इंदौर EOW ने 2.56 करोड़ के घोटाले में मनीष और नेहा तांबी, बैंक प्रबंधक, पैनल वकील पर किया केस

इंदौर EOW ने 2.56 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में FIR दर्ज की। तांबी दंपती ने एक फ्लैट को बंधक बनाकर लोन लिया। यह लोन एक गैर-मौजूद यूनिट के लिए था।

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Sanjay Gupta
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Indore. EOW इंदौर ने नए साल की शुरूआत फिर धोखाधड़ी के केस में FIR दर्ज करके की है। केनरा बैंक शाखा नवलखा में 2 करोड़ 56 लाख रुपए की धोखाधड़ी हुई। मेसर्स लक्ष्य इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग के प्रोप्राइटर, शाखा प्रबंधक और पैनल एडवोकेट पर FIR दर्ज की गई है।

तांबी दंपती ने पहले से बिक चुके फ्लैट को बंधक बताकर लोन लिया। लोन भी उस व्यावसायिक यूनिट के लिए लिया गया जो अस्तित्व में नहीं थी। इसमें तत्कालीन बैंक प्रबंधक और पैनल वकील की भी मिलीभगत थी। 

इन आरोपियों पर किया गया केस... 

1.  नेहा तांबी मेसर्स लक्ष्य इक्युपमेंट एण्ड इंजिनियरिंग (प्रोपराइटर)
2. मनीषी तांबी पिता भूपेन्द्र ताम्बी (ग्यारान्तर)
3. पवन कुमार झा (तात्कालीन मुख्य प्रबंधक)
4.  विकास कुमार वर्मा (पैनल एडवोकेट)

इनके खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 120B और भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2013 की धारा 7(C) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

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आरोपियों ने बिकी संपत्ति को ही रखवा दिया बंधक

EOW की जांच में पता चला कि नेहा और मनीष तांबी ने बैंक में लोन के लिए ऐसी संपत्ति बंधक रखी, जिसे वे पहले ही बेच चुके थे। इस तरह कैनरा बैंक शाखा नवलखा को 2 करोड़ 56 लाख रुपए की धोखाधड़ी कर क्षति पहुंचा गई। इसके लिए तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार झा ने स्थल निरीक्षण की गलत रिपोर्ट दी। 

रिपोर्ट में संपत्ति को विवादरहित एवं औ‌द्योगिक यूनिट को संचालित होना बताया गया। बैंक के सर्च एडवोकेट विकास कुमार वर्मा ने लीगल स्क्रूटनी रिपोर्ट में तथ्यों को छुपाकर उक्त संपत्ति को वैध और बंधक योग्य बताया। इसके बाद लोन की राशि मेसर्स ब्लू चिप इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग प्रा.लि. के खाते में राशि स्थानांतरित की गई। इसमें मनीष ताम्बी डायरेक्टर हैं। इस प्रकार फंड का डायवर्जन किया गया।

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जांच के दौरान यह भी पाया गया

जांच में पाया गया कि नेहा तांबी ने 3 अक्टूबर 2020 को 1.70 करोड़ की सीसी लिमिट के लिए आवेदन किया था। वे मेसर्स लक्ष्य इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग की प्रोप्राइटर हैं। यह आवेदन विनिर्माण इकाई प्लॉट क्रमांक 311, इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर, पीथमपुर, जिला धार में शीट मेटल कार्यों के लिए था।

इसके लिए फ्लैट 402 क्लासिक क्राउन, 5/2 ओल्ड पलासिया की रजिस्ट्री बंधक रखी गई। शाखा प्रबंधक और पैनल अधिवक्ता विकास वर्मा ने इसे बंधक योग्य बताया। हालांकि, यह संपत्ति (फ्लैट) 2007 में बिक चुकी थी। यह संपत्ति पहले से बैंक ऑफ इंडिया, कंचन बाग शाखा में बंधक होकर एनपीए घोषित हो चुकी थी और सीज कर दी गई थी। इसके बावजूद उसी संपत्ति के कूट-रचित दस्तावेजों का उपयोग कर केनरा बैंक से ऋण प्राप्त किया गया।

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जिस यूनिट के लिए लोन बताया, वह है ही नहीं

जांच में यह पाया गया कि जिस व्यवसायिक यूनिट के लिए लोन लेना बताया वह तो अस्तित्व में है ही नहीं है। इसके बाद भी ओसीसी खाते से संदिग्ध लेन-देन कर ऋण राशि का डायवर्जन किया गया है। मेसर्स लक्ष्य इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग के खाते से मेसर्स ब्लू चिप इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग प्रा.लि. के खाते में राशि स्थानांतरित की गई। इसमें मनीष तांबी डायरेक्टर हैं तथा दोनों फर्मों का व्यवसायिक पता समान पाया गया।

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