मशहूर चित्रकार ईश्वरी रावल को शिखर सम्मान से किया जाएगा सम्मानित
Sourabh Bhatnagar | Feb 13, 2025, 14:04 IST
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इंदौर के मशहूर चित्रकार ईश्वरी रावल को आज शिखर सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। रावल ने वाल्मीकि रामायण के श्लोकों पर आधारित पेंटिंग्स के माध्यम से भारतीय संस्कृति को जीवंत किया है।
भोपाल स्थित बहुकला केंद्र भारत भवन अपनी स्थापना के 43 वर्ष पूरे करने जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर इंदौर के मशहूर चित्रकार ईश्वरी रावल को शिखर सम्मान से नवाजा जाएगा। बता दें रावल ने भारतीय कला जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उनकी कलाकृतियां भारतीय संस्कृति, विशेषकर रामायण के श्लोकों पर आधारित चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं। गौरतलब है कि इस अवसर को भव्य तरीके से मनाने के लिए 13 फरवरी से 20 फरवरी 2025 तक विशेष कला समारोह का आयोजन किया जाएगा। समारोह में आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
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रावल का कहना है कि आने वाली पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने की खातिर पेंटिंग बनाई गई है, पेंटिंग वाल्मीकि रामायण के कई श्लोकों पर आधारित है, इन पेंटिग्स को पूरा होने में करीब 2 से 3 महीने का समय लगा है। ईश्वरी रावल बताते हैं कि जब मैं परेशान था तब वाल्मीकि रामायण पढ़ने की शुरुआत की और उसमें पहले अध्याय में भगवान राम वन जा रहे हैं, गांव की महिलाएं सीता जी को देखने के लिए जा रही हैं। जब अन्य श्लोकों को गौर से पढ़ा तब इस पेंटिंग को बनाने का ख्याल आया। रावल की कला से भारत के पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा भी कायल हो गए थे, उन्होंने राव को सम्मानित किया था।
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रामायण पर आधारित पेंटिंग्स बनाई
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रावल ने वाल्मीकि रामायण के श्लोकों पर आधारित कई पेंटिंग्स बनाई हैं। इन चित्रों में उन्होंने रामायण की विभिन्न घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है। उदाहरण के लिए, एक पेंटिंग में हनुमान जी को माता सीता की खोज करते हुए दर्शाया गया है, जिसमें हनुमान जी के विराट स्वरूप और उनके गुस्से से पर्वत के टूटने का दृश्य शामिल है। इन कलाकृतियों के माध्यम से रावल ने भारतीय संस्कृति और धर्म को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया है।
पूर्व राष्ट्रपति के हाथों मिल चुका है सम्मान
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रावल का कहना है कि आने वाली पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने की खातिर पेंटिंग बनाई गई है, पेंटिंग वाल्मीकि रामायण के कई श्लोकों पर आधारित है, इन पेंटिग्स को पूरा होने में करीब 2 से 3 महीने का समय लगा है। ईश्वरी रावल बताते हैं कि जब मैं परेशान था तब वाल्मीकि रामायण पढ़ने की शुरुआत की और उसमें पहले अध्याय में भगवान राम वन जा रहे हैं, गांव की महिलाएं सीता जी को देखने के लिए जा रही हैं। जब अन्य श्लोकों को गौर से पढ़ा तब इस पेंटिंग को बनाने का ख्याल आया। रावल की कला से भारत के पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा भी कायल हो गए थे, उन्होंने राव को सम्मानित किया था।
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