जबलपुर कलेक्टर का ट्रांसफर निरस्तीकरण आदेश रद्द, NHM की सलोनी सिडाना और कलेक्टर दीपक सक्सेना को नोटिस
Neel Tiwari | Jul 17, 2025, 18:24 IST
HC
'द सूत्र' ने NHM के निर्देश पर जबलपुर कलेक्टर द्वारा जारी ट्रांसफर कैंसिल आदेश की खामियां बताईं थी। हाइकोर्ट में ये खामियां सिद्ध हो गई हैं।
MP के स्वास्थ्य विभाग में संविदा कर्मियों के ट्रांसफर और कैंसिल मामले में अब कानूनी हस्तक्षेप हुआ है। जबलपुर हाईकोर्ट ने कलेक्टर दीपक सक्सेना के आदेश को अवैध माना। कोर्ट ने आठ कर्मियों के ट्रांसफर रद्द करने के आदेश को स्थगित कर दिया। याचिकाकर्ताओं को भी राहत मिली है। द सूत्र ने पहले बताया था कि कैसे IAS अधिकारी बाबुओं के आदेशों पर आंख मूंदकर साइन कर रहे थे। यहां क्लिक कर पढ़ें वह खबर
![a5ab60e3-d27]()
इस विवाद की जड़ उस ट्रांसफर लिस्ट में है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के कर्मियों को शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया था। यह कार्रवाई कलेक्टर की मंजूरी से जिला स्तर पर हुई थी। कुछ दिन बाद NHM भोपाल से एक पत्र के आधार पर इन तबादलों को रद्द कर दिया गया।
गौरतलब है कि NHM के निर्देश में जिस पत्र का उल्लेख किया गया, उसमें कोई स्पष्ट निर्देश नहीं था कि ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में ट्रांसफर नहीं किए जा सकते। इसके बावजूद, जबलपुर कलेक्टर ने उसी आधार पर सभी ट्रांसफर कैंसिल कर दिए। इस पर आठ संविदा कर्मियों ने इसे "गलत तर्कों पर लिया गया फैसला" मानते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाउसिंग बोर्ड के मकान बेचने को वन टाइम सेटलमेंट स्कीम, घर खरीदने पर 30 फीसदी तक की छूट
17 जुलाई को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता परितोष गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि कलेक्टर ने बिना नोटिस दिए, बिना किसी सुनवाई के कर्मचारियों को पिछली जगह पर ही भेजने का आदेश पारित कर दिया। इस ट्रांसफर को कैंसिल करने के लिए एचएम से जो निर्देश दिए गए थे और कलेक्टर के द्वारा जो आदेश जारी किया गया। दोनों लेटर्स में जिस पत्र का हवाला दिया गया था वह भी हवा हवाई था। क्योंकि उसमें ग्रामीण क्षेत्र से शहरी क्षेत्र में हो रहे ट्रांसफरों पर कोई रोक नहीं थी।
बिना सबूत पति पर नपुंसकता का आरोप मानसिक क्रूरता,हाईकोर्ट ने रद्द किया फैमिली कोर्ट का फैसला
![f339e316-596]()
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्य प्रदेश की संचालक सलोनी सिडाना ने 4 जुलाई को आदेश जारी किया। इस आदेश में सामान्य प्रशासन के जी पत्र का हवाला दिया गया था। पत्र क्रमांक 6-1/2024/एक/9 और दिनांक 29.4.2025 बताया गया था। इसके आधार पर NHM ने कलेक्टर से 17 जून 2025 को सभी ट्रांसफर रद्द करने का अनुरोध किया। हालांकि, पत्र क्रमांक 29 अप्रैल को नहीं, बल्कि 30 जून 2025 को जारी किया गया था। इसमें केवल ट्रांसफर पर प्रतिबंध की छूट 10 जून से लागू होने की जानकारी थी। इसमें ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में ट्रांसफर पर कोई रोक नहीं थी।
पति नहीं मांग सकता पत्नी की कॉल डिटेल्स,हाईकोर्ट ने खारिज की पति की याचिका
जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी की सिंगल बेंच ने प्राथमिक सुनवाई के आधार पर ट्रांसफर निरस्त करने के कारणों को गलत ठहराया। कोर्ट ने 8 जुलाई 2025 को कलेक्टर द्वारा जारी ट्रांसफर कैंसिल आदेश को स्थगित कर दिया। इसके साथ ही कर्मचारियों को राहत देते हुए, अगली सुनवाई तक उन्हें नए ट्रांसफर स्थान पर कार्यरत रहने की छूट दी।
हाईकोर्ट ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए NHM की संचालक सलोनी सिडाना और जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 1 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है।
इस घटनाक्रम ने यह साबित किया है कि बिना नियमों और लेटर्स को समझे लिए गए प्रशासनिक निर्णय कर्मचारियों के भविष्य को खतरे में डालते हैं। संविदा स्वास्थ्य कर्मी पहले से ही अस्थिर और असुरक्षित नौकरी की स्थिति में रहते हैं। ऐसे आदेश उनकी स्थिति को और जटिल बना देते हैं।
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧👩
a5ab60e3-d27
गांव से शहर भेजे गए
गौरतलब है कि NHM के निर्देश में जिस पत्र का उल्लेख किया गया, उसमें कोई स्पष्ट निर्देश नहीं था कि ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में ट्रांसफर नहीं किए जा सकते। इसके बावजूद, जबलपुर कलेक्टर ने उसी आधार पर सभी ट्रांसफर कैंसिल कर दिए। इस पर आठ संविदा कर्मियों ने इसे "गलत तर्कों पर लिया गया फैसला" मानते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाउसिंग बोर्ड के मकान बेचने को वन टाइम सेटलमेंट स्कीम, घर खरीदने पर 30 फीसदी तक की छूट
कोर्ट में खुली हवा हवाई आदेश की पोल
5 प्वाइंट्स में समझे पूरी खबर👉 जबलपुर हाईकोर्ट ने कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा जारी ट्रांसफर कैंसिल आदेश को अवैध मानते हुए उसे स्थगित कर दिया, और आठ कर्मचारियों को राहत दी।👉 यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब ग्रामीण क्षेत्रों के कर्मियों को शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया, और बाद में NHM के पत्र के आधार पर उन ट्रांसफरों को रद्द कर दिया गया। 👉 NHM द्वारा जारी निर्देश में कोई स्पष्ट निषेध नहीं था कि ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में ट्रांसफर नहीं किए जा सकते, फिर भी कलेक्टर ने इसी आधार पर ट्रांसफर रद्द कर दिए। 👉 कोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि कलेक्टर ने बिना नोटिस या सुनवाई के कर्मचारियों के ट्रांसफर कैंसिल कर दिए थे, और जो पत्र हवाले में लिया गया, वह भी काल्पनिक था। 👉 हाईकोर्ट ने NHM की संचालक सलोनी सिडाना और कलेक्टर दीपक सक्सेना से जवाब तलब किया है, और अगली सुनवाई 1 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है। | |
बिना सबूत पति पर नपुंसकता का आरोप मानसिक क्रूरता,हाईकोर्ट ने रद्द किया फैमिली कोर्ट का फैसला
काल्पनिक आदेश पर हुए थे ट्रांसफर कैंसिल
f339e316-596
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्य प्रदेश की संचालक सलोनी सिडाना ने 4 जुलाई को आदेश जारी किया। इस आदेश में सामान्य प्रशासन के जी पत्र का हवाला दिया गया था। पत्र क्रमांक 6-1/2024/एक/9 और दिनांक 29.4.2025 बताया गया था। इसके आधार पर NHM ने कलेक्टर से 17 जून 2025 को सभी ट्रांसफर रद्द करने का अनुरोध किया। हालांकि, पत्र क्रमांक 29 अप्रैल को नहीं, बल्कि 30 जून 2025 को जारी किया गया था। इसमें केवल ट्रांसफर पर प्रतिबंध की छूट 10 जून से लागू होने की जानकारी थी। इसमें ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में ट्रांसफर पर कोई रोक नहीं थी।
पति नहीं मांग सकता पत्नी की कॉल डिटेल्स,हाईकोर्ट ने खारिज की पति की याचिका
जबलपुर कलेक्टर का आदेश कोर्ट ने किया रद्द
अब सलोनी सिडाना और कलेक्टर से जवाब तलब
प्रशासनिक जल्दबाजी से बनी कानूनी उलझन
thesootr links
- मध्यप्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- जॉब्स और एजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापन और क्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧👩
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari