केरवा डैम में अवैध मिट्टी भराव पर NGT सख्त, निगरानी के लिए अफसरों को अलग-अलग जिम्मेदारी
The Sootr | Feb 06, 2026, 18:06 IST
kerwa dam illegal
भोपाल के केरवा डैम में अवैध मिट्टी भराव के मामले में NGT ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। अफसरों को जिम्मेदारी दी गई है ताकि डैम और आसपास की पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
BHOPAL. राजधानी भोपाल के केरवा डैम इलाके में अवैध मिट्टी डालने के मामले में अब सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी NGT ने साफ कर दिया है कि डैम और पानी वाले इलाके के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी। इस मामले में अलग-अलग विभागों को अलग जिम्मेदारी देकर निगरानी तेज करने के आदेश दिए गए हैं।
भोपाल के महुआखेड़ा इलाके में केरवा डैम और उसके आसपास के क्षेत्र में बड़ी मात्रा में मिट्टी, कोपरा और मुरम डाली गई थी। जांच में सामने आया कि दो हजार से ज्यादा डंपर यहां डाले गए। कई जगह करीब 10 फीट तक भराव किया गया। आरोप है कि जमीन समतल कर आगे चलकर प्लॉटिंग और कॉलोनी बनाने की तैयारी की जा रही थी।
आपको बता दें कि इस मामले की शुरुआत मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर हुई थी। एनजीटी ने साफ किया कि इस मुद्दे को सबसे पहले और लगातार उठाने वाले रशीद नूर खान थे। मामले में आवेदक की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने एनजीटी में पक्ष रखा।
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यह मामला तब सामने आया, जब पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की शिकायतें लगातार सामने आईं। NGT ने खुद इस मामले को उठाया और संयुक्त जांच टीम बनाई। टीम में कलेक्टर, जल संसाधन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वेटलैंड से जुड़े अधिकारी शामिल किए गए। जांच में यह भी साफ हुआ कि डैम की तय सीमा यानी फुल टैंक लेवल के अंदर भी मिट्टी डाली गई है।
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NGT ने कहा कि अगर जमीन निजी भी हो, तब भी पर्यावरण नियम तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अगर किसी काम से डैम, जल क्षेत्र या पानी जमा होने वाले इलाके पर असर पड़ता है तो उस पर रोक जरूरी है। जांच में यह भी माना गया कि 33 मीटर बफर जोन का उल्लंघन हुआ है और मिट्टी हटाने के नोटिस सही हैं।
NGT ने कहा कि केरवा डैम भोपाल के लिए बहुत जरूरी जल स्रोत है। यह शहर को वैकल्पिक पीने का पानी देता है और खेती के लिए भी अहम है। अगर डैम के आसपास अतिक्रमण और भराव होता है तो डैम की उम्र कम हो सकती है और पानी जमा करने की क्षमता भी घट सकती है। इसे सीधे जनता के हित के खिलाफ माना गया है।
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1. इस पूरे मामले में NGT ने अब अफसरों को अलग-अलग जिम्मेदारी दे दी है। जल संसाधन विभाग को हर महीने कम से कम दो बार डैम इलाके की जांच करनी होगी और इसके लिए खास टीम बनानी होगी। अगर कहीं भी मिट्टी डालना या कब्जा मिलता है तो तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
2. कलेक्टर, वन विभाग और पंचायत अधिकारियों को कहा गया है कि कैचमेंट इलाके से अवैध कब्जे हटाएं। साथ ही वहां पेड़ लगाने और मिट्टी बचाने के काम भी करें ताकि लंबे समय तक डैम सुरक्षित रहे।
3. राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को आदेश दिया गया है कि दो महीने में डैम के आसपास के प्रभाव वाले पूरे इलाके की सीमा तय करे। इसका मकसद यह है कि आगे बिना अनुमति निर्माण और प्लॉटिंग जैसे काम रोके जा सकें।
4. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लगातार निगरानी करने और नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है। NGT ने यह भी कहा कि साफ और सुरक्षित पर्यावरण में जीना हर नागरिक का अधिकार है और सरकार इस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती।
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इस मामले को प्रदेश में एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि अब दूसरे डैम और जलाशयों में भी अवैध प्लॉटिंग और मिट्टी भराव के मामलों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। पहले भी NGT भोपाल के केरवा और कलियासोत इलाके में अतिक्रमण और पर्यावरण नुकसान को लेकर नाराजगी जता चुका है और अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठा चुका है।
भोपाल के महुआखेड़ा इलाके में केरवा डैम और उसके आसपास के क्षेत्र में बड़ी मात्रा में मिट्टी, कोपरा और मुरम डाली गई थी। जांच में सामने आया कि दो हजार से ज्यादा डंपर यहां डाले गए। कई जगह करीब 10 फीट तक भराव किया गया। आरोप है कि जमीन समतल कर आगे चलकर प्लॉटिंग और कॉलोनी बनाने की तैयारी की जा रही थी।
आपको बता दें कि इस मामले की शुरुआत मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर हुई थी। एनजीटी ने साफ किया कि इस मुद्दे को सबसे पहले और लगातार उठाने वाले रशीद नूर खान थे। मामले में आवेदक की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने एनजीटी में पक्ष रखा।
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इस तरह सामने आया मामला
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नियम तोड़ने की इजाजत नहीं दे सकते
NGT ने कहा कि केरवा डैम भोपाल के लिए बहुत जरूरी जल स्रोत है। यह शहर को वैकल्पिक पीने का पानी देता है और खेती के लिए भी अहम है। अगर डैम के आसपास अतिक्रमण और भराव होता है तो डैम की उम्र कम हो सकती है और पानी जमा करने की क्षमता भी घट सकती है। इसे सीधे जनता के हित के खिलाफ माना गया है।
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विभागों, अफसरों को सौंपा काम
2. कलेक्टर, वन विभाग और पंचायत अधिकारियों को कहा गया है कि कैचमेंट इलाके से अवैध कब्जे हटाएं। साथ ही वहां पेड़ लगाने और मिट्टी बचाने के काम भी करें ताकि लंबे समय तक डैम सुरक्षित रहे।
3. राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को आदेश दिया गया है कि दो महीने में डैम के आसपास के प्रभाव वाले पूरे इलाके की सीमा तय करे। इसका मकसद यह है कि आगे बिना अनुमति निर्माण और प्लॉटिंग जैसे काम रोके जा सकें।
4. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लगातार निगरानी करने और नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है। NGT ने यह भी कहा कि साफ और सुरक्षित पर्यावरण में जीना हर नागरिक का अधिकार है और सरकार इस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती।
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नजीर बन सकता है आदेश
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