मिलिए आईपीएस रूपा मौदगिल से, जिन्हें २० साल में मिले 40 तबादले, कांपते हैं अफसर-नेता

कर्नाटक की जांबाज IPS की कहानी मिसाल है। उन्होंने पद पर रहते हुए तत्कालीन CM उमा भारती को गिरफ्तार किया था। 20 साल के करियर में 40 ट्रांसफर झेलने वाली IPS से अपराधियों कांपते हैं।

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Manya Jain
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देश में महिला सशक्तिकरण को हमेशा से अन्याय के खिलाफ लड़ना माना जाता है। इसे बिलकुल अलग हटकर कर्नाटक में जन्मीं एक निडर आईपीएस ने महिला सशक्तिकरण की परिभाषा खुद लिखी। आज हम आपको एक ऐसी आईपीएस के बारे में बताएंगे जिन्होंने निडरता से मध्यप्रदेश की सिटिंग चीफ मिनिस्टर उमा भारती को गिरफ्तार किया था।

रूपा मौदगिल को अपने करियर के 20 साल में करीब 40 ट्रांसफर झलने पड़े। भारत ने कई ईमानदार और निडर अधिकारी दिए हैं, लेकिन आईपीएस रूपा मौदगिल (IPS D. Roopa Moudgil) का नाम इस सूची में सबसे ऊपर आता है। आज भी जनता रूपा मौदगिल को प्यार करती है और अपराधी डरते हैं। उनकी निडरता आज सभी के लिए बड़ी मिसाल है।   

डी. रूपा मौदगिल कौन हैं? 

डी. रूपा मौदगिल एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं। वे अपनी ईमानदारी के लिए बहुत चर्चित हैं। उनका काम करने का तरीका बहुत सख्त है। उन्होंने साबित किया कि कानून सबके लिए बराबर है। रूपा कानून के सामने भेदभाव नहीं करती हैं।

उनके साहसी स्वभाव की चर्चा पूरे देश में है। वे आज की युवा लड़कियों की प्रेरणा हैं। लड़कियां उन्हें अपना रोल मॉडल मानती हैं। उनके करियर में साहस की कई मिसालें हैं। वे एक निडर और ईमानदार अफसर मानी जाती हैं।

रूपा डी मौदगिल आईपीएस का प्रेरणादायक भाषण - सियासत डेली - आर्काइव

शिक्षा और जीवन  

डी. रूपा का जन्म कर्नाटक में हुआ और वहीं उन्होंने अपनी स्कूल एजुकेशन की। वे बचपन से ही मेधावी छात्रा रही हैं।

  • कॉलेज की पढ़ाई: उन्होंने कुवेम्पु यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन किया। वे पढ़ाई में बहुत ही होशियार थीं। शानदार प्रदर्शन के लिए गोल्ड मेडल मिला। मीडिया में भी उनकी काफी तारीफ हुई।

  • मास्टर्स की डिग्री: उन्होंने बैंगलोर यूनिवर्सिटी से आगे पढ़ाई की। उन्होंने मनोविज्ञान विषय में एम.ए. किया। यह डिग्री उनके करियर के लिए अहम थी। अब वे एक उच्च शिक्षित अधिकारी हैं।

UPSC परीक्षा में सफलता और चयन 

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद, डी. रूपा ने देश की सबसे कठिन परीक्षा, सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Examination) की तैयारी शुरू कर दी।

डी. रूपा ने वर्ष 2000 में अपने पहले ही कुछ प्रयासों में UPSC परीक्षा पास कर ली। उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 43वीं रैंक (AIR 43) प्राप्त की। उनकी इस शानदार सफलता ने उन्हें IAS (भारतीय प्रशासनिक सेवा) चुनने का अवसर दिया था, लेकिन उन्होंने समाज की मुख्यधारा में बदलाव लाने और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) को चुना।

ट्रेनिंग में भी 5वीं रैंक की हासिल

IPS के चयन के बाद, उन्होंने हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में कठिन प्रशिक्षण (Training) प्राप्त किया। रिपोर्टों के अनुसार, प्रशिक्षण के दौरान भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और 5वीं रैंक हासिल की।

आईपीएस अधिकारी रूपा मौदगिल का कहना है कि यथास्थिति बनाए रखने के लिए  व्यवस्था मुखबिरों को बदनाम करती है।

21 साल और 40 बार ट्रांसफर

आईपीएस डी. रूपा की दिलेरी सबको गर्व देती है। उनकी बहादुरी सुनकर पुलिसकर्मी भी हैरान हैं। अपराधी उनके नाम से थर-थर कांपते हैं। वे अपनी ड्यूटी के प्रति बहुत ईमानदार हैं। उनका करियर लगभग 21 साल का रहा है।

इस दौरान उनका 40 बार ट्रांसफर हुआ। यह उनकी निष्ठा और कड़वे सच का सबूत है। वे किसी भी दबाव में कभी नहीं झुकीं। उनकी ईमानदारी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

जब एक मुख्यमंत्री को किया गिरफ्तार

 IPS डी. रूपा मौदगिल के करियर का सबसे बड़ा पल आया। जब उन्होंने पूरे देश में अपनी पहचान बनाई। रूपा मौदगिल ने एक मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। बता दें रूपा मौदगिल ने मध्यप्रदेश की सिटिंग चीफ मिनिस्टर उमा भारती (Chief Minister Uma Bharti) को गिरफ्तार किया था। उन्होंने खुद जाकर उमा भारती की गिरफ्तारी की थी। यह उनका अब तक का सबसे साहसी काम था। इस घटना के बाद वे रातों-रात मशहूर हो गईं। उनकी निडरता की चर्चा आज भी होती है। उन्होंने साबित किया कि कानून सबसे ऊपर है।

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अक्सर सत्ता, ओहदा और रुतबा न्याय के आड़े आ जाते हैं, लेकिन डी. रूपा ने दिखाया कि कानून का पालन करना ही एक अधिकारी का सबसे बड़ा धर्म है। उनकी इस कार्रवाई ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। 

डी. रूपा की कहानी हमें याद दिलाती है कि एक महिला केवल घर नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था को भी सुधार सकती है। जेल विभाग में अपनी पोस्टिंग के दौरान, उन्होंने हाई-प्रोफाइल कैदियों को दी जाने वाली वीआईपी सुविधाओं का पर्दाफाश किया, जिसके लिए उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।

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