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INDORE. मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की विधानसभा इंदौर-1 के वॉर्ड 11 में भागीरथपुरा कांड हुआ था। इसमें अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 459 लोग अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं।
इस हादसे में यह भी सामने आया था कि क्षेत्र में बोरिंग का पानी भी दूषित था। वहीं, 10 जनवरी को रेसीडेंसी कोठी में एक बैठक का आयोजन किया गया था।
इस दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि उन्होंने कलेक्टर से कहा है कि वह नई बोरिंग को किसी भी हाल में मंजूरी न दें।
उन्होंने कहा था कि बोरिंग के बारे में हमें विचार करना होगा। क्योंकि नई बोरिंग के कारण हमें अब पानी की समस्या का सामना करना पड़ा है। इसलिए कलेक्टर से हमने कहा है कि नई बोरिंग की मंजूरी बिल्कुल भी नहीं दी जाए।
बेटे आकाश बोले: हर वॉर्ड में बोरिंग के लिए देंगे 8 लाख
वहीं, रविवार, 01 मार्च को विधानसभा 1 के वॉर्ड 12 में जनसंवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें पानी की समस्या का मुद्दा उठाया गया था।
यादव नंद नगर में पेयजल समस्या पर आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि अधिकारियों ने आगामी दो महीने में नर्मदा लाइन डालने की बात कही है। यदि दो महीने में नर्मदा लाइन नहीं डलती है तो वे जल संकट के समाधान के लिए यहां पर बोरवेल करवा देंगे।
साथ ही उन्होंने कहा कि हर वॉर्ड में विधायक निधि से बोरिंग के लिए 7-8 लाख रुपए दिए जाएंगे। गंगा नगर में पेयजल संकट को देखते हुए एक बोरिंग की भी तत्परता से मंजूरी दी गई है।
पूर्व विधायक यहीं नहीं रुके, चेतावनी भी दी
आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि वह एक महीने बाद फिर से क्षेत्र का दौरा करेंगे। यदि उस समय तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वह संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करेंगे।
अधिकारियों से उन्होंने कहा कि वे ऑफिस से समय निकालकर क्षेत्र का दौरा करें। साथ ही, लोगों की समस्याओं को समझकर उनका समाधान करें।
इस पर भी सवाल उठ रहा है कि वे किस संवैधानिक हैसियत से अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करेंगे। इससे पहले भी आकाश विजयवर्गीय रेसीडेंसी में अधिकारियों की बैठक लेकर विवादों में आ चुके हैं।
Sootr Knowledge
जानें क्या है इंदौर का भागीरथपुरा कांड?
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 के आखिरी दिनों में दूषित पानी की वजह से एक बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया। दरअसल, नर्मदा जल की पाइपलाइन में सीवेज और ड्रेनेज लाइन का पानी मिल गया था।
इससे फीकल कोलिफॉर्म और ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया फैल गए। इसके अलावा, इलाके के बोरवेल का गंदा पानी नर्मदा की पाइपलाइन में घुसकर पीने के पानी को जहरीला बना रहा था।
इस वजह से उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां फैल गईं, और 3500 से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए। इसे भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के मुख्य कारण के तौर पर बताया जा रहा है।
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