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Photograph: (thesootr)
News in Short
- बीआरटीएस हटाने के लिए फरवरी 2025 से टालमटोली हो रही है
- इस मामले व ट्रैफिक के अन्य मुद्दों को लेकर जनहित याचिकाएं दायर है
- हाईकोर्ट लगातार अधिकारियों को बुलाकर जवाब तलब कर रहा है
- सुनवाई के दौरान फिर अधिकारियों की बहानेबाजी हुई, इस पर अब डे टू डे मानिटरिंग की बात हुई है
News in Detail
INDORE. इंदौर बीआरटीएस हटाने के लिए फरवरी 2025 से मामला अटका हुआ है। एक साल होने को आ गया है। इस मामले में अधिकारियों की लगातार बहानेबाजी पर आखिरकार इंदौर हाईकोर्ट 12 जनवरी को सुनवाई में बिफर गया। साफ कहा कि आप गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, मजबूर मत करिए कि हम सख्त एक्शन लें। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि 19 जनवरी को फिर सुनवाई होगी और इसमें डे टू डे मानीटरिंग करेंगे।
बीआरटीएस हटाने वाला ठेकेदार फिर भाग गया है। उसे नोटिस दिए गए हैं लेकिन वह सुन नहीं रहा है। यह बात हाईकोर्ट में ट्रैफिक व बीआरटीएस के मुद्दे पर लगी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने कही।
सुनवाई में कलेक्टर शिवम वर्मा के साथ ही ट्रैफिक डीसीपी आनंद कलादगी और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल उपस्थित हुए थे। वहीं ठेकेदार के भागने को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने कहा कि ठेकेदार को भी इसमें अगली सुनवाई में बुलाया जाना चाहिए, क्योंकि हर बार यही बात हो रही है कि ठेकेदार काम नहीं कर रहे हैं।
एक साल होने को आ गया है और बीआरटीएस की रैलिंग तक अधिकारी नहीं हटवा सके हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने इसमें अहम तर्क रखे। उनके साथ अधिवक्ता शिरिन सिलावट थी। वहीं अन्य लिंक याचिकाओं में अधिवक्ता मनीष यादव है।
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एडिवेटेड कॉरिडोर का भी लिया बहाना
वहीं अधिकारियों के स्टेटस रिपोर्ट में सफाई दी गई कि एलिवेटेड कॉरिडोर के चलते एलआईडी से नवलखा तक काम अभी रुका है। इस पर बागडिया ने कहा कि यह प्रोजेक्ट को कांग्रेस सरकार के समय 2019 का है।
इसमें वर्तमान सीएम मोहन यादव तो शुरूआत कर चुके हैं, ऐसे में यह तो सिर्फ मामला सरकारी विभागों की लालफीताशाही का और एक-दूसरे के पाले में गेंद डालने के सिवा कुछ नहीं है। इसकी आड़ में यह बीआरटीएस की रैलिंग वाले काम से बच रहे हैं।
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हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती
इस पर हाईकोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने सख्ती से कहा कि आप गंभीरता से मामले को नहीं ले रहे हैं, मजबूत मत कीजिए कि हम सख्त एक्शन लें। दो सप्ताह में बीआरटीएस की रेलिंग हटाईए। अगली सुनवाई में तीनों अधिकारियों के साथ ही अब ठेकेदार, पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को भी तलब किया गया है। अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी।
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ट्रैफिक डीसीपी पर जताई नाराजगी
वहीं इस मामले में हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि सभी विभाग नोडल अधिकारी नियुक्त करेंगे जो हाईकोर्ट द्वार नियुक्त वकीलों की कमेटी के साथ डिस्कस करेगे, लेकिन इस मालमे में पहले कहा गया कि ट्रैफिक डीसीपी ने नोडल अधिकारी ही नियुक्त नहीं किया।
जब इस पर नाराजगी जताई गई कि एक माह में नोडल अधिकारी तक नहीं नियुक्त कर सके तो फिर जवाब दिया गया कि बना दिया है लेकिन कमेटी को सूचित नहीं कर सके। इस पर हाईकोर्ट ने पूरी कार्यशैली को लेकर गहरी नाराजगी जाहिर की।
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धार्मिक अतिक्रमण पर दो एक्शन रिपोर्ट
वहीं अवैध कब्जा कर ट्रैफिक को बाधित करने वाले अवैध धर्मस्थलों को चिन्हित करने पर बताया गया कि चार ही है। जब हाईकोर्ट ने आश्चर्य जताया तो कहा गया कि हमने केवल बीआरटीएस मार्ग के चिन्हित किए।
इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बाड़डिया ने आपत्ति लेते हुए कहा कि इसका मतलब है कि इन्होंने हाईकोर्ट के आदेश को ही नहीं पढ़ा है जिसमें पूरे शहर में चिन्हित करने और हटाने के लिए कहा गया था।
इस पर हाईकोर्ट ने दो सप्ताह में इस मामले में कलेक्टर को एक्शन रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया। जिसमें इन्हें चिन्हिंत करने जिसमें अवैध रूप से लाउडस्पीकर लगातार ध्वनि प्रदूषण भी किया जाता है उन्हें हटाने तक की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया।
24 घंटे ट्रैफिक लाइट चालू रहे
हाईकोर्ट ने अपने अक्टूबर 2019 के पुराने आदेश को लेकर भी कहा कि 24 घंटे ट्रैफिक लाइट चालू रहना चाहिए। बैटरी बैकअप व्यवस्था होना चाहिए अभी लाइट जाते ही हालत खराब होती है। इसके लिए शासन क्या कर रहा है, इस पर भी जानकारी दीजिए।
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