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News In Short
- MP में नेशनल हाईवे के विकास और रखरखाव पर रोजाना औसतन 21 करोड़ खर्च हो रहे हैं।
- प्रदेश में हर दिन औसतन 33 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें रोजाना 11 मौतें दर्ज की जा रही हैं।
- साल 2021 से 2025 के बीच प्रदेश ने 61 हजार 176 हादसों में अपने 19 हजार 416 नागरिकों को खो दिया है।
- पिछले पांच सालों (2020-2025) में हाईवे मेंटेनेंस और विकास पर कुल 38 हजार 700 करोड़ खर्च किए गए।
- सरकार ने हादसों के लिए तेज रफ्तार और लापरवाही को वजह बता रही है।
News In Detail
भोपाल. मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। बावजूद इसके नेशनल हाईवेज की जमीनी हकीकत आज भी डरावनी है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने एक चौंकाने वाला विरोधाभास उजागर किया है।
प्रदेश में जहां हाईवे के रखरखाव और विकास पर हर दिन औसतन 21 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आंकड़ों की मानें तो एमपी के हाईवे पर हर दिन औसतन 33 सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें रोजाना 10 से 11 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
पांच साल में खर्च हुए 38 हजार 700 करोड़
सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, साल 2020-21 से लेकर 2024-25 तक MP में हाईवे के विकास और मरम्मत के लिए कुल 38 हजार 700 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसका मतलब है कि सरकार हर साल औसतन 7 हजार 740 करोड़ राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण, डवलपमेंट और सुरक्षा कार्यों पर खर्च कर रही है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद सड़कों पर सुरक्षित सफर की गारंटी नहीं मिल पा रही है।
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पांच साल में 19 हजार से ज्यादा मौतें
लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश के हाईवे पर कुल 61 हजार 176 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों ने प्रदेश को गहरे जख्म दिए हैं। इनमें 19 हजार 416 लोगों की मौत हो गई। अगर इसका सालाना औसत निकालें, तो प्रदेश में हर साल 12 हजार 235 हादसे हो रहे हैं। साथ ही 3 हजार 883 लोग काल के गाल में समा रहे हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि करोड़ों के निवेश के बाद भी हाईवे डेथ ट्रैप बने हुए हैं।
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मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना रिपोर्ट (2021-2025)
| साल | कुल हादसे (Total Accidents) | कुल मौतें (Total Deaths) |
| 2021 | 11,030 | 3,389 |
| 2022 | 13,860 | 4,025 |
| 2023 | 14,561 | 4,476 |
| 2024 | 13,937 | 4,644 |
| 2025 | 7,788 | 2,882 |
| कुल (Total) | 61,176 | 19,416 |
करोड़ों के खर्च के बाद चूक कहां?
केंद्र सरकार का दावा है कि बीते पांच सालों में मध्य प्रदेश को चार हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं सौंपी गईं। बजट का बड़ा हिस्सा सुरक्षा इंतजामों और मरम्मत पर खर्च हुआ। लेकिन हादसों की बढ़ती संख्या ने मेंटेनेंस की गुणवत्ता और हाईवे डिजाइन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या साइन बोर्ड, लाइटिंग और सर्विस रोड जैसे सुरक्षा इंतजाम कागजों से उतरकर जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हो पा रहे हैं?
| वित्तीय वर्ष (Financial Year) | खर्च की गई राशि (करोड़ में) |
| 2020–21 | 8,250 |
| 2021–22 | 9,006 |
| 2022–23 | 6,210 |
| 2023–24 | 7,447 |
| 2024–25 | 7,799 |
| कुल योग (Total) | 38,712 |
रफ्तार का कहर या सड़कों की खामी?
मंत्रालय ने संसद में दिए अपने जवाब में इन हादसों के लिए मुख्य रूप से तेज रफ्तार, मानवीय लापरवाही, ओवरलोडिंग और वाहनों की खराब स्थिति को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ड्राइवर को दोष देना काफी नहीं है। जब तक ब्लैक स्पॉट्स (खतरनाक मोड़) का सुधार और सड़कों की प्रभावी निगरानी नहीं होगी, तब तक करोड़ों का यह बजट हादसों को रोकने में नाकाम ही रहेगा।
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