नटवर सर के लिए बच्चों का आंदोलन, सर स्कूल नहीं लौटे तो सब TC ले लेंगे

खरगोन के सांदीपनि स्कूल में शिक्षक नटवर पाटीदार के तबादले ने सबको भावुक कर दिया। छात्र उन्हें रोकने के लिए रोने लगे और पूरा गांव समर्थन में उतर आया।

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Manya Jain
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MP News: अक्सर सरकारी स्कूलों से बदहाली की खबरें आती हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के खरगोन से मिसाल पेश करने वाली कहानी आई है। यह मामला सेगांव के सांदीपनि विद्यालय (Sandipani School) का है।

यहां गणित पढ़ाने वाले नटवर पाटीदार का ट्रांसफर किया गया। उनका ट्रांसफर रोकने के लिए बच्चे रोने लगे। जिसके बाद पूरा गांव भी टीचर के समर्थन में उतर आया। छात्र और ग्रामीणों ने उनके लिए प्रशासन के विरुद्ध आ गए है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला? 

टीचर के लिए सड़क पर आए छात्र

दरअसल खरगोन में प्रशासन ने नटवर पाटीदार नाम के टीचर का ट्रांसफर कर दिया। इस ट्रांसफर का कारण दो शिक्षकों के बीच आपसी तालमेल की कमी को बताया जा रहा है, लेकिन छात्रों के लिए नटवर सर का तबादला इलाके के लिए किसी सदमे से कम नहीं था। जैसे ही उनके ट्रांसफर की खबर फैली, स्कूल के बच्चे चिलचिलाती धूप की परवाह किए बिना सड़क पर उतर आए।

जिला मुख्यालय तक 35 किमी का सफर

करीब 200 छोटे बच्चों ने एक बड़ा संकल्प लिया। छात्र अपने पसंदीदा टीचर को वापस लाना चाहते थे। इसके लिए बच्चों ने 35 किलोमीटर पैदल यात्रा शुरू की। पहली से पांचवीं कक्षा के बच्चे आंदोलन के लिए सड़क पर उतर आए। उनके हाथों में तख्तियां और आंखों में आंसू थे। वे पैदल चलकर जिला मुख्यालय की ओर बढ़ रहे थे।

सुरक्षा के कारण प्रशासन ने उन्हें रास्ते में रोका, लेकिन बच्चे अपने नटवर सर के बिना स्कूल नहीं जाना चाहते। उनकी इस जिद ने प्रशासन का फैसला बदल दिया।

स्कूल में 54 से 246 हुई संख्या

 सरकारी शिक्षक नटवर पाटीदार केवल एक सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि एक बदलाव के वाहक (Change Maker) साबित हुए। जब उन्होंने इस स्कूल की कमान संभाली थी, तब यहां छात्रों की संख्या मात्र 54 थी। अपनी मेहनत, पढ़ाने के अनोखे अंदाज और बच्चों के प्रति समर्पण की बदौलत उन्होंने इस आंकड़े को 246 तक पहुंचा दिया।

टीचर नहीं तो ले लेंगे MassTC 

नटवर कठिन से कठिन गणितीय सवालों को खेल-खेल में हल करना सिखाते हैं। प्राथमिक स्तर से ही बच्चों को नवोदय और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना। ग्रामीणों का कहना है कि नटवर सर की वजह से उन्होंने निजी स्कूलों से बच्चों को निकालकर सरकारी स्कूल (Khargone Latest News) में भर्ती कराया। ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट कर दिया था कि यदि नटवर पाटीदार की वापसी नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से अपने बच्चों का Mass Transfer Certificate (TC) ले लेंगे और स्कूल खाली कर देंगे।

कलेक्टर ने बदला फैसला

बच्चों का विरोध देखकर कलेक्टर भाव्या मित्तल तुरंत आगे आईं। उन्होंने बताया कि तबादला प्रशासन के कामकाज की वजह से था। किसी ने टीचर की कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं की थी। नटवर पाटीदार का पढ़ाने का रिकॉर्ड भी बहुत शानदार रहा है। आखिरकार प्रशासन ने अपना पुराना फैसला बदल दिया है। नटवर पाटीदार को वापस उसी स्कूल में भेज दिया गया। 

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