इंदौर IDA में फर्जी NOC का खुलासा, अधिकारियों के फर्जी साइन किए, शक होने पर बाबू फरार
Aman Vaishnav | Apr 16, 2026, 10:44 IST
indore ida fake noc mamla
इंदौर विकास प्राधिकरण में जमीन की फर्जी NOC का खेल पकड़ा गया है। जालसाजों ने अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर भी किए। अधिकारियों को एक बाबू पर शक है क्योंकि जब से मामला सामने आया है बाबू उसी दिन से बिना सूचना के ऑफिस नहीं आया है। उसका फोन भी बंद है।
इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) में जमीन के एनओसी को लेकर एक बड़ा रैकेट सामने आया है। इसमें प्राधिकरण के एक कर्मचारी का नाम सामने आया है, जो खुद ही अधिकारियों के साइन करके एनओसी जारी करता था।
इसके बाद इन एनओसी को नक्शा मंजूरी के लिए टीएनसीपी में भेजा जाता था।
यह खुलासा टीएनसीपी अधिकारियों की जांच में हुआ। अब आईडीए अधिकारियों को शक है कि विधि विभाग का बाबू शुभम श्रीवास्तव इस पूरे रैकेट में शामिल हो सकता है।
ऐसा इसलिए क्योंकि जिस दिन से यह मामला सामने आया, शुभम श्रीवास्तव उस दिन से बिना सूचना के ऑफिस नहीं आया है। उसका फोन भी बंद है और वह घर से भी लापता है।
यह मामला योजना 97 पार्ट 4, बिजलपुर की जमीन का है, जो करीब 20 हजार वर्गफुट से ज्यादा आईडीए की योजना में शामिल है। हाल ही में जमीन मालिक ने टीएनसीपी के पास ले-आउट स्वीकृति के लिए आवेदन किया था।
जब दस्तावेजों की जांच की गई तो पता चला कि आईडीए से जारी की गई एनओसी और उस पर किए गए साइन में अंतर है।
यह एनओसी प्लानिंग और भू-अर्जन दोनों विभागों से जारी की गई थी। जब टीएनसीपी अधिकारियों को शक हुआ, तो उन्होंने आईडीए अधिकारियों से संपर्क किया। इसके बाद पता चला कि आईडीए से ऐसी कोई एनओसी जारी ही नहीं की गई है।
टीएनसीपी अधिकारी शुभाशीष बनर्जी ने बताया कि, हमारे पास उस जमीन का नक्शा मंजूरी के लिए फाइल आई थी। जब हमने एनओसी मांगी तो उसमें बताया गया कि यह जमीन आईडीए की स्कीम में नहीं है।
एनओसी पर कुछ साइन ऐसे थे जो हमें गलत लगे। फिर हमने फोन करके पूछा कि क्या जमीन की एनओसी हमारे पास आई है।
इस पर आईडीए अधिकारी ने बताया कि हमारी तरफ से ऐसी कोई एनओसी जारी नहीं की गई थी। जब हमें यह बात पता चली तो हमने उसे कैंसिल कर दिया।
4-5 दिन पहले फिर वही फाइल हमारे पास आई तब हमें फिर शक हुआ। हमने आईडीए को एनओसी की फोटो कॉपी भेजकर पूछा कि क्या यह उनके यहां से जारी हुई है या नहीं। इस पर आईडीए ने फिर से एनओसी जारी करने से मना कर दिया।
भू-अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा ने बताया कि हमारे सामने नकली साइन करके फर्जी एनओसी बनाने का मामला आया है। मेरे साइन भी नकली बनाकर फर्जी एनओसी बनाई गई है। इससे पहले कंट्री प्लानिंग के अधिकारी के साइन भी किए गए थे।
आईडीए सीईओ परीक्षित झाड़े ने कहा कि शुरुआत में मामले की जांच की जा रही है। जिस योजना का यह मामला है, उसके बारे में प्राधिकरण ने पहले विभाग से एनओसी की पुष्टि करने के बाद ही ले-आउट स्वीकृत करने को कहा था।
फर्जी एनओसी की शिकायतों को देखते हुए अब पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जा रहा है। विभागीय जांच के बाद इसके बाद की कार्रवाई की जाएगी।
इस खुलासे के बाद अब प्राधिकरण प्रशासन पुराने एनओसी की फाइलों को भी खंगालने की योजना बना रहा है। जानकारी के अनुसार यह रैकेट पिछले एक साल से चल रहा है। इसमें शामिल लोग जमीन की कीमत के हिसाब से रेट तय कर एनओसी बनाते थे।
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इसके बाद इन एनओसी को नक्शा मंजूरी के लिए टीएनसीपी में भेजा जाता था।
यह खुलासा टीएनसीपी अधिकारियों की जांच में हुआ। अब आईडीए अधिकारियों को शक है कि विधि विभाग का बाबू शुभम श्रीवास्तव इस पूरे रैकेट में शामिल हो सकता है।
ऐसा इसलिए क्योंकि जिस दिन से यह मामला सामने आया, शुभम श्रीवास्तव उस दिन से बिना सूचना के ऑफिस नहीं आया है। उसका फोन भी बंद है और वह घर से भी लापता है।
मामला जमीन से जुड़ा, साइन में अंतर
जब दस्तावेजों की जांच की गई तो पता चला कि आईडीए से जारी की गई एनओसी और उस पर किए गए साइन में अंतर है।
यह एनओसी प्लानिंग और भू-अर्जन दोनों विभागों से जारी की गई थी। जब टीएनसीपी अधिकारियों को शक हुआ, तो उन्होंने आईडीए अधिकारियों से संपर्क किया। इसके बाद पता चला कि आईडीए से ऐसी कोई एनओसी जारी ही नहीं की गई है।
दोबारा फाइल आने पर हुआ शक
एनओसी पर कुछ साइन ऐसे थे जो हमें गलत लगे। फिर हमने फोन करके पूछा कि क्या जमीन की एनओसी हमारे पास आई है।
इस पर आईडीए अधिकारी ने बताया कि हमारी तरफ से ऐसी कोई एनओसी जारी नहीं की गई थी। जब हमें यह बात पता चली तो हमने उसे कैंसिल कर दिया।
4-5 दिन पहले फिर वही फाइल हमारे पास आई तब हमें फिर शक हुआ। हमने आईडीए को एनओसी की फोटो कॉपी भेजकर पूछा कि क्या यह उनके यहां से जारी हुई है या नहीं। इस पर आईडीए ने फिर से एनओसी जारी करने से मना कर दिया।
नकली साइन करके फर्जी एनओसी
भू-अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा ने कहा कि दो महीने के अंदर ही ऐसे दो मामले हमारे पास टीएनसीपी से आए हैं। हम अभी यह जांच कर रहे हैं कि इसमें कौन लोग शामिल हैं। ये लोग प्राधिकरण के हैं, बाहर के हैं, या हमारे ही यहां के हैं। अगर कोई भी इसमें शामिल पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
शिकायतों को देखते हुए प्रक्रिया हुई ऑनलाइन
फर्जी एनओसी की शिकायतों को देखते हुए अब पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जा रहा है। विभागीय जांच के बाद इसके बाद की कार्रवाई की जाएगी।
पिछले एक साल से चल रहा रैकेट
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