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News in short
- AI से एडिट किया गया बैलेंसिंग रॉक के गिरने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
- वीडियो इंस्टाग्राम पेज APANA JABALIPURAM-MP 20 से किया गया पोस्ट।
- ASP सूर्यकांत शर्मा ने कहा – अफवाह फैलाना कानूनन अपराध।
- थाना गढ़ा को जांच और कार्रवाई के निर्देश।
- सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम 24×7 कर रही निगरानी।
News in detail
जबलपुर की ऐतिहासिक पहचान मदन महल पहाड़ी स्थित बैलेंसिंग रॉक को लेकर एक चौंकाने वाला वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो में AI तकनीक से इस प्राकृतिक धरोहर को गिरते हुए दिखाया गया। इससे शहरवासियों में चिंता और आक्रोश फैल गया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई की घोषणा की है।
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वायरल हुआ फर्जी वीडियो
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक जहां एक ओर जीवन को सरल और तेज बना रही है। वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग से भ्रम और भय का माहौल भी तैयार किया जा रहा है। हाल ही में जबलपुर रेलवे स्टेशन पर हवाई जहाज की लैंडिंग का फर्जी वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद उसके क्रिएटर को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी थी। अब एक और मामला सामने आया है, जिसमें शहर की ऐतिहासिक धरोहर बैलेंसिंग रॉक को ही AI के जरिए गिरते हुए दिखा दिया गया।
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शहर की पहचान पर डिजिटल हमला
मदन महल की पहाड़ी पर स्थित बैलेंसिंग रॉक जबलपुर की पहचान है। यह संरचना वर्षों से लोगों के लिए गर्व का विषय रही है। वीडियो में इसे गिरते हुए दिखाना भ्रामक है। इसे देखकर कई लोगों ने चिंता व्यक्त की। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही इसे सच मान लिया गया।
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जबलपुर पुलिस ने दिया सख्त कार्रवाई का आश्वासन
जबलपुर के ASP सूर्यकांत शर्मा ने स्पष्ट कहा कि संबंधित वीडियो पुलिस के संज्ञान में आ चुका है। उन्होंने बताया कि इंस्टा पेज APANA JABALIPURAM - MP 20 द्वारा बैलेंसिंग रॉक को गिरते हुए दिखाया गया है। जो पूरी तरह भ्रामक और अफवाह फैलाने वाला कृत्य है। ASP ने कहा, बार-बार सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूक किया जाता है कि अफवाह फैलाना कानूनन अपराध है। फिर भी इस प्रकार का वीडियो बनाकर लोगों में भय पैदा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि वीडियो तत्काल थाना प्रभारी गढ़ा को भेजा गया है और पेज होल्डर के खिलाफ गिरफ्तारी सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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24 घंटे सोशल मीडिया मॉनिटरिंग का दावा
जबलपुर पुलिस प्रशासन के अनुसार उनकी एक विशेष सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम राउंड द क्लॉक काम करती है। यह टीम इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली संदिग्ध और भ्रामक पोस्ट पर नजर रखती है। हालांकि इसके बाद भी हमेशा यही सामने आता है कि यह सारी जानकारी पुलिस को मीडिया के द्वारा ही मिलती है। पुलिस के अनुसार, जो लोग महिमामंडन या अवैध गतिविधियां दिखाते हैं, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है। उनके खिलाफ निरंतर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
अफवाह फैलाना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक का गलत इस्तेमाल भविष्य में और भी गंभीर सामाजिक प्रभाव डाल सकता है। ऐतिहासिक धरोहर के गिरने जैसे वीडियो से भ्रम फैलता है। इससे प्रशासनिक संसाधनों पर अनावश्यक दबाव बनता है। पुलिस ने कहा है कि इस मामले में सख्ती बरती जाएगी। भविष्य में कोई डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग नहीं करेगा।
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