CM के VIP प्रोटोकॉल पर उठे सवाल; पत्रकार ने मुख्यमंत्री को पोस्ट लिख बयां किया दर्द
Amresh Kushwaha | Jul 02, 2026, 12:34 IST
CM के VIP प्रोटोकॉल पर उठे सवाल
वरिष्ठ पत्रकार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को खुला पोस्ट लिखा है। जबलपुर एयरपोर्ट पर CM के आगमन के चलते रास्ते बंद होने से वे पत्नी को विदा नहीं कर पाए। पोस्ट में VIP प्रोटोकॉल कम करने की अपील की गई है।
जबलपुर के वरिष्ठ पत्रकार संजय सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक भावुक पोस्ट लिखा है। यह पोस्ट एक निजी घटना से शुरू होता है, लेकिन आगे चलकर सरकारी प्रोटोकॉल पर बड़ा सवाल बन जाता है। सिन्हा ने बताया कि उनकी पत्नी को शाम की फ्लाइट से दिल्ली जाना था। वे उसे छोड़ने जबलपुर एयरपोर्ट गए थे। वहीं, उस दिन एयरपोर्ट पर हालात कुछ और ही थे।
पोस्ट के मुताबिक एयरपोर्ट पर भारी अफरा-तफरी थी। बताया गया कि मुख्यमंत्री के आगमन के चलते गाड़ियों की आवाजाही रोक दी गई थी। सिन्हा ने लिखा कि प्रस्थान द्वार के सामने करीब सौ सरकारी गाड़ियां खड़ी थीं। इनमें SP (Superintendent Of Police), कलेक्टर, सांसद, विधायक और नगर निगम जैसे कई विभागों के वाहन शामिल थे। पूरी सड़क पुलिस बैरिकेड लगाकर बंद कर दी गई थी। पुलिस यात्रियों से दूर गाड़ी रोकने और तुरंत लौटने को कह रही थी। इसी वजह से सिन्हा की पत्नी को दो भारी सूटकेस खींचते हुए अकेले चलना पड़ा। वे गाड़ी से उतर नहीं सके और गले लगाकर विदा नहीं कह पाए।
पत्रकार ने अपने पोस्ट में लोकतंत्र और आम जनता की दूरी पर सवाल उठाया है। उन्होंने लिखा कि टिकट वाले यात्री बाहर परेशान हो रहे थे। वहीं बिना टिकट वाले लोग स्वागत के लिए भीतर मौजूद थे। सिन्हा ने यह भी लिखा कि भारत को आजाद हुए कई दशक हो गए हैं। वहीं, पुराना प्रोटोकॉल आज भी व्यवहार में दिखता है। उन्होंने साफ किया कि वे मुख्यमंत्री की सुरक्षा के खिलाफ नहीं हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा और शाही व्यवस्था में फर्क होना चाहिए।
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सिन्हा ने पोस्ट में बताया कि मुख्यमंत्री लगभग हर हफ्ते जबलपुर आते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या हर बैठक के लिए व्यक्तिगत दौरा जरूरी है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या कई बैठकें ऑनलाइन नहीं हो सकतीं। सिन्हा ने लिखा कि जब कलेक्टर और SP एयरपोर्ट पर मौजूद रहते हैं तो शहर का कामकाज प्रभावित होता है। उन्होंने इसे एक बार-बार होने वाली समस्या बताया है, न कि साल में एक-दो बार की बात।
पोस्ट में एक और अहम मुद्दा भी शामिल है। सिन्हा ने लिखा कि जिस एयरपोर्ट पर सैकड़ों सरकारी गाड़ियां स्वागत के लिए खड़ी रहती हैं, वहीं आम यात्री को टैक्सी तक नहीं मिलती। उन्होंने बताया कि यह समस्या उन्होंने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने रखी। वहीं, अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।
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पोस्ट के अंत में पत्रकार ने मुख्यमंत्री से चार मांगें भी रखी हैं। पहली मांग है कि दौरे के दौरान अनावश्यक स्वागत और सरकारी भीड़ खत्म की जाए। दूसरी मांग है कि अधिकारियों की मौजूदगी सिर्फ जरूरत वाली जगह तक सीमित हो। तीसरी मांग है कि काफिला और सुरक्षा व्यवस्था जरूरी सीमा तक ही रखी जाए। चौथी मांग है कि एयरपोर्ट जैसी जगहों पर आम यात्रियों को प्राथमिकता दी जाए। सिन्हा ने लिखा कि सत्ता का मतलब सुविधा नहीं, जिम्मेदारी होता है।
अपने पोस्ट के अंत में संजय सिन्हा ने साफ किया कि यह विरोध का पोस्ट नहीं है। उन्होंने लिखा कि वे उस मानसिकता के खिलाफ हैं जिसमें जनता को असुविधा देकर सत्ता को सुविधा दी जाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस पोस्ट को शिकायत नहीं, बल्कि एक नागरिक की विनम्र अपील की तरह पढ़ेंगे। सिन्हा ने यह भी लिखा कि उनकी निजी परेशानी तो कुछ दिनों में सुलझ जाएगी। वहीं, जनता और शासन के बीच बढ़ती दूरी उन्हें ज्यादा चिंतित करती है।
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पत्नी को नहीं बोल पाए गुड बाय
पोस्ट में उठाया बड़ा सवाल
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हर हफ्ते होता है ऐसा नजारा
टैक्सी की समस्या भी उठाई
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चार मांगें रखीं मुख्यमंत्री के सामने
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