वीर भारत न्यास विवाद: माफी नहीं मांगी तो जीतू पटवारी को मिलेगा पांच करोड़ का नोटिस
Sanjay Dhiman | Jul 04, 2026, 18:59 IST
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BHOPAL. एमपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वीर भारत न्यास ने पटवारी को 5 करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भेजने की तैयारी कर ली है। तीन दिन में माफी न मांगने पर कोर्ट जाने की चेतावनी दी गई है।
पिछले दिनों कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने वीर भारत न्यास पर जमीन घोटाले का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि न्यास को 500 करोड़ की जमीन सिर्फ एक रुपए में दी गई।
इस आरोप के बाद न्यास ने पटवारी को 5 करोड़ रुपए की मानहानि नोटिस भेजने की तैयारी कर ली है। वीर भारत न्यास के वकील हरीश मेहता और गुंजन चौकसे ने 3 दिन में सार्वजनिक माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया है। पटवारी की ओर से माफी न मांगने पर कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
दरअसल यह विवाद तब शुरू हुआ, जब जीतू पटवारी ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने वीर भारत न्यास पर गंभीर आरोप लगाए।
पटवारी का दावा था कि सरकार ने न्यास को बेशकीमती जमीन कौड़ियों के दाम बांटी। उन्होंने इसे रेवड़ी की तरह बांटी गई जमीन बताया। यह आरोप सीधे सरकार और न्यास दोनों पर था।
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वीर भारत न्यास के वकील हरीश मेहता और गुंजन चौकसे ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों को झूठा और राजनीति से प्रेरित बताया।
मेहता ने कहा कि पटवारी ने न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी पर भी झूठे आरोप लगाए। इससे तिवारी और न्यास की छवि को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने साफ कहा कि पटवारी को 5 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजा जा रहा है।
वकील हरीश मेहता ने पटवारी को एक मौका भी दिया है। अगर पटवारी तीन दिन के अंदर मीडिया के सामने माफी मांग लें, तो आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन अगर तय समय में माफी नहीं मांगी गई, तो मामला अदालत पहुंचेगा। न्यास इसके लिए मानहानि का मुकदमा दायर करेगा।
इसी बीच मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग ने भी अपनी बात रखी है। विभाग ने कहा कि वीर भारत न्यास पूरी तरह सरकारी संपत्ति है। न्यास की स्थापना अप्रैल 2013 में राज्य सरकार ने की थी।
विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला के अनुसार मुख्यमंत्री ही न्यास के पदेन अध्यक्ष होते हैं। संस्कृति विभाग के सचिव न्यास के सचिव का कार्यभार संभालते हैं। जमीन के उपयोग के लिए तय प्रक्रिया अपनाई गई थी।
इस मामले में दावे और आपत्तियां पहले ही मांगी गई थीं। किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। इसलिए विभाग के अनुसार इस संपत्ति पर किसी निजी व्यक्ति का अधिकार नहीं बनता।
विभाग ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में न्यास ने 7 हजार पृष्ठ से अधिक शोध सामग्री प्रकाशित की है। इस दौरान कई राष्ट्रीय स्तर के आयोजन भी हुए हैं।
इधर thesootr को मिली जानकारी के अनुसार जिस जमीन पर यह ट्रस्ट बना है, उसे पहले एक निजी होटल को देने की तैयारी थी, लेकिन संस्कृति विभाग ने इसे वीर भारत न्यास को उपलब्ध करवाई। इसके लिए सभी जरूरी प्रक्रियाएं अपनाई गई हैं।
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इस आरोप के बाद न्यास ने पटवारी को 5 करोड़ रुपए की मानहानि नोटिस भेजने की तैयारी कर ली है। वीर भारत न्यास के वकील हरीश मेहता और गुंजन चौकसे ने 3 दिन में सार्वजनिक माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया है। पटवारी की ओर से माफी न मांगने पर कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
जमीन विवाद की शुरुआत
पटवारी का दावा था कि सरकार ने न्यास को बेशकीमती जमीन कौड़ियों के दाम बांटी। उन्होंने इसे रेवड़ी की तरह बांटी गई जमीन बताया। यह आरोप सीधे सरकार और न्यास दोनों पर था।
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न्यास का पलटवार, नोटिस जारी
मेहता ने कहा कि पटवारी ने न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी पर भी झूठे आरोप लगाए। इससे तिवारी और न्यास की छवि को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने साफ कहा कि पटवारी को 5 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजा जा रहा है।
तीन दिन की मोहलत
संस्कृति विभाग का पक्ष
विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला के अनुसार मुख्यमंत्री ही न्यास के पदेन अध्यक्ष होते हैं। संस्कृति विभाग के सचिव न्यास के सचिव का कार्यभार संभालते हैं। जमीन के उपयोग के लिए तय प्रक्रिया अपनाई गई थी।
इस मामले में दावे और आपत्तियां पहले ही मांगी गई थीं। किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। इसलिए विभाग के अनुसार इस संपत्ति पर किसी निजी व्यक्ति का अधिकार नहीं बनता।
विभाग ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में न्यास ने 7 हजार पृष्ठ से अधिक शोध सामग्री प्रकाशित की है। इस दौरान कई राष्ट्रीय स्तर के आयोजन भी हुए हैं।
जमीन एक निजी होटल को देने की थी तैयारी
FAQ
- जीतू पटवारी को नोटिस क्यों भेजा गया?
वीर भारत न्यास पर जमीन घोटाले के आरोप लगाने के कारण नोटिस भेजा गया। न्यास ने इन आरोपों को झूठा और मानहानि करने वाला बताया। इसके चलते 5 करोड़ रुपए का दावा किया गया है। - पटवारी ने क्या आरोप लगाया था?
पटवारी ने कहा था कि न्यास को 500 करोड़ की जमीन सिर्फ 1 रुपए में दी गई। उन्होंने इसे सरकारी जमीन का गलत बंटवारा बताया था। इसी बयान से यह पूरा विवाद शुरू हुआ।
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