कलेक्टर की कुर्सी पर कुर्की का खतरा! कोर्ट का वारंट लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे वकील, अधिकारियों में मची हलचल

Neel Tiwari | Nov 04, 2026, 17:59 IST
Share
जबलपुर कलेक्ट्रेट की संपत्ति कुर्क करने का कोर्ट ने आदेश दिया है।
जबलपुर कलेक्ट्रेट की संपत्ति कुर्क करने का कोर्ट ने आदेश दिया है।

जबलपुर में सड़क हादसे के मुआवजे के 12.93 लाख रुपए और ब्याज का भुगतान नहीं करने पर कोर्ट ने कलेक्ट्रेट की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने का आदेश दे दिया है। बुधवार को अधिवक्ता सीपी सिंह, प्रमोद विश्वकर्मा और आत्माराम लखेरा जिला नाजिर के अधिकारियों के साथ कुर्की वारंट लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे तो प्रशासन में हड़कंप मच गया था।

मामला सड़क हादसे में पीड़ित एक परिवार को मिलने वाले मुआवजे का है। कोर्ट के आदेश के बाद भी परिवार को रकम नहीं मिली थी। इस पर अदालत ने कुर्की वारंट जारी कर दिया है। वकीलों के कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद कलेक्टर ने 10 दिन के भीतर भुगतान करने का आश्वासन दिया है।

2019 में सरकारी बोलेरो की टक्कर से हुई थी नवाब खान की मौत

पूरा मामला 7 अक्टूबर 2019 का है। उस दिन रात करीब 8:15 बजे नवाब खान बाजार से सामान खरीदकर पैदल घर लौट रहे थे। वे ग्राम बैरागी से निकले थे। इसी दौरान ग्राम खंदिया मेन रोड पर एक सफेद बोलेरो ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी थी। हादसा फागूराम कुशराम के घर के सामने हुआ था। बोलेरो कुण्डम की तरफ से आ रही थी। यह गाड़ी एसडीएम कार्यालय की थी। इसका नंबर MP-02 AV-6643 था। गाड़ी टीकाराम ठाकुर चला रहा था।

टक्कर से नवाब खान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें 108 एम्बुलेंस से कुण्डम के सरकारी अस्पताल ले जाया गया था। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

एमपी में 14 IPS अफसरों का ट्रांसफर: मिड-कैरिअर ट्रेनिंग पर जाने वालों की जगह लेंगे नए अधिकारी, गृह विभाग ने जारी किए आदेश | 14 IPS Officers Transferred in MP: New Officers to Take Charge of Those Going for Mid-Career Training, Home Department Issues Orders
भोपाल से शहडोल तक बदली पुलिस की कमान, ट्रेनिंग पर जाएंगे 14 IPS अफसर, इनकी जगह दूसरे अधिकारियों को मिला प्रभार
04 Nov 2026 ,
By Aman Vaishnav
मध्य प्रदेश पुलिस सेवा से जुड़े 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम (MCTP Phase-III) के 28वें बैच के लिए चुना गया है। यह ट्रेनिंग हैदराबाद की मशहूर सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में 26 अक्टूबर से शुरू हो गई है और 20 नवंबर 2026 तक चलेगी। इस ट्रेनिंग में शामिल होने वाले अफसरों में शहडोल रेंज के एक डीआईजी के साथ-साथ सात जिलों के पुलिस अधीक्षक भी मौजूद हैं।
मध्य प्रदेश पुलिस सेवा से जुड़े 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम (MCTP Phase-III) के 28वें बैच के लिए चुना गया है। यह ट्रेनिंग हैदराबाद की मशहूर सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में 26 अक्टूबर से शुरू हो गई है और 20 नवंबर 2026 तक चलेगी। इस ट्रेनिंग में शामिल होने वाले अफसरों में शहडोल रेंज के एक डीआईजी के साथ-साथ सात जिलों के पुलिस अधीक्षक भी मौजूद हैं।

पुलिस जांच में सामने आया सरकारी वाहन और चालक का नाम

हादसे के बाद कुण्डम थाने में अज्ञात वाहन और चालक के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने आईपीसी की धारा 304ए और मोटर वाहन अधिनियम के तहत अपराध क्रमांक 277/2019 दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने तत्कालीन अपर कलेक्टर विमलेश सिंह को नोटिस भेजा था। यह नोटिस मोटर वाहन अधिनियम की धारा 133 के तहत दिया गया था। उनके जवाब से पता चला कि गाड़ी टीकाराम ठाकुर चला रहा था।

इसके बाद नवाब खान की पत्नी नूरजहां, बेटे शब्बीर और बेटी मुस्कान ने मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में आवेदन लगाया था।

कुर्की आदेश
कुर्की आदेश

अदालत ने 12.93 लाख रुपये मुआवजा और 7 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया

मामले की सुनवाई जबलपुर के 30वें अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में हुई थी। सुनवाई पीठासीन अधिकारी बृजेश सिंह की अदालत में हुई थी। गवाहों के बयान, पुलिस रिपोर्ट और दस्तावेजों की जांच की गई थी। इसके बाद कोर्ट ने माना कि हादसा सरकारी बोलेरो से हुआ था।

25 फरवरी 2025 को कोर्ट ने पीड़ित परिवार को 12 लाख 93 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। साथ ही आवेदन लगाने की तारीख से 7 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज देने को भी कहा था।

हादसे के समय गाड़ी का बीमा नहीं था। इसलिए कोर्ट ने चालक और वाहन मालिक मध्यप्रदेश शासन को भुगतान के लिए जिम्मेदार माना था। इस मामले में शासन की ओर से जबलपुर कलेक्टर प्रतिनिधि हैं। दोनों को मिलकर मुआवजे की रकम चुकाने का आदेश दिया गया था।

राज्यपाल की केंद्र को भेजी रिपोर्ट पर RTI कार्यकर्ताओं का अधिकार, हाई कोर्ट ने राजभवन में निरीक्षण की दी अनुमति | RTI Activists' Right on Governor's Report to Center, High Court Grants Permission for Inspection at Raj Bhavan
राज्यपाल की केंद्र को भेजी रिपोर्ट भी देख सकेंगे RTI कार्यकर्ता, हाई कोर्ट ने राजभवन में दस्तावेजों के निरीक्षण की दी अनुमति
03 Nov 2026 ,
By Neel Tiwari
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने RTI कार्यकर्ता अजय दुबे की याचिका पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उन्हें राजभवन में रखे राज्यपाल की रिपोर्टों से जुड़े दस्तावेजों का निरीक्षण करने की अनुमति दी है। ये रिपोर्ट वर्ष 2011 से केंद्र सरकार को भेजी गई थीं। इनमें राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति से जुड़ी जानकारी शामिल है। निरीक्षण के बाद वे जरूरी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भी मांग सकेंगे।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने RTI कार्यकर्ता अजय दुबे की याचिका पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उन्हें राजभवन में रखे राज्यपाल की रिपोर्टों से जुड़े दस्तावेजों का निरीक्षण करने की अनुमति दी है। ये रिपोर्ट वर्ष 2011 से केंद्र सरकार को भेजी गई थीं। इनमें राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति से जुड़ी जानकारी शामिल है। निरीक्षण के बाद वे जरूरी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां भी मांग सकेंगे।

भुगतान नहीं हुआ तो 18 लाख तक पहुंचा बकाया

कोर्ट के आदेश के बाद भी पीड़ित परिवार को मुआवजा नहीं मिला था। इस पर परिवार ने जिला न्यायालय में दोबारा आवेदन लगाया था। यह आवेदन EX MJC No. 434/2025 के तहत दर्ज हुआ था। इस बीच मुआवजे की रकम पर ब्याज और दूसरे खर्च जुड़ते गए। इससे बकाया राशि बढ़कर 18 लाख 3 हजार 262 रुपए हो गई।

भुगतान नहीं होने पर कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है। अदालत ने जबलपुर कलेक्ट्रेट की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने का आदेश दे दिया है। यानी समय पर मुआवजा नहीं चुकाने के कारण मामला कलेक्ट्रेट की संपत्ति कुर्क करने तक पहुंच गया है।

कुर्की वारंट पहुंचा तो फाइलों के साथ तेज हो गई प्रशासनिक दौड़-भाग

वकील कुर्की का आदेश लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे तो अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अफसरों के बीच बातचीत शुरू हो गई। फाइलें भी तेजी से आगे बढ़ने लगीं। एसडीएम से लेकर एडीएम तक के अधिकारी मामला सुलझाने में जुट गए।

जिस मुआवजे के लिए पीड़ित परिवार लंबे समय से इंतजार कर रहा था, उसे लेकर प्रशासन अचानक सक्रिय हो गया। अब तक फाइल धीमी रफ्तार से चल रही थी। लेकिन कुर्की वारंट आते ही अफसरों ने तेजी दिखानी शुरू कर दी।

मोबाइल में कैद हुआ नोटिस, हार्ड कॉपी का इंतजार किए बिना जवाब की तैयारी

कलेक्ट्रेट में अधिकारियों और वकीलों के बीच बातचीत भी हुई। बताया जा रहा है कि अफसरों ने कोर्ट के नोटिस की हार्ड कॉपी का इंतजार नहीं किया। मोबाइल से नोटिस की फोटो ली और तुरंत जवाब तैयार करने में जुट गए। वकील सीपी सिंह, प्रमोद विश्वकर्मा और आत्माराम लखेरा भुगतान का पक्का भरोसा चाहते थे। वे सिर्फ मौखिक आश्वासन पर मानने को तैयार नहीं थे। पीड़ित परिवार की मांग थी कि प्रशासन लिखित में बताए कि मुआवजे की रकम कब तक दी जाएगी।

बंद कमरे में कलेक्टर के साथ बैठक, 10 दिन में भुगतान का आश्वासन

मामला बढ़ता देख कलेक्टर के साथ बंद कमरे में बैठक हुई। इस दौरान 10 दिन के भीतर मुआवजे की बकाया रकम देने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि वकीलों ने इस भरोसे को लिखित में देने की मांग की। उनका कहना था कि कोर्ट के आदेश के बाद भी पहले भुगतान नहीं हुआ था। इसलिए अब सिर्फ मौखिक आश्वासन पर कुर्की की कार्रवाई रोकना ठीक नहीं होगा।

MP में बस किराये का अजब खेल: एक ही रूट पर ₹600 से ₹10,000 तक का टिकट, परिवहन विभाग की भूमिका पर सवाल | MP Bus Fare's Strange Game: Ticket from ₹600 to ₹10,000 on the Same Route, Questions Raised on Transport Department's Role
MP में बस किराये का अजब खेल! एक ही रूट, एक ही तारीख, फिर भी कहीं 600 तो कहीं 10 हजार का टिकट
02 Nov 2026 ,
By Anshika Singh Chauhan
रूट एक, तारीख एक, लेकिन बस के किराये में 9,400 रुपए का अंतर! मध्य प्रदेश में त्योहार के दौरान निजी बसों की ऑनलाइन टिकट बुकिंग में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। एक ही सफर के लिए कहीं 600 रुपए तो कहीं 10 हजार रुपए तक किराया दिख रहा है। आखिर टिकट की कीमत कौन तय कर रहा है? क्या बस संचालकों को मनमाना किराया वसूलने की छूट है?
रूट एक, तारीख एक, लेकिन बस के किराये में 9,400 रुपए का अंतर! मध्य प्रदेश में त्योहार के दौरान निजी बसों की ऑनलाइन टिकट बुकिंग में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। एक ही सफर के लिए कहीं 600 रुपए तो कहीं 10 हजार रुपए तक किराया दिख रहा है। आखिर टिकट की कीमत कौन तय कर रहा है? क्या बस संचालकों को मनमाना किराया वसूलने की छूट है?

कोर्ट में आज पेश होनी है रिपोर्ट, भुगतान पर टिकी नजरें

कोर्ट के आदेश के मुताबिक कुर्की की कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट उसी दिन अदालत में पेश करनी है। खबर लिखे जाने तक कलेक्ट्रेट में बातचीत चल रही थी। अधिकारी भुगतान का रास्ता निकालने में जुटे थे। अब देखना होगा कि प्रशासन 10 दिन में मुआवजे की रकम देता है या कुर्की की कार्रवाई आगे बढ़ती है।

इस मामले में बड़ा सवाल भी उठ रहा है। जब कोर्ट पहले ही मुआवजा देने का आदेश दे चुका था, तो परिवार को इतने लंबे समय तक इंतजार क्यों करना पड़ा? आखिर अपना हक पाने के लिए कलेक्ट्रेट की कुर्की तक की नौबत क्यों आई?
Tags:
  • कलेक्टर की कुर्सी
  • जबलपुर सड़क हादसा
  • जबलपुर
  • कलेक्ट्रेट की चल-अचल संपत्ति
  • अधिवक्ता सीपी सिंह
  • अधिवक्ता प्रमोद विश्वकर्मा
  • अधिवक्ता आत्माराम लखेरा
  • अपर कलेक्टर विमलेश सिंह
MP में भर्ती निकली, मेरिट बनी, चॉइस फिलिंग भी हुई, लेकिन जॉइनिंग का इंतजार खत्म नहीं! 770 अभ्यर्थियों की नियुक्ति कब?

By Atul Dwivedi

MP में भर्ती निकली, मेरिट बनी, चॉइस फिलिंग भी हुई, लेकिन जॉइनिंग का इंतजार खत्म नहीं! 770 अभ्यर्थियों की नियुक्ति कब?
फसल बीमा योजना की खुली पोल, 300 में से 227 किसानों को नुकसान के हिसाब से नहीं मिला क्लेम

By Mukesh Sharma

फसल बीमा योजना की खुली पोल, 300 में से 227 किसानों को नुकसान के हिसाब से नहीं मिला क्लेम
CM मोहन यादव ने निभाया वादा, हनुमान अंश के गायक सुनील लोधी की आंखों का इलाज शुरू, रोशनी लौटने की उम्मीद

By Jyoti Mahender Bhardwaj

CM मोहन यादव ने निभाया वादा, हनुमान अंश के गायक सुनील लोधी की आंखों का इलाज शुरू, रोशनी लौटने की उम्मीद
जमीन पर कब्जे करने से नहीं मिलता कानूनी अधिकार, BSP की जमीन पर सालों से दुकान चलाने वालों की सभी याचिकाएं खारिज

By Harrison Masih

जमीन पर कब्जे करने से नहीं मिलता कानूनी अधिकार, BSP की जमीन पर सालों से दुकान चलाने वालों की सभी याचिकाएं खारिज
सिंधिया संपत्ति विवाद: फर्जीवाड़े का सबूत देने कोर्ट नहीं पहुंचीं प्रतिमा देवी, अब 18 नवंबर को होगी आरोपों पर सुनवाई

By Ratan Kumar Mishra

सिंधिया संपत्ति विवाद: फर्जीवाड़े का सबूत देने कोर्ट नहीं पहुंचीं प्रतिमा देवी, अब 18 नवंबर को होगी आरोपों पर सुनवाई
सौरभ को जान का खतरा? दिल्ली में पूछताछ पर बचाव पक्ष भी सहमत, ओमान से प्रत्यर्पण के बाद सौरभ पर कानूनी पेच

By VINAY VERMA

सौरभ को जान का खतरा? दिल्ली में पूछताछ पर बचाव पक्ष भी सहमत, ओमान से प्रत्यर्पण के बाद सौरभ पर कानूनी पेच
सौरभ चंद्राकर की वापसी पर सियासी दंगल, कांग्रेस ने कहा हमने कराई 72 FIR, बीजेपी बोली पंच साल फला फूला क्यों सट्टा

By Arun Tiwari

सौरभ चंद्राकर की वापसी पर सियासी दंगल, कांग्रेस ने कहा हमने कराई 72 FIR, बीजेपी बोली पंच साल फला फूला क्यों सट्टा