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5 पॉइंट में समझें पूरा मामला...
रतलाम में गंदे पानी का खतरा: रतलाम नगर निगम क्षेत्र में 40% आबादी गंदे और बदबूदार पानी पीने को मजबूर है।
स्थानीय शिकायतें: नागरिकों ने नगर निगम, जनसुनवाई और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक कई बार शिकायतें कीं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला: पार्षद सलीम बागवान ने आरोप लगाया कि नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी को गलत जानकारी दी, जिस पर एनजीटी ने कड़ी फटकार लगाई।
सीवरेज और पेयजल पाइपलाइन में गड़बड़ी: सीवरेज और पेयजल पाइपलाइन पास-पास होने के कारण गंदा पानी पीने के पानी में मिल रहा है, जिससे स्वास्थ्य खतरे में है।
कलेक्टर और प्रशासन की कार्रवाई: कलेक्टर मिशा सिंह और अन्य अधिकारियों ने मोरवनी फिल्टर प्लांट और सीवरेज लीकेज सुधार कार्यों का निरीक्षण किया।
आमीन हुसैन @ रतलाम
रतलाम: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद पूरे मध्य प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है। इसी बीच रतलाम से भी पेयजल को लेकर गंभीर और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। रतलाम नगर निगम क्षेत्र में गंदे और बदबूदार पानी की शिकायतों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
40% आबादी गंदा पानी पी रही- दावा
रतलाम के वार्ड 24 के पार्षद सलीम बागवान का कहना है कि शहर की करीब 40% आबादी पिछले कई महीनों से गंदा और बदबूदार पानी पीने के लिए मजबूर है। उनका कहना है कि वार्ड 24 और आसपास के इलाकों में नलों से लगातार गंदा पानी आ रहा है, जिससे लोगों का स्वास्थ्य खतरे में है।
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निगम से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक हुईं शिकायतें
स्थानीय लोगों ने इस समस्या को लेकर कई बार नगर निगम, जनसुनवाई और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायतें कीं। कुछ लोग तो गंदे पानी से भरी बोतलें लेकर अधिकारियों के पास भी गए, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
फिर पार्षद सलीम बागवान ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से मदद मांगी। उनका कहना है कि नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी को गलत जानकारी दी। गुमराह करने की कोशिश की, जिस पर एनजीटी ने कड़ी फटकार भी लगाई।
सिस्टम पूरी तरह जर्जर हो चुका
पार्षद का कहना है कि शहर का सीवरेज सिस्टम पूरी तरह जर्जर हो चुका है। सीवरेज लाइन और पेयजल पाइपलाइन पास-पास होने के कारण गंदा पानी पीने के पानी में मिल रहा है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो रतलाम में भी इंदौर जैसी गंभीर घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
पूर्व विधायक सकलेचा ने घेरा
पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के 24 जिलों में सीवरेज का काम बहुत ही घटिया तरीके से किया गया है। सीवरेज और पेयजल की पाइपलाइनें एक साथ डाली गई हैं।
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सस्ते और खराब गुणवत्ता के पाइप लगाए गए हैं, जो जल्दी टूट जाते हैं। इस कारण सीवरेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि रतलाम समेत अन्य जिलों में भी इससे बड़े नुकसान हो सकते हैं।
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हरकत में आईं कलेक्टर मिशा सिंह
मामले की गंभीरता को देखते हुए रतलाम (Ratlam News) कलेक्टर आईएएस मिशा सिंह, नगर निगम आयुक्त अनिल भाना और एसडीएम समेत दूसरे अधिकारियों ने मोरवनी फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया। इसके बाद खेतलपुर और चांदनी चौक क्षेत्रों में जाकर सीवरेज की लीकेज को सुधारने के काम का जायजा लिया।
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स्थानीय नागरिकों और पार्षद ने प्रशासन से यह मांग की है कि गंदे पानी की सप्लाई तुरंत बंद की जाए। पाइपलाइनों की जांच कर लीकेज ठीक किए जाएं और जो जिम्मेदार अधिकारी हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि शहरवासियों को साफ और सुरक्षित पानी मिल सके।
भागीरथपुरा कांड: दूषित पानी से 16 मौतें
भागीरथपुरा कांड(Indore News): दूषित पानी से हुई मौतों के मामले (भागीरथपुरा में दूषित पानी की सप्लाई ) ने अब गंभीर संवैधानिक और नैतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर इंदौर प्रशासन और राज्य शासन ने हाईकोर्ट में दायर जवाब में सिर्फ चार मौतों को ही दूषित पानी से जोड़कर स्वीकार किया है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है।
क्षेत्र में अब तक 16 मौतें सामने आ चुकी हैं। यह दावा सिर्फ परिजनों का ही नहीं, बल्कि स्थानीय पार्षद द्वारा भी किया गया है । अगर चार मौतें सरकारी रिकॉर्ड में हैं, तो बाकी 12 मौतें किसकी जिम्मेदारी हैं?
हाईकोर्ट को गुमराह करने का आरोप
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रशासन और सरकार पर तीखा हमला बोला है। पटवारी का कहना है कि यह “हत्यारी सरकार” मौतों के आंकड़ों पर भी राजनीति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद हाईकोर्ट में केवल चार मौतों का उल्लेख किया गया।
झूठे और अधूरे आंकड़े पेश कर अदालत को भी गुमराह किया गया । पटवारी का दावा है कि वे स्वयं पीड़ितों और मृतकों के परिजनों से मिल चुके हैं और सभी मृतकों में एक जैसे लक्षण सामने आए हैं।
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