दिव्यऋषि की मौत पर कमेटी बनी, IAS की पत्नी लिफ्ट में फंसीं तो एक्ट की तैयारी, मगर हर साल जा रही 1100 जानों का क्या?

CHAKRESH | Sept 29, 2026, 15:17 IST
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भोपाल में लिफ्ट और करंट हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, बिजली सुरक्षा पर उठे सवाल
भोपाल में लिफ्ट और करंट हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, बिजली सुरक्षा पर उठे सवाल

भोपाल में आईएएस की पत्नी के लिफ्ट में फंसने और भाजयुमो नेता की करंट से मौत के बाद सरकारी अमला मिनटों में हरकत में आ गया। जांच कमेटियां बनीं और लिफ्ट एक्ट की तैयारी शुरू हो गई। लेकिन MPERC की रिपोर्ट बताती है कि 2024-25 में करंट से 1,102 मौतें हुईं। हर 8 घंटे में दम तोड़ते आम आदमी के लिए सिस्टम की यह फुर्ती क्यों गायब रहती है?

जरा इन हेडलाइंस पर नजर डालिए...

1- IAS अफसर की पत्नी होटल लिफ्ट में फंसीं, तीन लिफ्ट सील, लिफ्ट एक्ट बनेगा

2- खंभे के करंट से भाजयुमो नेता दिव्यऋषि तिवारी की मौत, सीएम का ट्वीट आते ही चार अफसरों की जांच कमेटी बनी

3- साल 2024-25 मध्यप्रदेश में करंट से 1,102 मौतें………. (?)

आपको याद ही होगा- भोपाल में 20 सितंबर को एक IAS अफसर की पत्नी होटल लिफ्ट में फंस गई थीं। आनन-फानन उसी दिन तीन लिफ्टें सील हो गईं और लिफ्ट एक्ट की चर्चा तेज हो गई। इधर 27 सितंबर को बिजली के खंभे में आ रहे करंट से भाजयुमो नेता दिव्यऋषि तिवारी की दुखद मौत हो गई।

शाम सात बजे सीएम मोहन यादव ने श्रद्धांजलि और जांच करवाने का ट्वीट किया। ठीक 21 मिनट बाद चार अफसरों की जांच कमेटी भी बन गई। और पांच दिन में रिपोर्ट देने का दावा भी हो गया।

इतनी त्वरित कार्रवाई अच्छी लगती है, मगर इस जन्नत की हकीकत कुछ और ही है। आपको शायद ही पता हो कि पिछले ही साल 2024-25 में प्रदेश में करंट से 1,102 मौतें हुई हैं। यह हम नहीं MPERC की रिपोर्ट बता रही है। MPERC के 2025-26 का डेटा आना बाकी है।

क्या आम आदमी की जान सिर्फ एक नंबर है?

बड़ा सवाल है कि मध्यप्रदेश में सिस्टम की रफ्तार इस पर टिकी है कि मामला किसका है! अफसर की पत्नी लिफ्ट में फंसीं, तो उसी दिन तीन लिफ्टें सील हो गईं। दूसरी तरफ करंट से हर दिन औसतन 3 लोग मर रहे हैं। उनकी मौत फाइलों में बस एक नंबर बनकर रह जाती है।

सोचिए एक बार। पिछले 10 दिन में भोपाल में दो घटनाएं हुईं। दोनों में सरकारी मशीनरी तेजी से दौड़ी। पर यही तेजी आम आदमी के लिए कहां चली जाती है? चलिए पहले इन दो घटनाओं को थोड़ा याद कर लेते हैं।

लिफ्ट में फंसीं IAS की पत्नी

रविवार, 20 सितंबर की सुबह करीब 10:40 बजे की बात है। अरेरा हिल्स के कोर्टयार्ड बाय मैरियट होटल में मेडिकल कॉन्फ्रेंस थी। एक वरिष्ठ आईएएस अफसर की पत्नी इसमें आई थीं।

वे दो और लोगों के साथ लिफ्ट में चढ़ीं। लिफ्ट बीच में ही रुक गई। इमरजेंसी नंबर पर फोन किया, पर तुरंत जवाब नहीं मिला। फिर महिला ने अपने पति को फोन किया।

इसके बाद पूरा अमला हरकत में आ गया। नगर निगम की टीम पहुंची। करीब 20 से 25 मिनट बाद तीनों बाहर निकाले गए।

भोपाल लिफ्ट हादसा: क्या लापरवाही मिली?

निगम के फायर, विद्युत और स्वास्थ्य अमले ने होटल की जांच की। लिफ्ट में एआरडी (ARD – Automatic Rescue Device) नहीं मिला। यह उपकरण बिजली जाने पर लिफ्ट को पास की मंजिल तक लाता है। 31 अगस्त का मासिक मेंटेनेंस भी नहीं हुआ था।

फायर सेफ्टी में भी कमियां मिलीं। निगम ने तीन लिफ्टें अस्थायी रूप से सील कर दीं। शहर की ऊंची इमारतों की लिफ्टों की जांच के आदेश भी निकल गए।

लिफ्ट एक्ट का ड्राफ्ट भी तैयार

इसी दौरान नए लिफ्ट एक्ट की चर्चा तेज हो गई। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसका ड्राफ्ट बनाया है। इसमें हर लिफ्ट और एस्केलेटर का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। मेंटेनेंस की ऑनलाइन निगरानी होगी। लापरवाही पर पेनाल्टी लगेगी। यह कानून जरूरी है। पर एक बात चुभती है। विभाग के पास आज तक शहरों की लिफ्टों की गिनती भी नहीं है।

खंभे ने ली दिव्यऋषि की जान

अब 27 सितंबर की रात पर चलते हैं। भोपाल के एमपी नगर में डीबी मॉल के सामने भीड़ थी। भाजयुमो नेता दिव्यऋषि तिवारी परिवार के साथ वहां पहुंचे थे।

वे भोपाल महानगर में युवा मोर्चा के जिला महामंत्री और युवा वकील थे। सड़क पार करते समय उन्होंने डिवाइडर पर लगा खंभा पकड़ा। खंभे में करंट दौड़ रहा था और उनकी दुखद मौत हो गई। उनकी पत्नी को भी झटका लगा, पर वे बच गईं।

सीएम मोहन यादव ने क्या कहा?

अगले दिन घटना का पता चलने पर सीएम मोहन यादव ने शाम सात बजे श्रद्धांजलि का ट्वीट किया।

"इस दुखद घटना को लेकर जिला प्रशासन को जांच कर वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।"

-डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश

भोपाल में करंट से भाजपा नेता की मौत
भोपाल में करंट से भाजपा नेता की मौत

इस ट्वीट के ठीक 21 मिनट बाद 7:21 बजे भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने चार सदस्यीय कमेटी बना दी। इसमें अपर कलेक्टर सुमित पांडे और सीएमएचओ मनीष शर्मा शामिल हैं। बिजली विभाग के मोहम्मद जावेद और इंजीनियर प्रदीप सिंह चौहान भी कमेटी में हैं। कमेटी को 5 दिन में रिपोर्ट देनी है।

jaanch committee ka patr
jaanch committee ka patr
पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की एफआईआर दर्ज की है। जिला बार के वकील हत्या का केस मांग रहे हैं। दिव्यऋषि का परिवार इस कार्रवाई का हकदार है। मगर क्या हर करंट पीड़ित को यही जवाब मिलता है?

MPERC: हर 8 घंटे में मौत

अब आंकड़ों पर आते हैं। यह रिपोर्ट मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC – Madhya Pradesh Electricity Regulatory Commission) की है। 2024-25 में प्रदेश में 1,963 बिजली हादसे दर्ज हुए। इनमें 1,102 लोगों की करंट से मौत हो गई।

यानी हर दिन औसतन 3 मौतें। हर 8 घंटे में एक घर उजड़ रहा है। 329 लोग गंभीर घायल हुए और 1,492 पशु भी मारे गए।

इसे कैलेंडर पर रखकर देखिए। 20 से 29 सितंबर के बीच औसतन करीब 30 लोग करंट से मरे होंगे। इनमें से कितनों के लिए कमेटी बनी? कितनों के नाम आपने सुने?

मंडला में पंडाल बना मौत का घर

26 सितंबर की सुबह मंडला के हीरापुर गांव में हादसा हुआ। गणेश पंडाल में 7-8 युवक सो रहे थे। करीब 5:30 बजे बिजली का तार टूटकर गिरा। पंडाल में करंट फैल गया।

18 से 24 साल के चार युवकों की मौत हो गई। तीन घायल हुए। बिजली विभाग अब तार टूटने या शॉर्ट सर्किट की जांच कर रहा है।

NCRB: करंट से मौत में MP सबसे आगे

यह समस्या नई नहीं है। एनसीआरबी की रिपोर्ट (NCRB – National Crime Records Bureau) के मुताबिक 2020 में मध्यप्रदेश में करंट से 2 हजार 412 मौतें हुईं। यह देश की कुल 13 हजार 446 मौतों का करीब पांचवां हिस्सा था। देश में सबसे ज्यादा, एक नंबर पर!

महाराष्ट्र 1,499 मौतों के साथ दूसरे नंबर पर था। उत्तर प्रदेश 1,347 के साथ तीसरे पर रहा। NCRB करंट मौत आंकड़े घर की वायरिंग से हुई मौतें भी गिनते हैं।

वजहें साफ हैं। शॉर्ट सर्किट, जलभराव में टूटे तार और कमजोर खंभे।

बिजली का खंभा करंट: जिम्मेदार कौन?

भोपाल की घटना ने एक और सच खोला। पहले खंभे को मेट्रो या पीडब्ल्यूडी (PWD – Public Works Department) का बताया गया। अब इसे नगर निगम का कहा जा रहा है।

राजधानी के बड़े मामले में भी जिम्मेदार विभाग तय करना मुश्किल दिखा। तो दूर के गांवों में जवाबदेही कौन तय करेगा?

सीधे बात करें तो सवाल तेजी का नहीं, बराबरी का है। बिजली हादसे मध्यप्रदेश में हर दिन हो रहे हैं। जो फुर्ती एक नाम देखकर जागती है, वह हर मौत पर जागनी चाहिए।

वरना आम आदमी की जान सिर्फ एक नंबर बनी रहेगी।

  1. मध्यप्रदेश में 2024-25 में करंट से कितनी मौतें हुईं?
  2. दिव्यऋषि तिवारी की मौत की जांच कौन कर रहा है?
  3. मध्यप्रदेश का नया लिफ्ट एक्ट क्या है?
यह नगरीय विकास एवं आवास विभाग का प्रस्तावित कानून है। इसमें हर लिफ्ट और एस्केलेटर का पंजीयन जरूरी होगा। मेंटेनेंस की ऑनलाइन निगरानी होगी और लापरवाही पर पेनाल्टी लगेगी।
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