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News in Short
- बीआरटीएस व ट्रैफिक समस्या को लेकर जनहित याचिकाएं लगी हुई हैं।
- इसमें लगातार सुनवाई हो रही है, इंदौर हाईकोर्ट से रेलिंग हटाने का पहले ही आदेश कर चुका है।
- आदेश के करीब एक साल के बाद भी रेलिंग नहीं हट सकी है और न ही डिवाइडर बना।
- इस मामले में लगातार अधिकारियों की पेशी हो रही है, लेकिन अभी तक हल नहीं निकला।
- रेलिंग हटाने के चार बार टेंडर हुए, बाद में ठेकेदार भाग गया, इसे भी कोर्ट में बुलाया गया था।
News in detail
इंदौर बीआरटीएस व ट्रैफिक समस्या को लेकर एक बार फिर जनहित याचिकाओं को लेकर हाईकोर्ट इंदौर बेंच में सुनवाई। इसमें जो जिरह हुई और निर्देश हुए, वह तो अलग है, लेकिन इसी दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं के बीच में आपस में खुसर-फुसर चली। इसमें कहा जा रहा है कि ठेकेदारों से अब 20 की जगह 40 फीसदी कमीशन मांगा जा रहा है। इसलिए वह काम नहीं कर रहे हैं। अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।
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इस तरह अधिवक्ताओं में हुई खुसर-फुसर
हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर करीब एक घंटे तक लंबी सुनवाई हुई। इहाईकोर्ट के आदेश पर कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त आईएएस क्षितिज सिंघल, ट्रैफिक डीसीपी आनंद कलादगी, पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और रेलिंग हटाने के ठेकेदार दिनेश यादव मौजूद थे। जब सुनवाई होने के बाद हाईकोर्ट जस्टिस आर्डर डिक्टेट कर रहे थे, तभी अधिवक्ताओं के बीच में खुसर-फुसर शुरू हुई।
ठेकेदार के काम नहीं करने और बीच में छोड़ने पर एक अधिवक्ता ने अन्य अधिवक्ता से कहा कि ठेकेदार से पहले 20 फीसदी कमीशन मांगते थे। अब 40 फीसदी मांगा जाता है कहां से वह देगा, इसलिए वह काम नहीं कर रहा। हालांकि यह बात आन रिकार्ड नहीं आई। लेकिन हाईकोर्ट रूम की लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान वीडियो में इसका ऑडियो रिकार्ड हो गया। यह भी खुसर-फुसर में चर्चा हुई कि अब ये कमीशन वाली बात बोल नहीं सकते हैं।
ठेकेदार ने ठेका छोड़ने का बताया कारण
उधर ठेकेदार दिनेश यादव फर्म की ओर से बताया गया कि जो BRTS रेलिंग को लेकर टेंडर में बताया गया वह उस स्तर की नहीं थी। स्क्रैप कम निकला है, बस स्टैंड पर 12 टन की जगह 8 टन ही माल निकल रहा है। बहुत घाटा हो रहा है इसलिए छोड़ा। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह जनहित का मुद्दा है, इस आधार पर काम नहीं रोक सकते हैं। आपके कारण जनता परेशान हो रही है। आप निगमायुक्त के साथ बैठक कर मुद्दा सुलझाएं। उधर निगमायुक्त भी ठेकेदार की तरफ से काम नहीं करने का मुद्दा बताते रहे।
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मुख्य सचिव सुलझाएं मुद्दा
उधर हाईकोर्ट ने साफ कहा कि एलिवेटेड कॉरिडोर व अन्य मुद्दे नीतिगत है। इसमें स्थानीय स्तर पर फैसला होते नहीं दिख रहा है। मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन विभाग और PWD विभाग के बीच बैठक कर इस संबंध में फैसला लें।
इंदौर को गिनी पिग बना दिया है
वहीं सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने कहा कि इंदौर को गिनी पिग बनाकर रख दिया है। पहले रेलिंग को लेकर दूसरी बातें रखी गई। हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई। बीती सुनवाई में 12 जनवरी को एलिवेटेड कारिडोर का मुद्दा उठाया गया। यह कॉरिडोर तो 2019 का है और जनवरी 2024 में सीएम भूमिपूजन कर चुके हैं। अभी भी दो-पांच साल यह नहीं बनना है। इस पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि दिसंबर में सीएम की अध्यक्षता में बैठक हो चुकी है। निर्देश दिए जा चुके है कि फरवरी में अगले माह से पीडब्ल्यूडी काम शुरू करने जा रहा है।
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डिवाइडर को लेकर यह निर्देश हुए
सुनवाई में अधिकारियों ने बताया कि 6 किमी का हिस्सा एलिवेटेड कॉरिडोर का LIG से नवलखा का है। बीआरटीएस कुल 11.20 किमी का है। इसमें कुछ हिस्सा दो ब्रिज में जा रहा है। वहां काम हो रहा है। बाकी 3.20 किमी का हिस्सा है। यहां हम अप्रैल तक सेंट्रल डिवाइडर का काम पूरा कर देंगे। एक ओर की रेलिंग हम पूरी हटा चुके हैं।
ग्रीन कारिडोर भी सोचना होगा
इस दौरान हाईकोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने ग्रीन कॉरिडोर की जरूरत भी बताई। कहा कि दिल्ली व अन्य शहरों में बीआरटीएस नहीं है। लेकिन ग्रीन कॉरिडोर जरूरी है ताकि एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड को आसानी हो। इसमें अगली सुनवाई अब 28 जनवरी को होगी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मनीष यादव, एएजी राहुल सेठी व अन्य उपस्थित थे।
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