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News In Short
- जेपी और अल्ट्राटेक के अधिग्रहण में 54.40 करोड़ रुपए का बिजली बकाया फंसा।
- अल्ट्राटेक के नाम अंतरिम तौर पर बिजली कनेक्शन बदलने के निर्देश।
- विवादित देनदारी को लेकर DISCOM और अल्ट्राटेक आमने-सामने।
- रिट कोर्ट की अवमानना कार्यवाही समाप्त, अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को।
News in detail
क्या है जेपी और अल्ट्राटेक के अधिग्रहण विवाद
जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड और अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड के बीच अधिग्रहण हुआ। इस कारण एमपी बिजली विभाग का करीब 54.40 करोड़ रुपए का बिजली बिल विवादों में घिर गया है। बिजली विभाग की यह मांग उस औद्योगिक इकाई से जुड़ी है, जो पहले जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधीन थी। बाद में अधिग्रहण के जरिए अल्ट्राटेक सीमेंट के हिस्से में आई। अधिग्रहण के बाद यह स्पष्ट न हो पाने से कि इस बकाया राशि का वास्तविक जिम्मेदार कौन है, मामला अदालत तक पहुंच गया।
2017 में हुआ था कंपनियों का अधिग्रहण
पूरा मामला वर्ष 2017 से जुड़ा हुआ है। 29 जून को हुए एक समझौते के तहत अल्ट्राटेक सीमेंट ने जयप्रकाश एसोसिएट्स और उसकी सहयोगी कंपनियों की कुछ यूनिट्स का अधिग्रहण किया था। इसी सौदे के तहत मध्य प्रदेश स्थित बेला सीमेंट प्लांट भी अल्ट्राटेक के अधीन आ गया। अधिग्रहण के समय यह तय किया गया था कि पुरानी और विवादित देनदारियों को नई कंपनी के ऊपर स्थानांतरित नहीं किया जाएगा, लेकिन व्यवहार में यही शर्त विवाद का कारण बन गई।
Contingent और Disputed Liabilities पर टकराव
अधिग्रहण समझौते में आकस्मिक और विवादित देनदारियों को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए थे। अल्ट्राटेक का दावा है कि बिजली विभाग द्वारा जारी 54.40 करोड़ रुपए की मांग पहले से ही विवादित है। इसे जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड ने चुनौती दे रखी है।
यह मांग 35.5 करोड़ रुपए और 19.25 करोड़ रुपए के दो अलग-अलग डिमांड नोटिस के रूप में जारी की गई थी। अल्ट्राटेक का कहना है कि चूंकि यह राशि Disputed Liability की श्रेणी में आती है, इसलिए इसके भुगतान की जिम्मेदारी उसी पर नहीं डाली जा सकती।
बिजली कनेक्शन के नाम पर अटका मामला
अल्ट्राटेक सीमेंट ने अधिग्रहण के बाद संबंधित यूनिट के लिए बिजली कनेक्शन अपने नाम कराने का आवेदन किया था। हालांकि बिजली विभाग ने बकाया का हवाला देते हुए नाम परिवर्तन से इनकार कर दिया। इसका असर यह हुआ कि यूनिट का संचालन अल्ट्राटेक के नियंत्रण में होने के बावजूद बिजली कनेक्शन पुराने नाम पर ही दर्ज रहा। इससे कंपनी को नाइट टेंडर लेने सहित अन्य व्यावसायिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
रिट कोर्ट की सख्ती के बाद मामला पहुंचा हाईकोर्ट
मामले में पहले रिट कोर्ट ने 26 मई 2025 को बिजली कंपनी को कनेक्शन का नाम बदलने का आदेश दिया था। आदेश का पालन न होने पर 8 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और बिजली कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी की व्यक्तिगत उपस्थिति तक के निर्देश दे दिए। इसी पृष्ठभूमि में बिजली कंपनी ने डिविजन बेंच के समक्ष अपील दायर की।
अल्ट्राटेक की ओर से पी चिदंबरम ने रखा पक्ष
जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अल्ट्राटेक सीमेंट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने तर्क दिया। कहा कि विवादित बिजली बकाया को अधिग्रहण की स्कीम ऑफ अरेंजमेंट से बाहर रखा गया था। उन्होंने यह भी कहा कि कनेक्शन नाम पर न होने से कंपनी को नए कॉन्ट्रैक्ट्स लेने में नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर बिजली कंपनी ने नियमों का हवाला देते हुए बकाया भुगतान या क्षतिपूर्ति बांड की शर्त रखी।
बिजली कनेक्शन नाम ट्रांसफर आदेश के अधीन
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अंतरिम आदेश पारित किया। कोर्ट ने बिजली कंपनी को निर्देश दिया कि वह फिलहाल उपभोक्ता का नाम जयप्रकाश एसोसिएट्स की जगह अल्ट्राटेक सीमेंट दर्ज करे। यह व्यवस्था अपील के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
वसूली पर नहीं लगी रोक
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस अंतरिम आदेश से बिजली विभाग के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे। विभाग जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड से 54.40 करोड़ रुपए की बकाया राशि की वसूली के लिए अपनी कानूनी प्रक्रिया जारी रख सकता है। साथ ही कोर्ट ने अल्ट्राटेक को अगली सुनवाई तक बैलेंस शीट सहित अधिग्रहण से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं।
अगली सुनवाई 24 मार्च 2026
इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर अब निगाहें 24 मार्च 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होने की उम्मीद है कि आखिर 54.40 करोड़ रुपए के बिजली बकाया की अंतिम जिम्मेदारी किस कंपनी पर आएगी।
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