इंदौर नगर निगम में छह आईएएस, लेकिन काम क्या हो रहा? नामांतरण घोटाला, अवैध होर्डिंग्स, सड़कें धंस रही
Sanjay Gupta | Sept 24, 2026, 13:58 IST
इंदौर नगर निगम में 6 आईएएस अफसरों की फौज
मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन ने इंदौर नगर निगम में एक-दो नहीं पूरे 6-6 आईएएस अधिकारियों की फौज लगा दी है। लेकिन इसके बाद भी शहर में काम क्या हो रहा है, अब आम व्यक्ति का सवाल यही है।
मध्यप्रदेश के सबसे बड़े नगर निगम में एक समय एक भी आईएएस नहीं होता था, लेकिन अब छह आईएएस की फौज खड़ी है। लेकिन इसके बाद भी निगम का काम और अधिकारियों की उपस्थिति दोनों ही शहर में दर्ज नहीं हो रही हैं। अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर सीएम डॉ. मोहन यादव के प्रभार वाले जिले में इतने अधिकारी कर क्या रहे हैं।
इंदौर निगमायुक्त- आईएएस क्षितिज सिंघल बैच 2014
अपर आयुक्त- आईएएस आकाश सिंह बैच 2019
अपर आयुक्त- आईएएस प्रखर सिंह बैच 2020
अपर आयुक्त- आईएएस अर्थ जैन बैच 2021
अपर आयुक्त- आईएएस आशीष बैच 2022
अपर आयुक्त- आईएएस आशीष पाठक प्रमोटी आईएएस बैच 2020
(इसके अलावा अपर आयुक्त पद पर शृंगार श्रीवास्तव, मनोज पाठक और देवधर दरवाई व अभय राजनगांवकर भी पदस्थ हैं)
निगमायुक्त के तौर पर सिंघल प्रशासनिक मुखिया हैं और उनके निर्देशन में ही सभी काम चलते हैं। वहीं अपर आयुक्त आकाश सिंह के पास रिमूवल, मार्केट, रेवेन्यू है। प्रखर के पास बिल्डिंग परमिशन व स्वच्छ भारत मिशन, अर्थ जैन के पास सिटी बस सीईओ और स्मार्ट सिटी सीईओ के साथ पीएम आवास योजना, आशीष के पास ड्रेनेज, लीज, कॉलोनी जैसे काम औरपाठक के पास पानी का काम है।
अब बात निगम के काम दिखने की करें तो हालत खराब है। सफाई जितनी पटरी पर अभी उतरी हुई है वैसी हालत पहले कभी नहीं रही। अधिकारियों के जो सुबह और देर रात दौरे होते थे, वे अब खत्महैं। राजस्व की बात करें तो नामांतरण घोटाला सामने आ चुका है। वहीं बिल्डर्स को 200 करोड़ से ज्यादा के आश्रय निधि शुल्क के नोटिस थमा दिए गए हैं, यह करने वाला पूरे मध्यप्रदेश में इकलौता निगम है।
जनकार्य की बात की जाए तो सड़कें धंस रही हैं, पहले स्मार्ट सिटी की 40 करोड़ की सड़क धंसी तो फिर हाल ही में पंढरीनाथ की सड़क धंस गई। गंदे पानी की समस्या भागीरथपुरा कांड के बाद भी दूर नहीं हुई और रोज निगम को शिकायतें मिल रही हैं। ड्रेनेज सिस्टम का कबाड़ा है और एक इंच बारिश में शहर का तालाब बनना जारी है। स्मार्ट सिटी के पास ठेकेदारों के भुगतान के लिए एक रुपए भी खाते में नहीं है।
वहीं भोपाल में जिस तरह से आवासीय एरिया में व्यावसायिक उपयोग पर कार्रवाई हुई इसमें इंदौर निगम चुप है। जबकि एक हाईकोर्ट अधिवक्ता नोटिस भी दे चुके हैं। विधानसभा में महेंद्र हार्डिया सवाल भी लगा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इसमें निर्देश भी दिए हैं और साफ शब्दों में कहा कि सीलिंग जारी रहेगी और आवासीय एरिया में व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो सकती है।
अवैध पोस्टर, बैनर में नेताओं के आगे निगम के अधिकारी बेबस हैं। ये बेबस अधिकारी आईएएस हैं जो दबंग माने जाते हैं। हालत यह है कि समाजसेवी प्रह्लाद पांडे ने आठ दिनों तक भूख हड़ताल की, तब चार लाइनें लिखकर दी कि इन्हें हम हटाएंगे। पाटनीपुरा में ही होर्डिंग गिरने से कई घायल हुए। लेकिन मजाल है कि निगम के अधिकारी इन्हें हटाने की जहमत उठा लें।
वहीं निगम के एक आईएएस की कार्यशैली तो इंदौर से भोपाल तक सुर्खियां बटोर रही है। इनके एसडीएम रहते हुए भी खनन ठेकेदारों से अच्छे संबंध चर्चा में रह चुके हैं। वहीं अब इंदौर निगम में भी इनके कामों की चर्चा होती रहती है। यह बात कलेक्टर से लेकर निगमायुक्त और उच्च स्तर तक पहुंच चुकी है।
मूल रूप से निगमायुक्त का पद अपर कलेक्टर स्तर का है। पहले समय-समय पर आईएएस भी निगमायुक्त रहे हैं जैसे आकाश त्रिपाठी, पी. नरहरि, नीरज मंडलोई आदि। लेकिन वे कम समय के लिए ही आए थे। लेकिन जब इंदौर सफाई में नंबर वन बना तो इसके बाद परंपरा हो गई कि यहां पर सीनियर आईएएस ही निगमायुक्त आएगा और वह भी जो एक जिले की कलेक्टरी कर चुका है।
मनीष सिंह के बाद यह परंपरा बनी। फिर देवास कलेक्टर के बाद आशीष सिंह को यहां लाया गया, फिर श्योपुर कलेक्टर रहीं प्रतिभा पाल, इसी तरह हर्षिका सिंह, शिवम वर्मा और इसके बाद दिलीप यादव और अब क्षितिज सिंघल को निगमायुक्त बनाया गया। जब सीनियर आईएएस निगमायुक्त बनकर आए तो जूनियर आईएएस अपर आयुक्त लेना शुरू कर दिया। इसमें भव्या मित्तल, सिद्धार्थ जैन, रोहित सिसोनिया, अभिलाष मिश्रा सहित कई अधिकारी आए। लेकिन एक या दो ही आईएएस रहे थे। लेकिन अब निगम को 6 आईएएस भी कम पड़ रहे हैं।
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इंदौर निगम में ये 6 आईएएस
अपर आयुक्त- आईएएस आकाश सिंह बैच 2019
अपर आयुक्त- आईएएस प्रखर सिंह बैच 2020
अपर आयुक्त- आईएएस अर्थ जैन बैच 2021
अपर आयुक्त- आईएएस आशीष बैच 2022
अपर आयुक्त- आईएएस आशीष पाठक प्रमोटी आईएएस बैच 2020
(इसके अलावा अपर आयुक्त पद पर शृंगार श्रीवास्तव, मनोज पाठक और देवधर दरवाई व अभय राजनगांवकर भी पदस्थ हैं)
किस आईएएस के पास क्या काम
हो क्या रहा है निगम में
जनकार्य की बात की जाए तो सड़कें धंस रही हैं, पहले स्मार्ट सिटी की 40 करोड़ की सड़क धंसी तो फिर हाल ही में पंढरीनाथ की सड़क धंस गई। गंदे पानी की समस्या भागीरथपुरा कांड के बाद भी दूर नहीं हुई और रोज निगम को शिकायतें मिल रही हैं। ड्रेनेज सिस्टम का कबाड़ा है और एक इंच बारिश में शहर का तालाब बनना जारी है। स्मार्ट सिटी के पास ठेकेदारों के भुगतान के लिए एक रुपए भी खाते में नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी इंदौर निगम में चुप्पी
अवैध पोस्टर, बैनर से पटा है शहर
एक आईएएस की कार्यशैली तो चर्चा में
मूल रूप से अपर कलेक्टर का पद रहा है निगमायुक्त
मनीष सिंह के बाद यह परंपरा बनी। फिर देवास कलेक्टर के बाद आशीष सिंह को यहां लाया गया, फिर श्योपुर कलेक्टर रहीं प्रतिभा पाल, इसी तरह हर्षिका सिंह, शिवम वर्मा और इसके बाद दिलीप यादव और अब क्षितिज सिंघल को निगमायुक्त बनाया गया। जब सीनियर आईएएस निगमायुक्त बनकर आए तो जूनियर आईएएस अपर आयुक्त लेना शुरू कर दिया। इसमें भव्या मित्तल, सिद्धार्थ जैन, रोहित सिसोनिया, अभिलाष मिश्रा सहित कई अधिकारी आए। लेकिन एक या दो ही आईएएस रहे थे। लेकिन अब निगम को 6 आईएएस भी कम पड़ रहे हैं।
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मोहन सरकार ने दी बड़ी राहत, इंदौर नगर निगम 500 वर्गमीटर तक के नक्शे कर सकेगा पास
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