिटेड) की 10.15 करोड़ की प्रापर्टी अटैच की है। मामला दिवंगत कैलाश चंद शाहरा और उनके पुत्र उमेश शाहरा के ग्रुप द्वारा 58 करोड़ के बैंक लोन धोखाधड़ी का है। 

कंपनी की जमीन को किया अटैच

ईडी इंदौर ने सीबीआई में दर्ज एफआईआर के आधार पर यह केस मनी लॉण्ड्रिंग एक्ट में दर्ज किया था। जांच के बाद ईडी ने कंपनी की 10 करोड़ 15 लाख कीमत की जमीन को अटैच किया है। इसके पहले ईडी ने दिसंबर 2025 में कंपनी के डायरेक्टर उमेश शाहरा व अन्य के घर, दफ्तर पर छापे मारे थे।

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58 करोड़ का लोन घोटाला

सीबीआई भोपाल ने मेसर्स रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (अब मेसर्स स्टीलटेक रिसोर्सेज लिमिटेड के नाम से जानी जाती है) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी) और आईपीसी धारा 120-बी के साथ धारा 420 में केस किया था। ईडी ने इसे पीएमएलए के तहत इसे लिया और जांच की।

कंपनी पर यूको बैंक, इंदौर को कथित तौर पर धोखा देने और 58 करोड़ रुपए से अधिक की लोन राशि का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। कंपनी ने बेईमानी से अपने समूह की कंपनियों में निवेश बताकर व कंपनियों को राशि देना बताकर यह गबन किया। सीबीआई ने उमेश शाहरा, साकेत भदौरिया और आशुतोष मिश्रा को आरोपित बनाया था।

इस तरह लोन की हेराफेरी हुई

ईडी की जांच से पता चला कि जाली, मनगढ़ंत दस्तावेजों के आधार पर, बिना किसी वास्तविक लेन-देन के, बेईमानी से ऋण सुविधाएं और साख पत्र बैंक से प्राप्त किए गए थे। इनसे प्राप्त धनराशि को जानबूझकर एक ही स्वामित्व और नियंत्रण वाली परस्पर जुड़ी विविध कंपनियों के नेटवर्क में पहुंचाया गया। फिर इस राशि को निकाल लिया गया। इसक उपयोग अन्य काम में और संपत्तियां बनाने में किया गया। 

ईडी ने मारे थे छापे

ईडी ने इसी मामले में 23 दिसंबर को इंदौर और मुंबई में छापेमारी की थी। यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत की गई। ईडी के अनुसार, कंपनियों के प्रमोटर स्वर्गीय कैलाश चंद्र शाहरा और उमेश शाहरा पर बैंकों से लिए कर्ज की रकम डायवर्ट करने और शेल कंपनियों के जरिए सायफन करने का आरोप है।

फर्जी लेटर ऑफ क्रेडिट, कैश क्रेडिट ट्रांजैक्शन और नकली बिक्री-खरीद के जरिए लोन का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। छापेमारी में आरोपियों और परिजनों के 20 लाख से अधिक बैंक बैलेंस फ्रीज किए गए, 23 लाख रुपए से अधिक नकदी जब्त हुई थी।

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